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رواية الوجه الآخر للقمر الفصل التاسع والعشرون و30

حصرين ع موقع المجد للقصص والحكايات 

الكاتبه فريده احمد فريد

رواية الوجه الآخر للقمر

الفصل التاسع والعشرو و30



ف منزل  نسرين  الأمن


لكن  لم يكن يبال  احد  بها ..... أنظار الكل  ع  عمار  ونورهان... التي  قالت  بغضب


(انت  جاي  هنا  ليه... عايز  ايه  تاني  يا عمار... ايه  جاي  تساومني  ع  بيت  اختي  كمان... لعلمك  انت  وابوك  وجدك... ده بيتها  من  فلوسها... محدش فيكم  ليه  قشايه  هنا.... يلا  لو  سمحت  خد  ابن عمك  والخدامه  بتاعته  دي  من  هنا  من غير مطرود...... براااااااااا)


نور تمزق  قلبها  لنعت  اختها  لها  بالخادمه... محمود  غضب  منها... لكن  عمار  سار إليها بخطي بطيئه


نظرت  له  بخوف  لكنها  تمثل  القوه  والشجاعه... نسرين تحفزت  للدفاع عنها... لكن  عمار  وقف  أمامها  وقال  بغموض


(ومين قالك اني جاي  عشان كده... انا جاي  عشان حضرتك.... جاي  ارجعك معايا... انا  مايهمنيش  الورث  اللي  اتنازلتي  عنه... ولا يهمني  كلام جدك... ولا حتي  بقا يهمني  اللي امك  عملته  زمان... انا ما يهمنيش غير حضرتك يا  أستاذه) 


أنظار الكل  تحولت  لعمار... محمود  ينظر  له  بصدمه... مصدوم  من  شجاعه  ابن  عمه  وجرأته  التي  لم


يمتلكها  هوه  ليصرح  عن  مشاعره.... نسرين تنظر  له  بأبتسامه  مشجعه... نور  ادمعت عيناها  ولا تعرف السبب


اما  نورهان  المعنيه بالكلام... كانت  كمن  تعرض  لصاعقه  كهربائيه.. لم  تستطع النطق... او  الرد... او حتي ان  ترمش بعيناها


نظرت  له  ليكمل  ما  بدأه  تريد أن تسمع  منه  المزيد... تريده  ان  يقول  لها  ما  تتمني  ان تسمعه... عمار  اكمل  بجرأه


(ها  يا  آنسه  هتيجي معايا  بالذوق  ولا  اخدك  غصب عنك... وما تفكريش  ان  حضره  الظابط  أختك  هتحميكي  مني... ولا  اي حد  غيرها.... انتي  بتاعتي  انا  يا  نورهان  هانم... وهأخدك  يعني  هأخدك  بالذوق او بالعافيه... ها  قولتي ايه) 


عمار  أفسد  كل شئ... نورهان  تمنت ان  تقذفه  بأي شئ ف وجهه... لكنها  اخفضت  عيناها  وقالت  له  بوجع


(وانا  مش  عايزه ارجع معاك ع اي حته... انا  عايزه  اتطلق.... طلقني وسبني  ف حالي) 


عمار  بغضب(وانا  مش  هطلقك  يا  نورهان... احنا  أصلا  نعتبر  لسه  ما اتجوزناش .... انا  جوزك  شرعاً وقانونا... واقدر  دلوقتي اخدك  غصب عنك  ومحدش  يقدر  يقف ف وشي... بس  انا  عايزك  تيجي  معايا  برضاكي) 


نورهان  بصراخ(لييييه... عايزني  ارجع  معاك  لييييه... قلي   سبب واحد... سبب  واحد  بس  يا  عمار  وانا  هقبله  وهرجع  معاك  من  سكات) 


عمار  نظر  حوله.. وجدهم  جميعأ  ينظرون إليه.. مترقبين ماذا  سيقول؟؟؟ او  سيفعل.... عمار  لم  يجد  مفر  من  عدم  الإجابه ع  سؤالها... قال  لها  حفاظاً ع ماء الوجه


(جدي  هوه  اللي  جبرني  ع كده.... وانتي  هترجعي  معايا... ايه  عايزه  يقولي  اني  مش  راجل... معرفتش  امشي  كلمتي  ع  مراتي.... اتفضلي  لمي هدومك  وتعالي  معايا  حالا... هننزل  البلد  النهارده... جدي   يخلص  حوار  العموديه  بتاعه... وبعدها  هسيبك  ف حالك... هحررك  مني  يا  نورهان... وده  هوه  شرطي  الوحيد  عشان  تخلصي  مني... يلااااااااا) 


نورهان  نظرت له غير  مصدقه... الحزن  وخيبه الأمل  كادوا  ان  يصرخوا  من  عيناها... لكن  محمود  انقذ الموقف


عندما  قال  لها

(عمار  عنده  حق... لازم  كلنا  نرجع  البلد  ونخلص من حوار  جدي  وابويا  كمان.... عشان  كل واحد  يرجع  ويشوف  مصالحه... وبعدين يا نورهان  ما تنسيش  القضيه بتاعه  الشاب ده  اللي  حياتك  بقت  معرضه  للخطر  بسببها... احنا  عرفنا  من  صاحبتك  ان  الجلسه  بعد  3  أيام... عمار  لازم  يفضل  جمبك  لحد ما تخلصي  من  القضيه دي... مش لازم  تعتبريه  جوزك  عشان  تنفذي كلامه... اتعاملي معاه ع انه  ابن عمك  وبس... ويلا  يا نسرين انتي  كمان   سيف  عايزك  هناك... ياريت  تنجزوا  شويه  عشان  نوصل  قبل  ما  الليل  يدخل  علينا... ورانا  حاجات  كتير نعملها  النهارده  يلااااااااااا) 


نسرين اؤمت  له  موافقه... قالت  ببساطه

(ماشي  هنغير  هدومنا  انا  وهيه  وننزل  لكم..... اعتبروا  البيت بيتكم ) 


اؤم  لها  محمود... عمار  جلس  ع  كرسي  وهوه  منهك القوي. يشعر  انه  أضاع  فرصه  لن  تتعوض  مع نورهان 


محمود نظر  لنور  وطلب  منها  ان  تحضر  الشاي  له ولعمار.... اطاعت  نور   وذهبت للمطبخ  بعدما  بحثت عنه بعيناها


شعرت  بالامتنان لمحمود... لأنها فضلت  ان  تظل  وحدها  ولو  لبضع دقائق..... كم  تشعر الأن  بالحزن والضياع


لم  تفهم  لما  تشعر  هكذا  بالرغم  من  رؤيتها  لاختيها  ووجودها معا ابناء عمها... بمعني انها  عادت  لعائلتها 


لكن شعور  الضياع  والحيره  والنقص  لأ  يفارقوها  ابدا.... انهت  إعداد الشاي  وتوجهت  إليهم  خارجا 

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عمار  اخذ  الاختين  ف سياره  نسرين... وانطلق  بهما... محمود  ونور  كانا  خلفه  ف  السيارة الأخري 


بعد  صمت  طويل  دام  ساعه تقريباً ... نور  قالت  أخيراً  لتقطع  حبل  الصمت


(تفتكر  عمار  بيحب  نورهان) 


محمود  آفاق  من  شروده  وانتبه لها... قال  بثقه

(آكيد) 


نظرت له مصدومه  وقالت  بأندفاع

(ايه اللي  أكده... انت  واثق  كده ليه من كلامك) 


محمود(لأن ببساطه  جدي  ما طلبش  منه  حاجه  بالعكس قاله  طلقها ... بس  عمار  كدب  عشان  ما يحرجش  نفسه  ادامنا  كلنا... بس  انا  عارف  انه  ف اول فرصه  يختلي  بيها  لوحدهم..... عمار  هيقولها  ع الحقيقه) 


ابتسمت  نور  بمراره.... نظر  لها  وقال

(معناها ايه  الضحكه  الماسخه دي) 


نور  بحزن(لأ ولا حاجه... اصل يعني.... انا  طبعاً بتمني لها السعادة من كل قلبي... بس... بس  انا  مش  هكون  معاها  لما  تعرف  الحقيقه دي... ولا  هقدر  اشاركها  فرحتها... بس  هيه  تستحق  السعادة  يا  محمود... انا... محمود  انا  مش  هرجع  معاك  ع  البلد... انا  هنزل  هناك  قبل  ما  تخرج  من  القاهره.... هروح  انا  لحال  سبيلي... كنت  خايفه  وقلقانه  ع  نورهان... بس  خلاص  اتطمنت عليها  مع  عمار  ونسرين... اكيد  هما  هيقدروا  يحموها  من اي حد.... محمود باشا  انا  مش  لاقيه كلام  اقولهولك ع اللي انت  عملته  معايا... بس  شكرأ) 


محمود  نظر  لها  ببرود... وقال  بلامبالاه

(وانتي  مين سمح لك  تمشي..... انت  من دماغك  كده  بتقرري) 


نور(قصدك ايه) 


محمود(قصدي  هتيجي معايا البلد... ولما  ابقا  اخلص  من  حواراتهم... هبقا  اشوف  حوارك  انتي  كمان) 


نور  بأستغراب(حواري.. انهي  حوار  بالظبط  وبعدين هرجع  معاك  بصفتي  ايه  ما  انت  فضحتني  وقلت  حقيقتي  ادامهم... يبقا  ارجع  معاك  بصفتي ايه) 


محمود  بعصبيه

(نور  ما تنسيش  انك  لسه  مراتي.... و بعدين انتي  نسيتي  عقابك... عايزه  تفلتي  مني  بالطريقه.... فاكراني بنسي  تأري  ولا  إيه  يا  ابله... انا  بس  افوق  وبعدين اخد  حقي  منك... وبعدها  يحلها  ربنا  من  عنده... بس انا  ما بسبش  حقي  وانتي  عارفه كده كويس) 


نور  نظرت  له  حزينه  مكسوره... لم  تعلق  ع  كلامه.... تاهت  ف  عالمها  الخاص... ف  وحدتها  الكئيبه التي ترعرت  فيها


محمود  وجدها  تاهت  بعيناها  ع  الطريق... صمت  ولم  يقول  شيئآ  أخر... هوه  أيضا  مرهق  من  أحداث اليوم  الطويلة 


والسفر  من  شرق البلاد  لغربها... صمت  وتابع  سيره  ف  هدوء  مخيف

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ف سرايا الأنصاري 


أضواء وانوار  عديده  تزين  السرايا  من الخارج والداخل... أهالي البلده  كلهم  تقريبآ  مجتمعين


ف سرايا  العمده  المرتقب.... دبائح  وغنائم  ع  طاولات  خشبيه أمام الأهالي  الغلابه 


محمود الجد  يتحدث مع رجال  مهمه  ف البلد ... يقف  بجواره  محمود  حفيده  وعبد العزيز... و بالقرب منهم


يجلس  إسماعيل ع كرسيه  المتحرك.... خلفه  ولديه  حسن  وسيف... عمار   كان  يبحث  بعيناه  عن  زوجته


نور  شعرت  بمقت  غريب  يحتل  قلبها.. لم  تتحمل  وجودها  ف سرايا  جدها  اكثر  من  هذا.... شقت طريقها  وسط  الحضور 


وخرجت  من  الفيلا... نظرت  حولها  لرجال  محمود  المسلحين... ورجال  جدها  الحرس  ع السرايا 


لكنهم  لم يكونوا متأهبين  للحراسه.. بل  كانوا  يتسامرون... و يشربون  الشاي ... ويمرحون  بالمزاح 


نور  اخذتها  قدمها  لبيت  أبيها  القديم... كانت  تسمع  الموسيقي  الصاخبه  الصادره  من  سرايا  جدها


لكن  اكتئاب  عميق  يحتل  قلبها  الوحيد.... وجدت  نفسها  تقف  أمام  بيت  أبيها  المهجور..... اضاءت  مصباح  هاتفها


ودلفت  للداخل  لم يحتلها  الخوف  بالرغم  من  بروده  البيت  ووحشيته... لكنها  الأن  تراه  بشكل أخر 


تتخيل  حديقه منزلهم  وهيه  مزهره  وغنيه  بالورود  والنخيل  والأشجار المثمره.... دخلت  للمنزل  وحاولت  ان


تشعل  اضاءته... لكن  لا يضئ  اي  مصباح.... ثبتت  هاتفها  المضئ  ع  بقعه  الدماء ع  الحائط.... عادت  تتخيل


المشهد  منذ  سنوات  طويله.... مشهد  أبيها  وهوه  يركض  خوفا  من  هذا  الرجل.. هذا العشيق.... حاولت  أن تتذكر


أين كانت  والدتها  تقف  بالظبط  وقتها... لم  تتذكر... لكنها  تتذكر  جيدآ  وجه  أبيها  المرعوب... ووجه  العشيق


الذي  اغمد  سكين  ضخم  ف  قلب  أبيها... وطعنه  مرات  ومرات... تتذكر  صراخ  أمها  وضربها  ف  عشيقها 


تتذكر  اخذ  الرجل  لها  وهروب  أمها  معه  وهيه  تحمل  نسرين  الرضيعه.... تتذكر أيضآ  عندما  ألقي العشيق 


بأمها  من القطار  وهوه  يسير  بسرعه  كبيره.... نور  دمعت  عيناها  بوجع... صدرت  من  بين  شفتاها  آهات 


آهات  حارقه  تمزق القلوب.... جلست  ع  الأرض  وتركت  العنان  لعيناها  بالبكاء  والعويل  ع  كل شئ... لكن  فجأه 


صدر  صوت  من  خلفها فزعها... جمد  الدماء ف  عروقها... صوت  لرجل  عجوز  قادم  من  بعيد   ويصحبه  صدي  صوته


نور  صرخت  لثقتها ويقينها ان  هذا  شبح... شبح  احتل  منزلها  القديم  المهجور... اقترب  منها  هذا  الشبح


وصرخ  فيها... جعلها  تفقد  وعيها  من  الرعب

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ف سرايا الأنصاري 


وسط  الحشود  والغناء  والرقص... و الرجال  اللذين  يهنئون  ويرقصون  بعصاهم  الرقص  الصعيدي


اقترب  عبد العزيز  من  إحدي  خادمات  السرايا  وأمرها  ان  تصعد  لغرفه  سما  وتفتحها  وتطلب  منها


ارتداء  فستان  الزفاف  الذي  احضره  لها  من  مصر  مخصوص.... ابتسمت له  الخادمه وذهبت  تنفذ  الأمر 


وصل  المأذون  أخيراً... وبدأت الزغاريط  تعلو  من  نساء البلد  و الخادمات.... أما  البنات  نسرين ونورهان 


كانوا  يشعرون  بمقت  واشمئزاز  ليس له  مثيل... وصلت  عروس  الجد  مع  عائلتها  بعد حضور  المأذون  كما  اتفق

الجد  مع  عوض  ان  يحضرها  لبيته....


محمود  نظر  حوله  ينتظر  ظهور  فهد... وجده  أخيراً  فهد  كان يقترب  منه... ابتسم  محمود  بخبث


وشق  طريقه  وسط  الحشود  إليه... فهد  أخرج  من  جيبه  زجاجه  صغيره  أعطاها لمحمود  وقال له ف أذنه 


(حط لها  قطرتين  بس  ف  العصير  وقول عليها  يا رحمان يا رحيم) 


ابتسم  محمود  له  وربت ع  كتفه .... تركه  ودخل السرايا  يبحث  عن نور... لتدس  السم  ل سما  ف العصير


لكنه  لم  يجدها..... اضطر  ان  يشير  الي خادمه  ان  تحضر  عصير  للعروس  سما  وتأتي  به  إليه... اؤمت  


الخادمه  موافقه.... وذهبت  للمطبخ..... عادت  له  بعد قليل  بكوب العصير.... أخذه  منها  وصعد  به  لغرفه سما


لكنه  وجد  بابها  مفتوح  وحسن والخادمه  عندها  ف الغرفه  حسن  يصرخ  فيها


(يعني إيه... هترجعي  تمثلي  عليا  تاني  محدش  جبرك  توافقي  عليه... انا  مش  هسيبك  تنصبي  ع  عمي  يا  سما... الجوازه دي  مستحيل تتم) 


سما  بصراخ  وهيه  تمزق  فستان  الزفاف  

(وانا  مش عايزه  اتجوزه  ولا  اتجوز  غيررررره... ارحمني  بقا... خليني  امشي  من  هنا) 


حسن(وكان ايه اللي جابك  اصلآ... انتي  جيتي  معانا  بمزاجك  عشان  تكملي  تمثليتك... انا  جبتك  هنا  عشان  اصطاد  بيكي  منذر  الكلب... لكن انتي  جيتي  عشان  تكملي  تمثيلك  عليا.... فاكره  انك  تقدري  تخليني  اغير رأيي فيكي... وف الآخر  عايزه  تتجوزي  عمي... دا  بعدك  يا  سما) 


محمود  دخل  الغرفه  ووضع العصير  ع  منضده  قريبه من  سما... حسن  نظر  له  وقال  بصراخ


(انت مش قلت لي  يا  عم محمود  انك  مش  هتخلي  الجوازه  دي  تتم.... مستحيل اسيب  ابوك  يتجوزها  انت سامع) 


محمود  مسك ذراعه  وقال  وهوه  يمثل  الهدوء  والرزينه 

(اهدي  يا  حسن  مفيش  جواز  هيتم  النهارده... خلي  عندك  ثقه  فيا... وانتي  يا  سما  ما تخافيش  انا  عارف  انك مش عايزه  تتجوزي  ابويا... انا  هحل  لك  الحوار ده كله.... بس  انتي  اهدي  يلا  يا  ام محمد  تعالوا  وسيبوها ترتاح  شويه.... اشربي  العصير  ده  يا  سما  وما تخافيش... ارتاحي  خالص) 


كلامه  كان  غريب  ومريب... حتي  الخادمه  تعجبت  منه... لكن  سما  نظرت  له  بشكر  وامتنان 


محمود  ضميره  صرخ  به  أن لا يفعل  بها  هذا... لكنه  حاول  أن  يخرس  ضميره  حتي  لا  يتزوج  ابيه  منها


شعر انها  تستحق  العقاب... لأنها بالنسبه  له  وكما  وصفها  حسن  انها  نصابه  و تريد  الإيقاع  برجل  ثري  لتحيا  برافهيه 


محمود  اقنع  نفسه  بهذا  و تجاهل  صوت  الضمير  وقلبه  الذي  يرفض  قتل  هذه  الفتاه... لكنه  متغطرس  أناني.. رفض الإستماع لصوت العقل  والضمير 


خرج  حسن  كالعاصفه  من  غرفتها... وخرجت  الخادمه خلفه  محمود  مسك  الباب  ليغلقه  عليها  قال  لها  بأبتسامه  زائفه 


(هدي نفسك  واشربي العصير) 


اخذ  حسن  وهبطوا للطابق الأسفل  دون أن يتحدثوا  ف اي شئ.... حسن  كان ف قمه  غضبه  ومحمود  ف صراع  مع  نفسه


دخل  الرجال  السرايا  لعقد قرآن  سما  وعبد العزيز... عبد العزيز رأي إبنه  وحسن  والخادمه  يهبطون  السلالم


قال  لهم(فين سما  ما نزلتش  معاكم  ليه) 


محمود  قال  بغضب(بتلبس  وجايه  ورانا) 


حسن نظر  لمحمود  بصدمه... لم يفهم  لما  كذب  وقال  هذا.... جلس عبد العزيز  وهوه  يبتسم  بأنتصار 


قال  الجد(يبقا  اكتب  انا  ع  فرح  لحد ما تجهز  عروسه إبني) 


صوت  نسائي  من  خلف  الجميع 

(عروسه إبنك... قصدك  بنت ابنك  يا  محمود يا انصاري... عايزه  ابنك يتجوز  بنته) 


صدمه  وفزع  وذهول  من  كل الحاضرين... وقف عبد العزيز  ومحمود  الجد  فجأه ... نظروا  لها  بصدمه قاتله


قال  عبد العزيز (آمل... آمل.. انتي  عايشه... انتي  قلتي إيه... انت  قلتي اييييييييييييييه) 


كان يصرخ  فيها... لكنها اخرسته  بصراخها  فيه  

(ايوااااااااا  سما  تبقا  بنتك... بنتك  اللي  خدتها منك  من  زمن.... بنتك  اللي  داقت  المر  والعذاب بسببك.... بنتك  يا  عبد العزيز  بيه) 


عبد العزيز بذهول(بنتي... سما  تبقا  بنتي... طب  إزاي... انتي  بتقولي كده  ليه  انتي  كدابه) 


آمل بغضب(انا  مبكدبش... سما  دي  تبقا  بنتك!) 


هنا حسن  تدخل  وهوه  ينظر   لمحمود  بفزع

(بنتك  إزاي... سما  دي  قالت  إن  جوزها  قتل امها  قصادها... وهيه  قتلته  بسبب  كده... انتي  اكيد  غلطانه... اكيد  انتي  غلطانه) 


محمود(طبعاً غلطانه... دي  مش  أختي... اكيد  مش  اختي.. و... ولما... ولما  انتي عايشه  كنتي  فيييين.... ليه  ما  سألتيش عننا... ليه... ليه  ما جتيش ... ابنك  اتقتل  يا  هانم... أحمد  مات.... وسما  دي... دي  احنا  جبناها  هنا  من  لبنان  عشان  نصطاد  الكلب  اللي قتل  اخويا... انتي  اكيد  غلطانه... مستحيل تكون  هيه  سما  أختي) 


آمل بعصبيه(لأ  هيه  بنتي  وأختك  وبنتك  يا  عبد العزيز بيه.... صحيح  جوزها  الكلب  ضربني  بالسكينه  وخدها  وهرب... بس... بس  انا  ما موتش... ف ناس  لحقتني  وفضلت  ادور  عليها  سنين   وشهور.... ورجعت  مصر  لما  ناس  معرفه  شافوا  اسمها  ف الجوازات... وكمان  عرفت  ان  ابني  مات... أحمد  اتقتل  بسببكم... وبسبب  الحرام  اللي  انت  وابوك  وجدك  شغالين  فيه.... واخرتها  ابوك  عايز  يتجوز  بنته) 


عبد العزيز كأنه  اصيب  بطلق ناري ف  صدره... لم  يستطع ان  يفتح  فمه... لكن  محمود  صرخ


(اختي... سما  دي  تبقا اختي... نهار اسود... انا  قتلتها... انا  قتلتها  دلوقتي... انا  سمتها  عشان  ابويا  ما  يتجوزهاش... سمااااااااااااااااااااا) 


صرخت  الام... فزع  حسن... محمود  صرخ  وهوه  يركض  ع  السلم  كي  ينجدها.... لكن  فجأه... دوي


انفجار هائل  أسقط  محمود وحسن  من  ع  السلالم... وسقط  معظم  الحاضرين  أرضا... فجأه  دوي  انفجار اخر


واشتعلت النيران  ف  ارجاء  السرايا... وصوت  طلقات ناريه  ف  الخارج... كانت  لحظه  جنونيه  لم  يفهم  احد  شيئاً 

&&&&&&&&&&&&&&&&

قبل لحظات  ف  غرفه  سما


سما  ترتجف  خوفاً.... تخشي  ان  يدخل  عبد العزيز عليها  ويجرها  للمأذون  جرا


نظرت  ع المنضده  تلتقط هاتفها... فكرت  ان تبلغ  الشرطه  انها مخطوفه و  محبوسه  ف  هذه  السرايا... لكنها  عدلت  عن  هذه الفكره


نظرت  لكوب العصير... حاولت  أن  تهدئ  ضربات  قلبها  المتسارع... مسكت  الكوب  بيد  مرتجفه  مرتعشه


رفعته  لترتشف  منه  قليلاً.... لكن  فجأه دوي  انفجار هائل... أسقطت الكوب  رغما  عنها  ف  الأرض من  الفزع  وهيه تصرخ من  الخوف


نيران  اشتعلت  ف  الردهه  خارج  غرفتها.... السرايا  تشتعل  من  الخارج... فدخلت  النيران  غرفتها


سما  نظرت للحريق  بفزع .... النيران  تشتعل  بسرعه  رهيبه  ف كل شئ  ف الستائر  والسجاد  والأثاث  الخشبي


سما نظرت حولها  غير مصدقه... لأ مفر ولا مخرج أمامها بكت  برعب... دعت  ربها  من كل  قلبها.... لكن  فجأه... صوت   جعل  الروح  تدب  فيها  من  جديد


صوت  قال  لها  من خلفها

(سما... ألف حمد لله  اني  لقيتك  حبيبتي) 


نظرت  وجدته  منذر  يقف ع أعتاب  النافذه... قفز  واقفا  أمامها بكل  شموخ.... سما لم  تعرف  كيف  وقفت ع قدمها


وطارت  إليه  مسرعه.... ألقت  بنفسها  بين  ذراعيه  بقوه  وهيه  تبكي  وتناديه  بشق الأنفس... منذر  احتضنها بقوه


وشم  عبيرها  وهوه  يتنفس  براحه  وسعادة... ابعدها  لينظر لجمال  عيناها... قال  لها  بحب


(يا الله  اد ايش  اشتقت لك حبيبتي... وربي يا  سما  انا  روحي  فيكي.)


سما  ضمته  بجنون... قالت  له  وهيه  تغالب  دموع عيناها


(خدني معاك... لو بتحبني بجد  خدني  من  هنا... خرجني  يا  منذر بالله عليك من  السجن ده) 


ابتسم  لها  بسعاده... وقبل  شفتيها  بنهم... تركته  يقبلها  ولم  تعترض... ابتعد  عنها... ووضع  يده  حولها


وصعد ع  حافه  النافذه... نظرت  سما  برعب  لاسفل وعادت تنظر  له  قالت  له


(انت  هتعمل ايه يا  منذر) 


منذر  بثقه(انتي  بتثقي  فيني  ولا  شو) 


هزت  رأسها  بقوه... ابتسم  اكثر... وأمسكها  من  خصرها  بقوه... تشبثت  به.... مد  يده  وامسك  حبل  سميك  كان


ينزل  من  سطح  السرايا.... قفز  بها  منذر  وسط  النيران  التي  تشتعل ف جدار  السرايا  بسرعه  هائله 


سما  صرخت  واغمضت عيناها  رعبا... لكنهم  وصلوا  للأرض  بسلام.... منذر  امسك  يدها... وركض  بها  للإتجاه 


المعاكس  لبوابه السرايا.... وصلوا  لسور  خلفي  به  بوابه  حديد  صغيره  من  الواضح  انها  للخدم... لم  يكن عليها


اي  حرس... منذر  اخرج  سلاحه  وأطلق  النار  ع السلسله  الحديد التي  تغلق  البوابه... كتمت  سما  صراخها


ووضعت  يدها ع اذنها... لكن  منذر  مسك  يدها.... وركض  بها  للخارج... كانت  هناك  سياره  جيب  تقف  تنتظرهم


ركب  منذر  وسما  بها... وانطلق  السائق  بسرعه.... سما  نظرت  لمنذر بأمتنان  كبير  وألقت  رأسها  ع  صدره


ضمها  منذر  وهوه  يقبل  رأسها بحب.... لكنها  نظرت  بعيناها  للسرايا  للمره  الاخيره... رأت  أناس يخرجون  راكضين


خلف  بعضهم  قبل  أن يحترقوا   بداخل  السرايا.... سمعت  صراخهم  وهوه  يشق  سكون الليل  ووحدته


لكنها  لم  تبال بصراخهم  ولا  خوفهم... أصبحت  متلبده المشاعر... لم  تلم  منذر  ع  فعلته... ولم  تأبه  بسكان  السرايا


اذا كانوا قتلي... ام  أحياء 

************************

ف منزل أهل نور

نور تفتح عيناها  ع صوت  عجوز  قلق  يقول لها


(ها  الحمد لله... قومي ... قومي  يا بنتي... مالك  بس... خفتي  من إيه) 


نهضت  بصعوبة وهيه  تشعر  بدوار  خفيف... نظرت للرجل  العجوز  وقالت له  بخوف


(انت  بني آدم زينا  صح... مش عفريت ولا حاجه) 


ضحك  الرجل  بملئ شدقيه ... ومسك  ذراعها  ساعدها  ع النهوض... ابتسمت  لضحكته  البشوشه.... قال  لها


(لأ يا بنتي  انا مش عفريت... انا... انا  بس  بأجي  البيت ده  من الوقت للتاني.... منها  بتطمن  ان محدش  بيدخله  ويعمل فيه  حاجه  وحشه... ومنها  بكلم  صاحبي) 


نور  بدهشه(صاحبك... صاحبك  إيه اللي  هنا  يا  حج) 


الرجل(اعذريني يا بنتي.... انا  مقصدش  العين طبعاً ما تعلاش  ع الحاجب... بس  انا  طول عمري كنت  بعتبره  صاحبي  مش  سيدي  وولي  نعمتي... انا  وهوه  يعتبر  متربيين سوا... ومن  بعده  الدنيا  اسودت ف وشي  ومش  طايق  اعيش  ولا  عارف  احس  براحه  ولو  لساعه واحده) 


نور  حارت  كثيرا ف  آمر  هذا  العجوز.... ابتسم  لها  ببراءه  وسألها 


(صحيح انا  عمال احكي  واتكلم  ونسيت  أسألك  انتي  مين  وبتعملي ايه هنا... شكلك  بنت ناس  ووشك  مريح  للاعصاب... انتي اكيد مش جايه  هنا  بنيه  وحشه  صح) 


هربت  دمعه  شارده  من  عيناها  دون  قصد منها... اشفق  العجوز عليها ونظر  لها  بود... منتظر  منها  ردا... قالت


وهيه  تبتسم  بمراره 

(لأ  مفيش  نيه  وحشه... ببساطه  يا  حج... انا  هنا  ف  بيتي) 


نظر  لها  الرجل  غير  مصدق... قال  دون  تردد

(نور... نور الهدي... نور  بنت  فؤاد... انتي  نور.... إزاي  تهت  عنك  يا  بنتي... إزاي  أنسي  العيون  الحلوه  دي  والشعر  الدهبي  ده.... إزاي  يا بنتي... حمد لله ع السلامه... أخيراً  رجعتي... أخيرا  ظهرتي  يا غاليه  يابنت  الغوالي.... يااااااااه  يا بنتي... انتي  شبه حنان  بالظبط  الله  يرحمها ويغفر لها) 


نور  اشمئزت  من  ذكر  أمها... قالت  له  بكره  وغضب

(ما تحبش  سيره  الخاينه دي  ع  لسانك  يا  حج... إزاي بتتكلم  عليها  كده  وهيه  اللي  قتلت  أبويا... صاحبك  اللي  بتتكلم  عنه... منها لله... دي  يتدعي عليها  مش  يتدعي  لها... ربنا  يحرقها  ف نار جهنم... هيه  السبب ف  اللي  حصل لنا انا واخواتي  منها لله) 


نظر  لها  الرجل  غير  مصدق... كأنه  صفع ع وجهه  بقسوه... نظرت  له  نور  بعدما  سمعت  الهدوء  يعم المكان فجأة 


تعجبت  لما  صمت... لكنها  رأت... رأت  شئ  غريب  ف  عيناه... رأت  بكاء... دموع  غبر  عليها  الزمن.... قال  لها


وهوه  يحارب  دموع عيناه  الصافيه

(ليه كده... حتي  انتي  يا بنتي.... حتي انتي  بتظلميها.. دي... دي ضحت  بحياتها  عشانكم ... ليه  كده بس) 


نور  فرغت  فمها  بصدمه... لم  تفهم  ما يقول  ولما  يقول  عن  امها  الخائنه  هذا


         يتبع ف الفصل 30


الوجه الآخر ***للقمر

الفصل الثلاثون 


ف السياره الجيب.... سما  تنظر  لمنذر ... يبادلها النظرات  بأبتسامه  حب  وسعادة... قالت له تستفهم


(منذر  انت إزاي عملت كده  إزاي ولعت ف السرايا كلها  بالشكل ده)


منذر  بأبتسامه إنتصار

(سهله  حبيبتي... رجالي  اتخفوا بين  الناس ... و طلعوا  لسطح  السرايا  وكبوا  البنزين  عليها  من  فوق لتحت... غرقوها  كلها.... وزرعوا بالحديقة  قنابل  يدويه... مشان  تخوف  الناس  و يهربوا ... سما  انا  بحرق الأرض بالسما  مشانك... انا  لو  راح  ضحي  بعمري كله  مشان تكوني  إلي ولو  ليوم واحد... ما راح  اتردد  لحظه... انا  بعشقك  سما... مو  تسأليني  كيف  عشقتك  وليش  انت بالذات... انا  معك  حسيت  بالحيات  والسعادة اللي  عمرها  ما  فلت  لقلبي... بحبك  يا سما... بعشق  كل  كلمه منك  بعشق  عيوناتك ها دول... بعشقك كلك ع بعضك يا  روح قلبي انا)


دمعت عيناها  تآثرا  بكلامه.. وحبه  وعشقه  لها... ارتمت ع  صدره... استمعت لنبضات  قلبه  وشعرت  بالسكينه


بالرغم  من  بركان  الخوف  والقلق  والحزن  الذي  يعتريها... حاولت  أن  تتجاهل  مشاعرها  تجاه حسن


وتوجهها  لمنذر  لمنقذها  للرجل  الذي  يحبها  بحق  و يفعل  المستحيل لأجلها... وليس  ك حسن  الذي  تركها


لعمه  يهددها  ويرعبها  ويصر  ع الزواج منها  رغما عنها... ابتسمت  لنفسها  بمراره ع سوء حظها  العاثر.. اغمضت 


عيناها  وسمحت  لنفسها  بأخذ قسط من الراحه  بين  ذراعين  منذر

******************

ف  السرايا  المشتعله  بقوه.....


يخرج  الناس  من كل  اتجاه  فارين  من  النيران  الملتهبة... لكن  محمود  اكمل  طريقه  بين  النيران 


وخلفه  حسن... كانوا يدفعون  كل ما يقابلهم  وهوه  محترق  حتي  وصلوا  للطابق الثاني.... ركضوا


لغرفه  سما... كانت  مغلقه... الاثنين  نظروا  لبعضهم... و ركلوا  الباب  بقوه  انشق  لنصفين... وجدوا  النيران


تأكل  كل شئ  ف الغرفه... محمود  نادي  بصراخ  ع  سما... حسن  ينظر  ف الأرض  عليها... محمود  ركض  لحمام


الغرفه  ودمر  الباب  لكنه  لم يجدها.... حسن  نادي عليه... خرج  يركض  إليه... أشار له  ع  النافذه  وع  الحبل  الذي


كان لايزال  يحترق... الحبل  الذي  هرب  به  منذر  وسما... محمود  قال


(هربت... هربت... طب  الحمد لله. وبص  كوبايه  العصير  متكسره  اكيد  وقعت  منها... اكيد  هيه  كويسه)


حسن  بقلق(طب  ازاي... جابت  الحبل  ده منين.... سما  انا  عارفها  كويس.... دي  جبانه  ما  تقدرش  تعمل كده  لوحدها)


محمود(قصدك ايه... قصدك  ان  كل  اللي حصل ده  بسببه... منذر  خطف سما  وولع  ف  السرايا)


حسن(اكيد  هوه... من  اللي انا سمعته  عنه... يبقا  اكيد  هوه... محمود... محمود  لازم  نرجعها  انت  قلت  منذر  مش  هيعرف  يهرب  منك  هنا ف مصر... لازم  نلاقيها يا  محمود)


محمود  بثقه  غريبه

(هنلاقيها... بس دلوقتي... لازم  ننزل  نلحق  اللي  نعرف  نلحقه... ينهار اسود... نور... نور  فين  انا  ماشفتش نور  خالص... نووووور)


ترك  حسن  وركض  بكل  سرعته  للخارج  يبحث  عنها  وسط  النيران .... عمار أيضا  كان  يبحث  ف الخارج  عن


نورهان... رأي  نسرين  وهيه  بين  يدي  سيف  الذي  أخذها  ليحميها ... ركض إليها  وسألها


(نسرين... فين  اختك... نورهان  فين  يا  نسرين... مش كانت  معاكي)


نسرين  بخوف

(ايواااااااا  يا  عمار  بس  هيه... هيه  طلعت  فوق  طلعت  للحمام ف اوضتك... انا  افتكرتك  معاها... انا  شفتك  طالع  وراها)


عمار بصراخ(انا  كنت  بدور  عليها)


لم  ينتظر  ردها   بل  ركض  بكل  سرعته... و  مر  من  النيران  ودخل  السرايا  المحترقه.... صعد  ركضا


للطابق  الثاني... ذهب  لغرفته  وهوه  يدفع  كل ما هوه  محترق  أمامه... وصل  لغرفته... كان  الباب  مشتعل


عمار  دفع  الباب  بقوه  بقدمه... فتح ع  مصرعيه... حاول  أن  يدخل  لكن  مكتبته  الضخمه


حالت  بينه  وبين  دخوله  بأي شكل... حاول  دفع  المكتبه  لكنها  ضخمه... ثقيله  مشتعله... نظر  من  خلالها  رأي


نورهان  تقف  وسط الغرفه  وتنظر  لها  وهيه  تحترق  حولها.. كانت  تبكي  بلا  حول ولا قوة.... عمار نده  بأعلي صوته  عليها


(نورهاااااااااااااااااااااااااااااااان)


نظرت  له  واقتربت من  الباب  قليلا... لكن  الأثاث المشتعل  اعاقها عن  الاقتراب اكثر  قالت له  ببكاء


(عمااااار.... هموت يا  عمار... هتحرق  هنا)


عمار  بفزع (لأ  يا  نورهان.... مش  هسيبك  تموتي.... انا  هدخل لك... انا  جاي لك  يا نورهان)


نورهان  بقله حيله

(ازاااي.... مش  هتعرف... كل  حاجه  بتتحرق... كل  مكان  ف نار... حتي  الشباك  بيتحرق  يا  عمار... عمار  أهرب... سبني  واهرب... السرايا  هتتهد  علينا... النار بتأكل فيها  من كل  حته.... اهرب بسرعه  يا  عمار)


سقطت  ع  ركبتيها  وهيه  تبكي.... اشتعلت  السجاده  تحتها... صرخت... و زحفت  ع يدها  وقدمها  ع الأرض  الساخنه


بحثت  عن  بقعه  خاليه  من  النيران... لكنها  تعلم  انه  سرعان ما  ستأتي إليها النيران... او  ستموت  خنقا بالادخنه


ظلت  تسعل  وتبعد  الدخان  من  أمامها... وتتحاشي  النيران  حولها.... عمار  صرخ  من  العجز.... فجأه  سقطت


الثرايا المعلقه  فوقه... عمار  بسرعه  البرق  ابتعد  عنها  قبل  أن  تحطم  رأسه... واصبحت  الثرايا  أيضا


حائل بينه  وبين  زوجته.... عمار  نظر  حوله  بجنون.... لم يستطع  الاستسلام . رفض  ان  يترك  زوجته  تحترق حتي الموت


ركض  بكل سرعته  الي  غرفه  جده... كانت  تحترق  هيه  أيضا... لكن  عمار  دخل  إليها  وتحاشي النيران


ذهبت  لدولاب  جده  الذي  يحترق.... ودفع  الخشب  المحترق... سقطت الأخشاب  أرضا... مد  يده  الي  داخل  


الدولاب  وأخرج  فأس  اثري  يحتفظ  به  الجد  ف دولابه... لانه  مصنوع من الذهب الخالص


عمار  مد  يده ليمسكه  لكن  يداه  احترقت.... صرخ  لكنه  نزع  قميصه  ومسك  الفأس  الساخن


عاد  مسرعا  الي  نورهان.... ضرب  الثرايا  بالفأس  دمرها... قفز من  عليها  وبدأ  يكسر  بقوه  ف


مكتبته  الضخمه  المصنوعه من  خشب  الماهجوني.... دمرها  بعد  ضربات  قويه  قاسيه.... شق  لنفسه


طريق... دخل  بسرعه  وجد زوجته  تقبع  ف  بقعه  وهيه  منكمشه ع نفسها... رأته  قادم  إليها  ركضا كالملاك الحارس


وقفت  بسرعه  وركضت  إليه... بل  ارتمت  بين  ذراعيه... عمار  حملها  بيديه  القويه  وركض  بها  لخارج  الغرفه


وهوه  يتحاشي  النيران... أخيراً  خرج  من السرايا  المحترقه.... فجأه  دوي  انفجار  اخر... لكن  من  داخل السرايا


كان  أنبوب  الغاز الطبيعي.... كان  الجميع  تقريباً  خرج  من  السرايا... وابتعد  عنها... نسرين  ركضت  لعمار  وهوه  يحمل  أختها


ركضت  معهم  الي  ان  ذهبوا بعيدا جدآ.. وقف  الجميع  يراقب  السرايا  وهيه  تنهار  وتحترق.   وصوت  انفجارات


تخرج  من  كل أنحاء السرايا

*********************

قبل  قليل.... محمود  ركض  للخارج  يسأل  عن  نور... لأنه  لم  يجدها  ف  الحريق  بالداخل... لكن  احد  الحرس


اخبره  انها  خرجت  قبل  الانفجار  والحريق... وأشار ع الإتجاه الذي سلكته  نور... محمود اخذ  نفسه  أخيراً


وعلم  الي اين  ذهبت  تحديداً... اؤم  للحارس  وركض  بسرعه  لبيت  عمه  المهجور

**************************

ف  منزل  أهل  نور


تعجبت  لما  صمت... لكنها  رأت... رأت  شئ  غريب  ف  عيناه... رأت  بكاء... دموع  غبر  عليها  الزمن.... قال  لها


وهوه  يحارب  دموع عيناه  الصافيه

(ليه كده... حتي  انتي  يا بنتي.... حتي انتي  بتظلميها.. دي... دي ضحت  بحياتها  عشانكم ... ليه  كده بس) 


نور  فرغت  فمها  بصدمه... لم  تفهم  ما يقول  ولما  يقول  عن  امها  الخائنه  هذا


قالت له  بحيره

(قصدك إيه يا حج... تقصد إيه بكلامك ده) 


نظر لها الرجل  بحزن... جلس  ع الأرض  ونظر  أمامه  للفراغ  كأنه يتذكر  ما حدث هنا  ف هذا المنزل منذ سنوات طويله.... قال  لها  بشرود


(زمااان  ف البيت ده  كان عايش    الحج فؤاد  ومراته  حنان... وبناته التلاته  نور الهدى  ونورهان ونسرين... ف يوم  فؤاد جاب مهندس زراعي من  مصر... كان عايز يثبت لأبوه الحج محمود الأنصاري  انه  زيه  زي  اخواته  عبد العزيز وإسماعيل... عايز  يثبت له  انه  مش  ضعيف  ولا  فاشل  وانه  راجل  يعتمد عليه... كان ف قطعه أرض كبيره... كانت  فيها  مشكله... ما بتقبلش الزرع  ولا البنا... قالوا  عنها  ارض  بور... ملعونه... لكن  فؤاد  حب  يثبت  للكل  انهم  غلط  وانها  عايزه  تتصلح  وبعدها  هتبقي  ارض  طيبه  تصلح  للزراعه... المهم  جه المهندس كريم البحيري    وعاش  ف بيت  قريب  من البيت ده.... لكن  للحظ  الوحش... طلع  راجل  ناقص... بص  لأمك  الست  المتعلمه الجميله... استخسرتها  كريم  ف فؤاد  الضعيف... وبدأ  يشاغلها  بالكلام  الحلو... بس  هيه  صدته... خافت  لتقول  لفؤاد  عليه... لأنها عارفه ان جوزها  اللي كان مريض  وقتها... مش هيقدر  يحميها منه... راحت  المسكينه  لمحمود  الأنصاري.. وحكت له... لكنه  بهدلها... مراتي  وقتها  كانت  شغاله  ف السرايا  وحكت لي اللي  سمعته... محمود  مصدقهاش  وبهدلها  هوه  وابنه  عبد العزيز... رجعت  بيتها  مكسوره  الخاطر... كنت  براقبها  خفت الشيطان  يغلبها  وتطاوع  المهندس.... بس  هيه  كانت  ست  شريفه.... حكت  لجوزها  ف النهايه... ولما  فؤاد واجهه.... أنكر... بس فؤاد  صدق  مراته... هدد  المهندس  انه  لو  ما  سابش  بيته  وبعد  عنه  وعن  مراته.... هيبلغ  عنه  انه  حرامي..... كريم  معجبهوش تهديد  الراجل الضعيف  ليه..... حاول  يتصل  فؤاد  بالحكومة  لما  سخر  منه  كريم  واتريق  عليه.... لكن  فؤاد  راجل  صعيدي  مقبلش  ع  نفسه  وع  كرامته  الإهانة من  كريم  وبرضو  رفض  يستعين  باخوه  وابوه  عشان  ما يقولوش عنه  ضعيف  مش عارف  يحمي  بيته  ومراته... راح  جاب  سلاحه  عشان  يخوف  بيه  كريم.... لكن  الغضب والشر  ملوا   قلب  المهندس... و هجم  ع  فؤاد... وضربه... حاولت  حنان  تساعد  جوزها... ضربها  و قتل  فؤاد  بالسكينه مره واتنين وتلاته... انا... انا  كنت  خايف... خفت  ادافع عنه... فضلت مستخبي  وقتها  عشان ما حدش  يشوفني... بس  انا.. انا  شفت  اللي حصل... شفت الحقيقه  كلها  بعيني.... كريم  هدد  حنان  انها  لو ما راحتش  معاه  برجلها... هيفضحها ف البلد  ويقول  عنها  عشيقته.... وهيه اللي قتلت  جوزها..... لكنها  رفضت برضو... وقتها  ظهرت  نور الهدي  بنتها  الكبيره..انتي يا بنتي....... كنتي  بتعيطي   وبتقولي  لأمك  انك شفتي كريم  وهوه  بيقتل أبوكي.... لكن  كريم  استغل  وجودك  وهدد  امك بيكي  انتي  وأخواتك... أمك  كانت  قليله الحيله... خدتك  انتي  ونسرين... نورهان  كانت  بتلعب  ف بيت  الجيران  مكنتش  موجوده.... كريم  جبر  امك  تمسك  السكينه  بإيدها  وخدها  وخدكم  معاها... وسمعت بعد كده  انها  حاولت  تقتله  ف القطر... لكنه  قتلها  ورماها  من القطر... وانتوا  محدش سمع عنكم  اي خبر  بعدها... و.. وجدك  عشان  ما يظهرش  ضعف إبنه  فؤاد للناس... فضل  يطلعها  خاينه.... ياما  اترجيته يقول الحقيقه  إكراما  لابنه  الميت... لكنه  محبش الناس  تقول ع ابنه  راجل ضعيف  مقدرش  يحمي بيته  وأهله   وفضل  يقولوا  عنه  ضحيه  الخاينه  وعشيقها.. ودي  القصه  اللي  مفيش غيري انا  والأموات  اللي نعرفها... غير  طبعاً  الظالم  المفتري.... محمود الأنصاري  الكبير وابنه ... ومن  يومها  يا بنتي  عهدت نفسي  اني  اجي  هنا  كل  يوم  لحد... لحد  ما انتي  او  اي واحده من اخواتك  رجلها  تأخدها  لبيت أهلها  او  ترجع  باي شكل من الأشكال... انا  سمعت... سمعت ان ف بنات  جم  هنا... وحزنت  اني كنت  مريض  وما لحقتش أشوفهم  او أكلمهم  يا  نور... ودي يا بنتي  الحقيقه  كلها  وربنا  شاهد عليا  ويسامحني) 


نور  لم  تعرف  متي  اغرقت  عيناها  بالدموع... لم  تستوعب كلام  هذا  العجوز... فجأه... ظهر  محمود  زوجها


قال  للعجوز  بصدمه

(انت  متأكد من كلامك ده.... انت  واثق  مليون الميه  ف كل حرف  قلته) 


نور  نظرت  لمحمود  كأنه  نجده  أرسلها الله  لها... ركضت  إليه  وارتمت  بين  ذراعيه  القويه  واشهقت  ف البكاء  اكثر  وهيه  تقول


(محمود... ماما... امي طلعت بريئه... بعد  العمر  ده  امي  طلعت  بريئه  يا  محمود... اميييييييييييييي) 


كادت ان تسقط من بين  يديه... لكنه  سندها  ونظر  للرجل.. الذي  اؤم  له  وقال  بندم


(ايوا يابن الأنصاري  انا  متأكد  من كلامي  زي ما انا  متأكد ان  ابوك  وجدك  هما  السبب ف موت فؤاد  وضياع  بناته) 


محمود  نظر  لها  وعاد  ينظر  للرجل  وقال  بعدم تصديق

(لو كلامك ده  صح... يبقا... يبقا  ابويا  وجدي  فعلاً  هما  السبب  زي ما انت  بتقول... اسمع  يا  حج... انت  لازم  تقول الحقيقه دي ف البلد  كلها... لازم  تبرأ  حنان  مرات عمي  قصاد  الدنيا  كلها  وما تخافش من  جدي... انا  هحميك  منه... واعتبر  ان ده  عقابك  عشان سكتت عن  الحق  سنين طويله..... إنما جدي  وابويا... انا  ليا  كلام تاني خالص  معاهم.... بس ف الأول  نشوف المصيبه  اللي حلت علينا كلنا دي) 


نور  نظرت لتفهم  قصده ... محمود  قص  لها  كل ما حدث  بدأ  من ظهور  أمه  المفاجئ


ومعرفته  القاسيه  بأن سما  هيه نفسها  اخته... وحريق السرايا  والانفجارات.. وأخيرا  خطف منذر  لسما  بعدما  دمر  كل شئ

******************

ف شقه منذر  بحي القناطر


منذر  أرشد  سما  الي  غرفه  ما... دخلت  وجلست  بتعب  ع  الكرسي.... قال لها


(حبيبتي  هنيك  هتلاقي تياب  جديده  اشترتها  الك... بدلي تيابك  لبين ما حضر لك  وجبه عشا... اكيد  انتي  جوعانه كتير)


هزت  رأسها مؤكده... ابتسم لها  وخرج من  الغرفه... سما  وقفت  تشاهد  الغرفه  بدلت  ثيابها  سريعا.. منذر  دق الباب


ودخل بعد أن اذنت له... دخل ومعه  صينيه  موضوع عليها  بعض الأطعمة الشهيه


جلست  سما  وجلس  بدوره  أمامها... قال  لها

(كلي  حبيبتي... كلي لك  شي لقمه  واتسطحي لبين  الشروق  ما  يطلع... راح  نرجع  لبنان  الصبح  بكير... بس  هلأ  كلي  بالهنا والشفا ع قلبك)


لم يعد  لديها  قدره ع الكلام. اؤمت  له  واكلوا  سويا... ظل  يتحدث منذر  وهيه  تستمع له ... لكن فجأه


دوت  طلقات ناريه ف الخارج.... منذر  اخرج  سلاحه  وقال لها

(ضلي  هون... راح  شوف  شو  اللي صاير)


خرج  منذر.. لكنه  صدم  بمحمود  وحسن  ونور  وبعض الرجال.. يقتلون رجاله


عاد  لسما  بسرعه... سإلته  بخوف

(ف إيه)

منذر(تعاي  مافي وقت  للشرح)


ذهبت  معه  أخذها لباب المطبخ الخلفي  وهرب  بها.... رآه  حسن  نادي  محمود  وركضوا  خلفه


وصلوا  للشارع  منذر  وسما.... ظلوا  يركضون  بسرعه... محمود  وحسن  ونور  يركضون خلفهم... منذر  يلتفت  لهم


ويطلق  رصاصاته  بعشوائيه علها  تصيب  أحدهم... لكن  خشي محمود  وحسن  ونور ان  يبادلونه إطلاق النار 


حتي لا يصيبوا  سما بالخطأ.... وصل  منذر  لنهر النيل الجاري.... عند  مكينات تدفق المياه....  محمود استغل


الفرصه  وأطلق  رصاصه  ع  قدمه... سقط  منذر  أرضا... لكن    الرصاصه لم تخترق  قدمه بل  جرحته وهيه  تمر بجواره


سما  رأت سلاح  منذر.. ركضت  إليه  حملته.. وجهته  لهم  بيد  مرتعشه  قالت لهم  بخوف


(خليكوا  بعيد... قوم  يا  منذر... محدش  فيكم  يقرب... عايزين  مني  إيه تاني... عايزين  إيه... انا  هرجع  مع  منذر... ابعدوا عنناااااااا)


حسن  هم  ان  يصرخ  فيها... لكن  محمود  اوقفه  بيده  وقال  لها


(سما... سما  انتي  اختي... انا  محمود  اخوكي... انا  محمود عبد العزيز  الأنصاري... وانتي  سما  عبد العزيز الأنصاري  مش ده  اسمك  برضو... مش امك  إسمها  أمل... امك  ما متتش... امنا  عايشه  جت  الصعيد  عشان  تمنع  ابوكي  يتجوزك  اول ما عرفت  من ناس ف الجوازات انك  عايشه  ونزلتي مصر جت  بسرعه  تلحقك... انا  لسه  عارف  الحقيقه  دي... سما  امك  خدتك  وانتي  طفله  و سابت  ابونا  اتطلقت  منه  وسابتني انا  واحمد  معاه... خافت  عليكي  من  ابوكي  ومن  اعداءه... بس  هيه  عايشه  يا  سما.... سما  انا  وابوكي  واحمد  اخوكي  دورنا عليكي  سنين طويله  لحد ما يآسنا... وده.... ده  اللي  انتي  عايزه  تهربي  معاه  هوه  اللي  قتل  اخوكي)


منذر  بصدمه(شووو ووووووو)


محمود  وهوه  يخرج  صوره  من  محفظته  بسرعه

(ايوا  يا  سما... دي صورته  انا  شايلها  طول الوقت ف جيبي.... ومعايا  الفيديو اللي  يثبت  انه  القاتل... اخوكي  راح  مع  فرقته  عشان  يقبض  عليه  هوه  والخليه  الإرهابيه  اللي  كانوا ف  الصعيد  عندنا... بس.. بس  هوه  كان عامل  لهم  كمين... قتلهم... قتلهم  بالرصاص  زي  الحيوانات.... صورته  كاميرا  عربيه الاتاري  اللي كانت  معاهم.... وكله  متصور  وموجود  لو  مش  مصدقاني... الكلب  ده  قتل  اخوكي  وحرمنا  منه... وبسببه... بسببه  هوه  وبس... انا  اشتغلت  ف  السلاح  وتاجرت  فيه... تاجرت  فيه  عشان  اوصل  له  يا  سما... صدقيني  يا  أختي)


سما  نظرت  لمنذر  وهيه  تشهق  من  البكاء... قالت  له

(الكلام ده حقيقي... انت.. انت  قتلت  أخويا... انت  إرهابي  بجد  يا  منذر)


منذر  دمعت  عيناه  ع  بكاؤها... قال  بقله  حيله

(سما  مشان الله  سامحيني... انا... انا  كنت  بنفذ  شغلي... مو  انا  اللي  كان  ف بيني  وبين  خوكي  تار... دا  خالد رحيم... هوه  دفع  لي  مشان  خلص  عليهم... انا  قاتل مأجور... انا  بعترف بذنبي... بس... بس  ما كنت  بعرف  انه  خييك.... سامحيني سما  مشان الله)


سما بصراخ (اسمحك... ازااااااي.... انت  قتلت  اخويا... اخويا  اللي  عمري  ما  شفته... واللي عمري ما هشوفه تاني  بسببك... منذر  انا  آسفة... انا  آسفه أوي... انا  بحبك)


سما  اغمضت عيناها  بألم... وضغطت  ع  الزناد.... منذر  برق بعيناه... لكن  الرصاصه  استقرت   ف  صدره


ودفعته  بعيدا.... طار  منذر... وسقط  ف  مياه النيل  الجاريه... عند  الماكينات  المندفعه  بقوه


ركض  محمود  وحسن  ونور... ونظروا  عليه... لكن  الجو  معتم... لم  يؤذن  الفجر  بعد  وكان  الظلام  حالك


محمود  ارتاح  أخيراً... ركض  ع  سما  و  ضمها  بقوه بين  يديه... اخذ  منها  السلاح  وآلقاه أرضا.... سما  نظرت  لمحمود... وقالت  ببكاء


(مات.... منذر  مات)


محمود بغضب(غار ف داهيه)


سما  بأنهيار (اااااااااااااااااااااااااااه... لأ... منذر)


ركضت  سما  لحافه  النهر  ونظرت  فيه  وهيه  تصرخ

(منذررررررررررررررررررر)


حسن  ركض إليها  وضمها  من  ظهرها  رغم  استيائه  مما  تفعله  سما  من أجل  هذا  القاتل  الدنيئ


محمود  اتصل  ع  رجاله  وأمرهم بالانسحاب...و اخذ  أخته  ونور  وحسن  الي  قصره  ف  مصر


اتصل  ع  ابوه  وأخبره بما حدث  الي الأن

      يتبع ف الفصل 31  والأخير

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