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رواية أنابيل تعود حيه الفصل الاول للكبار فقط

 

أنابيل تعود حيه للكبار فقط


حصرين علي موقع المجد للقصص والحكايات 


تحزيررررررر الرواية للكبار فقط 🔞🔞



الكاتبه فريده احمد


 رواية أنابيل تعود حيه 

#أنابيل_تعود_حيه

#فريده_احمد_فريد


قالوا  زمان  حكم  كتير... فيها  اللي  استفدنا  بيها... وفيها  اللي  عمرنا  ما  فكرنا  فيها ...... زي


الحب  والكره  بينهم......... شعره

الشجاعة والجبن  بينهم..... موقف

الموت والحياة بينهم........ نفس

الإنس والجن بينهم.................. حجاب


كلام غريب... لكنه  الحقيقة   الأكيدة  في  حياتنا.... محدش  فينا  ما مرش  عليه..... كل  اللي  عدي....


كلام  كبير  وكتير  عمري  ما كنت  هفكر  فيه  للحظه  في  حياتي... لكن اللي  حصل لي


غير  فكري  ونظرتي  للكون.... غيرني  انا  شخصياً.... انا  مين... انا  الميت الحي


خليني   اخدكم  معايا  لتلات سنين   ورا..................

..................................  ............................

انا  ملك..... او  كوكي ملاك.... ده  اسمي  ع  الفيس بوك

انا  البنت


اللي  بعد  موت  ابوها  وجواز  اخواتها  الرجالة.... شافت  نفسها  علي  امها


انا  اللي  زي  بنات  كتير  اتنططت  ع  ولاد الحلال... لحد ما  عدي  بيا  العمر


وعدت  ايام  التناكة... وصل  بيا  الأمر اني  بقيت  مستعدة  اني  اتجوز... إن شالله حتي


بواب  العمارة... بس

حتي  الفرصة   دي  خسرتها.... وصلت  خلاص  لسن  اليآس


انا  مش  وحشة  عشان  محدش يفهم  غلط.. لأ انا  عادية زي  كل  البنات... 


بلبس  عالموضه... حتي  في  حجابي.... ماسكه  انضف  عدة  موبايل فى  السوق


بنت  روشة  مش  كئيبة... بس  خلاص  سمعة  وطلعت  عليا... اني  ببهدل  ولاد الناس


وبطردهم  من  بيتنا... فمبقاش  في  حد  عايز  يتقدم لي... حبيت  اشتغل


يمكن  اقابل نصيبي ... امي  واخواتي  رفضوا... وبقيت  قاعده  ف  بيت ابويا  زي  خيبتها.. وانا  عندي٢٧ سنة


المهم.... عادتي  الهباب  مغيرتهاش  ابدا... وهيه  الدلع  الماسخ علي  ماما  بالذات


بس  بيني  وبينكم.... كنت  بتصرف  كده  عشان  اداري  حزني  وميلة  بختي  عن  الكل


عشان  محدش  يشمت  فيا... لا  واحدة  من  جيراني... ولا  حريم  اخواتي... ولا  صحباتي


اللي  كل  واحدة   فيهم  شايلة  عيل  على  كتفها  وجرا  التاني وراها... كنت  بحزن  لما  اشوفهم  كدا 


بس  كنت  بدراي  همي  وحزني  في  الضحك  ف اللعب  مع  عيال  اخواتي


اللي  كنت  بعمل  عقلي  بعقلهم... المهم  كفاية   رغي  شوية   عن  نفسي... عرفتوني... عرفتوا  انا  مين 


انا  لا  انا  ممثله  مشهورة   تحبوا  تعرفوا  حكايتها... ولا  شخصيه  عاما  الصحافة   بتجري  وراها


انا  بس  بنت  بسيطة... بنت  عاشت  اسطورة   حية... اسطوره  سمعتوا  عنها  في  قصص  الرعب


وأفلام الفانتزيا... بس  انا  عشتها  وكان  لازم  احكي  لحد  عليها.... سامحوني  لو  بطول  في  التفاصيل 


بس  دا  لأني عايزاكم  تعيشوا  معايا  اللي  انا  عشته  يمكن  حد  يحس  بيا... المهم.. ندخل  ف  الموضوع 


النهارده.....يوم  حر  ممل.... كنت  كعادتي  نايمة   لبعد  الضهر


مشغلة  مروحة  السقف... والهاند فري  فى  ودني... فجأة.. او  كالعادة... لقيت  المخدة  نازله  على  وشي


(قومي.... قومي  ياختي... المغرب  هايأذن  علينا.. قومي... فى  مفاجأة... هتقعي من  طولك  لما  تسمعيها) 


يادي  ماما  وحكويها.... قمت  قعدت... شلت  السماعه  من  ودني... ربعت ع  السرير    وقلت  لها  بملل


(هاااا... احكي... اديني قاعدة   اهوه  عشان  لما  أقع  من  طولي .. اترزع عالسرير.... ارغي) 


(يا  بنت  الجزمة... ايه  ارغي  دي.... طب  مش هقولك  ان  جالك  عريس) 


سابتني  وقامت.... برقت... تنحت... قمت  جريت  وراها  اتدلقت  من  عالسرير


قمت  بسرعه... وقفت  تضحك  عليا... جريت  علي  ركبي  وقفت تحتها... قلتلها  وانا بشد  ف  هدومها  زي  العيال


(عريس... عريس  ياما... بجد ياما) 


(يخرب بيتك  مالك  يابت  ملهوفة  كدا   ليه) 


(نعم  يا ختتتتتي.... ومش  هتلهف ليه... خلصيني  عريس  ايه  ده) 


(بصي يا  ستي.... دا  صاحب  اخوكي  ف  المدرسه... دا  مدرس  انجليزي زي  اخوكي  أحمد... هو  كلمني  وجاي  النهاردة) 


انا  مبقتش  مصدقة   نفسي... عريس... اخيرا  عريس.... المهم   عالساعه  ٥  


كنت  لبست اشيك  درل  عندي   ولبست  اغلي  طرحة  وحطيت  ميكب  خفيف  


كنت  على  سنجة عشرة..... المهم... جه  احمد  مع  العريس... امي  نادت لي... خرجت


وكنت  عامله فيها  بنت  ناس  ومكسوفة  وكدا.... بصيت  له  من  تحت  لتحت


لقيته  راجل  ملو  هدومه... وسيم  نوعا ما... بس  مش  دا  المهم.... المهم  ان  هدومه  اللي قلت  عليها  من  شويه  دي


دي  تقرف.... شكل  معندوش  مرايات  ف  بيته.... الهدوم  مكرمشة... مش  نضيفة


المهم.... قرينا  فتحتي  اخيرااا... واتفقنا  علي  كل  حاجة... وبقيت... مخطوبة


المهم  عدت  ليلة  والتانية... وعريس  الهنا  ما  يتصلش  بيا... بقيت  انا  اللي  أكلمه 


قلت  عادي... المهم  فين  وفين  لما  طلب  من امي  اننا  نخرج.... انا  فرحت   امي  وافقت


نزلت  من  البيت  لقيته  مستنيني.... قلتله  

(هنروح فين) 


(انتي  عايزه  تروحي  فين) 


(ااه .. اوكيه... انا  عايزه  اروح السيما) 


انصدمت  لما  قال  بسرعه

(لالالالا... سيما ايه  وكلام  فارغ  ايه... تعالي  نتمشي) 


اتمشينا... قلتله 

( عطشانة.. عايزة   عصير... حاجة   ساقعة  اي  حاجة) 


(حاضر  حاضر... تعالي  نقعد  في  الجنينة  دي) 


قعدنا  في جنينة  فى  الشارع  وسط  العربيات... المهم  فضل  يتوه ف  الكلام


شفت  بتاع  شاي  ف  الجنينة... قلتله 

( عايزة   شاي) 


... قالي


(لالالالا  دول  شويه  حرامية)


المهم  انا  فهمت... فهمت  ان  عريس  الهنا.. طلع.. بخييييل ... جلدة..... معفن  من  الآخر 


اتخنقت  طلبت  منه  يروحني... فعلا  روحت  ودبيت  خناقه  لرب  السما  مع  امي


لكنها  بهدلتني اوي... صرخت  فيا ان  عدي عليا  وقت  الدلع  والتناكه  ع  العرسان


وهاخد  خالد  غصب  عني... انا  قلتلها  بغضب

(طب  بصي  بقا.... عايزه  تخلصي مني... وتدبسيني  في  معفن  زي  ده... ماشي... انا  عيد ميلادي... يوم  ١٠ /٨

يعني بعد  ٣  أيام  بالظبط... عريس الغفله  بتاعك  انتي  وابنك... هيجيب لي  هدية  اتشرف  بيها  قصاد  صحابي

هوافق  واتجوزه... هيجي  ايد  ورا  وايد  أدام... قوليله  مايجيش  احسن.... وده  اخر  كلامي) 


أديت  ماما  الوش  الخشب..... ودخلت  اوضتي... ماما  كلمته  ورصتهمله 


(((((خالد  بقا  محتار.... طول  عمره  حريص  ع  الجنيه..... المهم بقا  ماشي  فى  الشوارع 


يبص  عالمحلات... الهدوم  غالية.... والدهب مولع... حتي  الجزم  وصنادل  البنات  اسعارهم  حراقة  عليه


بقا  ماشي  متضايق... ماصدق  لقا  واحدة   ترضي  بيه... دخل  ف  شارع  وهو   ماشي


كان  شارع  هادي  ف  المهندسين..... كان  بيدي  درس  هناك  فى  مركز تعليمي  متخصص


وهوه  ماشي.... شاف  صندوق  زباله كبير.... عادي  يعني ... مشي  خالد... لكنه  رجع  برجله  لورا


بص  فى  الصندوق... كان خارج  من  الصندوق... نص  جسم  قماش.... قرب  ومسكه


لقي  عروسة... عروسة  في  حجم  طفل  ابن   سنتين... بس  كانت  متبهدلة  اوي


خالد  ضحك  أوي... رجع  بسرعه  على  بيته... ومسك  العروسه  بفرشه البلاط... وهات  يا  دعيك


خلاها  قشطه... نزل  شحت  من  جاره... كرتونة  كبيرة... جاره  ده  كان  فاتح   اتيليه فساتين 


ف  خد  منه كرتونة  كبيرة   تناسب  حجم  العروسة... واشتري  لفة  جلاد.... كتر  خيره  والله))))) 


ساعة   العيد  ميلاد.... انا  كنت  فى  نص  هدومي  أدام  صحباتي  البنات.... الكل  جه


والكل  برضو  زهق... عايزني  اطفي  الشمع.. وانا  كل  ده  مستنيا  خالد  يجيي


ان شاء الله حتي يجي بأيده  فاضيه... بس  كل  صحباتي  بيسألوني  عليه... كنت  باصه  علي  باب  الشقة


مستنيا  يخبط فى  اي  لحظه.... كنت  يأست... قلتلهم  يتجمعوا  عشان  نطفي  الشمع


الكل  قرب... وهوه  بيغني لي.... وفجأة... اتفتح  الباب   ظهر خالد  اخيرا.. ومش  كده  بس


دا  معاه  هدية... بصيت  لأمي ... امي  ضحكت  سعيدة... صحباتي  اتجمعوا حواليا  يهمسوا


ويرخموا.... سبتهم  ورحت  له  قالي

(كل سنه وانتي طيبة..... بصي  انا  احترت  اجيب لك  ايه... فجيبت  دي  من  محل  حاجات  قديمة... بس  يارب  تعجبك) 


انا اصلا  كشرت  اول  ما  قالي  كدا... بصيتله  اوي... وفتحت  الجلاد  بغضب


صحابي  اتلموا حواليا  يشوفوا  الهدية.... روحت  عند  ترابيزة   عشان  العلبة كبيرة... ظهرت  الكارتونة 


فتحتها.... واتصدمت... لقيت  عروسه  كبيرة... ضخمة... شعرها  عسلي  فاتح  زي  الدهب... واصل  لرجلها


عيونها  رمادي  غامق... خدودها  حمرا  زي الدم.... انا  انا  فرحت  بيها  فرحة  الام  بطفلها


صحباتي  شهقوا... الكل  بقا  يخطفها  مني.. وانا  زي  العيال  بخدها  منهم


حتي  عيال  اخواتي  طلبوها... وانا  ما  رضتش... جريت  بيها  علي  اوضتي  حطتها في  دولابي


لحسن  حد فيهم  يسرقها... اهو   بقا  اتعلقت  بيها  أوي 

خالد  فرح  جدآ   اني  قبلتها  منه وكنت  فرحانة   بيها

....................... 


قضيت  ليلتي  مع  عروستي  الجديده... وباقي  الهدايا... وانا  مبسوطه  اوي


قلت لنفسي.... إن  خالد  فى  منه  امل  وممكن  أقدر  اغيره... فنمت  وانا  بحلم  بحياتي  اللي  جاية قريب


لكن............ صحيت على  خبر  مفزع..... خبر  احمد... احمد  اخويا  اتقلب  بيه الميكروباص  وهوه  رايح  الشغل


جريت  مع  امي  عالمستشفى.... لقيت  مراته  وبناته  التلاتة  هناك  من  إمبارح 


وباقية اخواتي  كمان.... اومال  ما  اتصلوش علينا  ليه من  بدري..... احمد  كان  عايش .... بس  كان  ف  غيبوبة 


وعنده  كسور  ف  جسمه.... انا  حزنت  حزن  عمري.... حسيت  ان  حياتي  اتشقلبت خالص


غريب  الموت... لما  بنقرب  منه  او  حد  غالي  علينا  بنحس اننا  هنخسره  ف  اي  لحظه


بنحس وقتها   إننا بنتغير .... حياتنا  ما  بترجعش... زي  ما  هيه  ابدا...... المهم  عدي  يومين علي  احمد  وهو   فى  المستشفى 


امي  خدت  مراته  وبناته  عندنا  ف  بيتنا..... هبة  مراته  وحنان... وحبيبة


كانوا  فى  اوضه  لواحدهم.... لكن  انا  خدت  حنين  الصغيرة   فى  اوضتي.... فى  حضني


عشان  ما  بطلتش  تسألنا... بابا  فين.... كان  سؤال  صعب  بيخلي  امي  ومراته  ينهاروا  من  البكا


حنين  كانت  طفله  زي  اي  طفله  في  عمرها.. كان  عندها  ٤ سنين... فبصت  للعبتي... عادي  يعني


لكنها  كانت  بتخاف  منها  بشكل  غريب... وده  اللي  مش  عادي.... كانت   وهيه  نايمة  .. كنت  ألاقيها  مكلبشة فيا


وتقولي

(اوعي  تسبيها  تخدني...) 


كنت  أسألها مين  دي اللي  تاخدك... كانت  تنام  فوراً... كبرت  دماغي... لكن  تالت يوم 


خالد  جه.... راح  المستشفى مع  امي  يزور  أحمد..... ولما  رجعوا  مع  بعض


شفت حاجة   غريبة   فيه.... خالد  كان  مرعوب.... كان  خايف  بشكل  هيستيري


لدرجه  ان  الميا  كانت  بتترعش  في  إيده وهو   بيشرب... حاولت  اكلمه... افهم منه


لقيته  بصلي بصة  عمري ما  هنساها... وقالي  كلمة  واحدة   وقام  مشي... 


(الدور جاي عليا) 


بصيت  عالباب  اللي  سابه  مفتوح  وراه.... وكنت  مستغربة... قلت  هو   انا  كنت  ناقصاك


بالليل.... امي  كانت  مع  هبة  والبنات  في  المستشفى... اتصلوا  بينا  عشان  أحمد  فاق


امي  قالتلي 


( خليكي  انتي  هنا  مع  حنين.... وبكرة ابقي  روحيله) 


وافقت.... وفضلت  ف  البيت.. مع  حنين..... كنت  قاعدة   قصاد  التلفزيون... وحنين  بتلعب  حواليا


حسيت  بجوع.... قمت  اعمل  حاجه  خفيفة.... لفيت  اسأل  حنين.... إذا  كانت عايزة   تأكل معايا


ملقتهاش.... عليت  صوتي... ما ردتش  عليا... قلقت ... قلت  يبقي  نامت  وهيه  بتلعب


دورت  عليها  ف  الاوض... ملقتهاش..... قربت  من  اوضتي.... سمعت  صوتها


كانت  بتتكلم  وخايفة.... كانت  خايفة   اوي... كأن حد  بيهددها... وهيه  بترد


(واللهي  ما  هقول  لحد... بس  ابعد عني... انت  شكلك  مخوفني أوي)


انا  سمعت  كده.... وفتحت  بسرعه  الباب... لكن... حنين  كانت  واقفه  قصاد  المرايا


وانعكاسها  ف  المرايا  عينها  فيه  بيضااااا... انا  اتفزعت  وقفلت  الباب  بسرعه


لكن  البت... البت  جوه... طب  ايه ده.... سمعتها  بتصرخ.... نسيت   خوفي... وفتحت  لها


ملقتهاش  ف  الاوضه... دورت  عليها  ف  الدولاب.... تحت  السرير... ملقتهاش... صرخت  بأسمها


(حنيييييييين... انتي  فين)


سمعتها  بتصرخ.. وتقولي  بعياط

(عمتووووو ... ألحقيني  والنبي.... والنبي  يا  عمتووووو... همووووت)


قلبي  اتخلع  من  مكانه.... سمعت  صوتها... جاي... جاي  من  الشباك.... والشباك  مقفول  من  جوه


فتحت  درفه  الشباك... لقتها  بتقع... مسكت  شعرها  بقوه... فضلت  تصرخ


رفعتها... ورمتها في  حضني  وقعدت  عالأرض... آخد  نفسي  واهدي  فيها


رفعت  عيني  للشباك... وانا  مستغربة.... حنين  ازاي  عملت  كده...


ازاي  طلعت  عالشباك  وفتحته  وقفلته  وهيا  بره  على شعرها... ايه  دخلت  ايدها  من  الشيش  وهيه  واقفة


عالهوا.... انا  محتارة... مش  فاهمة... حنين  نامت  علي  إيدي... شلتها  وحطتها  عالسرير


خرجت  وانا  بترعش... قعدت قصاد  التلفزيون... لحد  ما  ترجع ماما.... والبنات


لكن  نمت  انا  كمان... نمت  وحلمت... انا  اصلآ  فين  وفين  لما  بحلم  بحاجه  وافتكرها


وانا  من  الناس  اللي  ما  بتديش الأحلام  اهتمام  مبالغ  فيه يعني.... لكن  الحلم  ده ... دا  كابوس  مش  حلم


حلمت  بحنين... كانت  مرفوعة   في  الهوا... ومقلوبة  رأسها تحت  ورجلها فوق


وفجأة... بدأ شئ  خفي... يضرب  فيها.. ويخبطها فى  حيطان  الأوضة.... مكانتش  اوضتي


كانت  اوضتها  هناك  ف  بيت  أبوها.... حنين  كانت  بتصرخ... لكن  مش  سامعالها  صوت


و فجأة   عينها  برقت  على  وسعها.... وبقها  اتفتح  لدرجة كبيرة   لدرجة   اني  حسيت  ان  شفايفها  هتتشق  وبقها


هيتقطع.... لكنها  بصت لي  فجأه.. وهي  كده... ولفت  بصت  المرايا.... بصيت  انا للمرايا.....وشفت  عيون  صفرااا


قمت  مفزوعه  من  الحلم..... بس  لقتني فى  اوضتي... اوضتي  انا  جيت  هنا  إزاي.. وأمتي


خرجت  لقيت  الكل  نايم.... انا  صحيت بدري  اوي.... دخلت  خدت  دوش.. وخرجت


كنت  مخنوقه  من  الحلم  ده.... حاولت  اكبر  دماغي  وانساه... بس  جه  فى  بالي  حاجه  غريبة


هيه  فين  عروستي.... من  ساعه  ما  سمعت  خبر  احمد  وانا  مش  شايفاها.... كنت  حطاها  على  كرسي التسريحة


بس  اتلهيت  فى  موضوع احمد.... ومخدتش  بالي  انها  مش  موجودة... قلت  لما  تصحى امي  هبقي اسألها


صحيت  امي  وهبة  والبنات.... جو  البيت  كان  كئيب  وحزين.... جم  أخواتي 


عشان  نروح  لأحمد  كلنا .... خلاص  هو  فاق  والزيارة بقت  مسموحة 


المهم  وسط  الكلام  قبل  ما  ننزل  من  بيتنا.... عمر  اخويا  بص لي  وقالي  بتريقة


(ايه  يا اختي... هو   خطيبك  وصلت  بيه  النتانة  انه  ما  يتصلش  حتي  يسأل عن صاحبه.... بلا  قرف  انا  مش  عارف انتي  هتعيشي  معاه  إزاي) 


عنده حق... بس  انا  ما  ردتش  عليه... ماما  بصت له  بغضب  وعاتبت  عليه 


انا  بقا  دخلت  اوضتي.... كتبت  له  رساله... هزقته فيها  الصراحة... قلتله  كلام  يجرح


المهم  رحنا  المستشفى  لأحمد  واطمنا  عليه.... سألني عن  خالد  بخوف... الكل  لاحظ  ده


انا  قلتله  معرفش  عنه  حاجه.... لكن  احمد  قال  لعمر.... ياخدني ونروح  له


عمر  اعترض فى  الأول... لكن  وافق  أخيراً.... المهم  هبة  قالت  لماما  انها  هتروح  بيتها


انا  الصراحة   حسيت براحه غريبة... رغم  انهم  مش  مضايقين علينا  ولا  حاجة 


بس  انا  افتكرت  ان  بنت  اخويا...... ملبوسة  من  الجن... آه انا  ياما  سمعت  عن  أطفال  زيها


بيبقوا  مصاحبين أطفال الجن....

روحت  هبة.... مع  بناتها


ماما  روحت  معاها... قالت لي  ابقي  اكلمها  لما  ارجع  البيت.... رحنا  انا  وعمر  ع  بيت  خالد


وانا  وهو   قرفانين  منه  اصلآ..... بس... لما  وصلنا  لقينا  الجيران  ملموم  على  شقته


سأل عمر... واحد قاله

(فيه  ريحه  وحشة   اوي  طالعة  من  شقة  خالد.... وعيالي  بيقولولي... بقالنا  يومين بنسمع  صريخ  من  شقته  فى  نص الليل.... فاحنا  كلمنا  الحكومه  وهي  جاية  فى  الطريق) 


انا  سمعت  الكلام ده... خوفت  عليه  الصراحة... زقيت  الناس.... وجريت   على  باب   شقته


لكن  لسه بزق  الباب... لقيته  اصلآ  مفتوح... دخلت  اجري  لكن  باب  الشقه  اترزع  عليا وانا   جوه


سمعت  عمر  بيزعق... ويقولي

(الباب  مش عايز  يتفتح  ملك  خليكي  واقفه  ما  تتحركيش انا  هكسر  الباب) 


بصيت  انا  على  باب  الشقه  سمعتهم  بيكسروا  فيه من  برا... بس  انا  مكونتش  خايفة   غير  على  خالد


دخلت  من  الطرقة ... وناديت  عليه

(خالد  انت  هنا.... خالد... انت  فين) 


طلعت  تلفوني  ورنيت  عليه... سمعت  صوت التلفون   مكتوم.... بصيت  لقيته  عالكنبة


بس  مكنش  لواحده.... لقيت  خالد  قاعد  ع  الكنبه  بيتفرج  عالتلفزيون 


لسه  هنادي  عليه.... لقيته  قام  وقف... وعدي  من  جمبي... اتصدمت 


هو فى  إيه... هو   مش  شايفني.... دخلت  وراه... لقيته  دخل  المطبخ


بس... فجأه وقف... بص قدامه... ووشه  مرعوب... كأنه شايف  شيطان من  الجحيم  قدامه 


انا  خوفت  من  نظرته... خوفت  على  خوفه... انا  مش  شايفة   هو   خايف  من  إيه 


لقيته بيرجع  برجله لورا..... خبط  فى  حيطة... بص  لها... بس  انا  كنت  واقفة  جمبها


ازاي  مش  شايفني.... ناديت  عليه  بخوف

(خالد... خالد فيه  إيه... خالد  انت كويس) 


لقيته  بيشاور  من  غير  ما  يبص  لي... بيشاور  على  سقف  المطبخ.... رفعت  عيني  للسقف


مش  شايفة   حاجة.... رجعت  بصيتله... وصرخت... صرخت  بكل  فزع


ده  مش  خالد  اللي  اعرفه.... دا  واحد  وشه  اسود  مفحم... وشه منفوخ.... عينه  مش  موجودة 


فضلت  اصرخ.. اصرخ.... طلعت  اجري  ع  باب  الشقة... النور  قطع.... خبطت  فى  حاجه  مرمية  عالارض


اتقلبت على  وشي.... بحسس  عشان  اقوم.... لقيت  فى  حاجه  بتمشي  تحت  ايدي عالأرض 


حاجة   بتسرح  عليا  على  ايدي  ورجلي  ووشي... صرخت.. اكتر  وفضلت  انادي  على  عمر..... الباب  أخيراً  اتفتح


النور  ملي  الشقه.... لقيت  الناس  بتصرخ.... انا  كمان  بصرخ.... عمر جري  عليا


وفضل  ينزل  اللي  كان  ماشي  عليا.... كان............. دود.... دود  اسود... ودود  ازرق  ضخم


الناس  صرخت.... الحكومة   طلعت  الناس  بره.... لكن  انا  قالولي خليكي


فضلت  انا  وعمر... عمر  خدني  عالحمام  يغسلي  وشي... كنت  قرفانة 


لكن... انا  وعمر  صرخنا فى  نفس واحد


        يتبع فى الجزء الثاني والثالث

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