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رواية موعد في المساء الفصل الثامن عشر

الكاتبه فريده احمد فريد  وعاد ف المساء   الفصل الثامن عش  موعد في المساء   المجد للقصص والحكايات

 

الكاتبه فريده احمد فريد

وعاد ف المساء 

الفصل الثامن عش

موعد في المساء 

المجد للقصص والحكايات 

ف مكتب يوسف 

انس  بغضب

(لاء يا يوسف  انت  مش هتروح  ف حته  انت  سامع) 


قاسم(يابني  انت  رجلك  لسه  متجبسه... حتي  لو بتدوس  عليها  برضو  ما ينفعش  تطلع  معانا  عمليه  خطيره  زي  دي) 


يوسف  بأختناق

(وانتوا  عايزيني  اعمل  ايه  بقا... اقعد  حاطط  ايدي  ع خدي  لحد ما ترجعوا  ولا  اروح  انام  زي  الخرفان... ما  تنطقوا) 


(يوسف  انا  وانس  هنتابعك  باللأسلكي... مش  هنسيبك  زي الاطرش ف الزفه... بس  وانت  هنا  ف مكتبك  انت  سامع  وده  اعتبره  آمر  رغم  انك  اعلي مني  رتبه... بس  انا  هجبرك  يا  يوسف  ولو  وصلت  اني  احطك  ف 

حجز  انفرادي.... يلا  يا أنس) 


انس  وهوه  يغادر(أعقل  شويه  انت  تعبان... خليك  هنا  وانا  هتابعك  باللاسلكي  وربنا   أدعي  لنا) 


(ماشي  يا أنس  ربنا  معاكوا  يا رجاله  ... اه  يا ولاد الكلب) 


ضحك  قاسم  وأنس  و ركضا  للخارج  قبل  ان  يعلق  اكثر... جلس  ف مكتبه... مر  وقت  طويل  وهوه  يجلس


مكانه  منتظر  اخر الأخبار   معهم... فجأة   دخل  عسكري  والهلع  يكسو  وجهه... صرخ  ف يوسف


(يوسف  باشا... يوسف  باشا) 


(مالك  يا غريب  ف   ايه) 


(باشا... شقتك  بتتحرق  يا باشا... جالنا  بلاغ  دلوقتى) 


يوسف  جن  جنونه... صرخ  وهوه   يركض  بصعوبه  للخارج


(إيمااااان) 


خرج  يركض... نادي  ضابط  زميل  له  وقال

(اشرف  ... تعالي  خدني  وراك  ع المكنه  ... وديني  بيتي  بسرعه  مراتي  هتموت) 


سارع  يوسف  الي  منزله... توقف  اشرف  امام   البنايه  التي  تحترق  فيها  شقه  ف الطابق الرابع


يوسف  هبط  ارضا  ونظر  بذعر  لشقته  التي  تحترق... صرخ  ف الجيران  اللذين  يشاهدون  دون  اي محاوله  منهم  لأنقاذ   شقته.... صرخ  فيهم


(انتوا  واقفين  تتفرجوا  ع اييييه... حد  اتصل  بالمطافي... انطقوااااا) 


نظر  له  الناس  ولم  يرد  أحدهم... نظر  لهم  بسخط  ... وركض  للبنايه.. وهوه  يصرخ  بأسمها


لكنه  سمع  بوضوح  احد  الناس  يقول

(وأحنا  نتصل  بالمطافي  ليه  ما تولع  الشقه  ع  دماغ  صحابها) 


رد  رجل  اخر(ياريته  كان  فيها  يا  شيخ  ومات  وأرتحنا  منه) 


يوسف  لم  يتوقف  ليرد  عليهم... أكمل  صعوده  للطابق الرابع... وجد  الباب  يحترق... سند  بيده  ع  الحائط  الساخن.... ودفع  الباب  بقوه..بقدمه السليمه


انشق  الباب  نصفين...دخل  يركض  بصعوبه  وهوه  يصرخ  بأسمها... وجدها  تجلس  ارضا  منكمشه  ع نفسها


تبكي  بخوف  وهلع... وقف  وركضت  إليه.... ضمها  يوسف  بشق الأنفس  وحمد الله  قالت  له  بأرتجاف


(واللهي  ما  عملت حاجه... واللهي  يا  توسف  انا موش  عملت  النار  دي.... هيه  عملت  لوحدها  واللهي) 


(خلاص... خلاص  يا إيمان... سيبك  من  النار  والزفت  انتي  كويسه... ردي  عليا) 


(اه... اه  يا  توسف  انا  كويسه... اااااااااااه) 


نظر  لها  يوسف  بفزع  وجدها  تصرخ  وهيه  تنظر  خلفه... فوجئ  برجلان  ملثمان  يدخلان  وسط  الحريق


وف  ايديهم  أسلحه ناريه  اتوماتيكيه..... يوسف  وضع  ايمان  خلفه  وقال  لهم  بحذر


(انتوا  مين  وعايزين  مننا  إيه) 


لكنه  لم  يلحظ  من كان  خلفه... ظهر  ملثم  اخر  وضرب  ايمان  ع  رأسها.... وضربه  هوه  ايضا  بقوه


وقعا  الاثنان  فاقدا  الوعي

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ركض  محمود  كالمجنون  ف الشوارع  حتي  وصل  لشارع  زوجته..وجد  الناس  مجتمعين  ف  اخر الشارع


يشاهدون  المنزل  وهوه  ينهار  كانت  بضع  احجار  تسقط  من الاعلي... المنزل  ع وشك  السقوط... محمود  صرخ


ف  رجال منصور(بطه  خرجت  ... بطه  حد  شافها) 


نظر  الرجال  وسط  الناس  لا أثر  لها....محمود دون  تردد  او تفكير... ركض  للمنزل  وهوه  يتحاشي  الصخور  التي  تسقط  من أعلي


دخل  الشقه  ولم يجدها  ف الصاله... دخل  غرفتها  وجدها  تجلس  ع  الفراش  وهيه  تبكي... تبكي  بخوف  وترتجف


صرخ  فيها

(بطااااااا... انتي  قاعده  ليييه.. البيت  بيقع) 


نظرت  له  من  بين  دموعها  وأشاحت  بوجهها  بعيد... أقترب  منها  ومسك  وجهها  وعاد  يصرخ  فيها


(انتي  اتطرشتي... بقولك  البيت  بيقع) 


دفعت  يده  بعيد  عنها  وقالت  ببكاء

(وانت  مالك  بيا... سيبه  يقع... انا  مش  هخرج  من  هنا... اتفضل... اجري  انت  و  ألحق  نفسك... ايه اللي  جابك  اصلا) 


نظر  لها  بغضب  وشعر  بالارض  تهتز  تحت  قدمه  والجدارن  تهتز  أمامه... حملها  بين  يداه  وركض  بها


ظلت  تركله  وتدفعه... لكنه  خرج  بها  مسرعا.... انزلها  ف الشارع  وسط  الناس... دفعته  ف  صدره.. نظر  لها  بغضب  ومسك  يدها


فجأة   بدأ  المنزل  يتهاوي.... صرخ  الناس  وبدأوا  بالتكبير  وذكر  الله... فاطمه  احتضنت  محمود  بقوه  وخوف


محمود  ضمها  بقوه... كانت  تنتفض  خوفاً  و فزعا... لحظات  مرت  كالسنوات... الناس  صوتها  يعلو  بخوف


أتت  قوات  الشرطه  والمطافي  خلفها... محمود  نظر  لهم... وانسحب  وهوه  يجر  فاطمه... قالت  له


(واخدني  ع فين) 


(مش  وقته  امشي  معايا) 


(لاء  مش  هروح  معاك  ف حته.. انا  هروح  عند  صاحبتي) 


(بطاااااا.... امشي  معايا  احسن  لك  بدل  ما  أضربك  ف الشارع... وبعدين   صاحبتك  مين  اللي  هتروحي  لها  ببجامه  النوم... أمشي  ادامي  بقولك) 


دفعها  أمامه   بعنف... اضطرت  ان  تسير  بصمت... وصلا  شقته... جلست  وهيه  ترتجف  ... بردا  وخوفا... محمود


نظر  من  الشرفه... خشي  ان  يكون  ملاحقا  من  الشرطه  او ما شابه.... قالت  له  بعد  ان  خرج


(انا  عايزه  امشي... مش  عايزه  اقعد  هنا  ف البيت  ده) 


(دا  بيتي  يا  بطه... وانتي  مراتي  هتقعدي  معايا  فين  ما  أكون) 


قالت  بحزن  وقهر

(مراتك... دلوقتي   افتكرت  اني  مراتك... بعد  ما  سبتني  الفتره  دي كلها  من  غير  ما  تسأل  عني.. ولا  حتي  تتصل  بيا  مره  واحده... انت  جيت  لي  ليه... انت  دخلت حياتي  ليه... جيت  لي  تكسر  قلبي  تاني... جيت  لي  بعد  ما  رميتني  زي  الكلبه  لوحدي... جيت  ليه  يا محمود... مش  انا  اللي  كان  نفسك  ترتاح  من  خلقتها... وارتحت.. بقا  ليك  بيت  ورجاله.. وبيتعمل  لك  ألف  حساب... جيت  لي  انا  ليه  بقا  )


محمود  نفرت  عروقه  من  الغضب  والعصبيه...قال  لها  بصراخ


(انتي  عايزه  من  *** أمي  ايه...حرام عليكي يا شيخه...هوه  انا  طيب  مش  عاجب  ...مفتري   برضو  مش  عاجب...عايزاني  اعمل  ايه  يعني...انتي  اللي  جبرتيني  اقولك كده...انتي  اللي  مستفزه  يا  فاطمه..عايزه  مني  ايه)


(انا  اللي  مستفزه...انا  اللي  جبرتك...كنت  قلت  لك  تورط  نفسك  مع  عالم   وسخه  ماورهاش  غير  أذيه  الناس...انا  اللي  قلت  لك  تبقا  بلطجي   وتشتغل  مع  البلطجيه...انا  يا  محمود..دا  انا  لأخر لحظه  اترجيتك  تمشي  جمب الحيطه  وما  تروحلهومش....بقيت  انا  دلوقتي  السبب)


(ايواااا...ايوااا  انا  عملت  كده....عشان  انا  تعبت  من  الفقر  والذل  والبهدله...انا  كنت  بتجنن  لما  اقرأ  انا  كنت  ضعيف  إزاي...انا  لقيت  نفسي  فجأه  مجرم  قاتل  هربان  متجوز  واحده  معرفهاش...عايش  ف بيت  هيقع  ف اي  لحظه...واديه  وقع....ولو  ما لحقتكيش  كان  هيقع  ع دماغك...عايزاني  اشوف  واعرف  كل  ده  وافضل  زي  ما  انا  ليييييه...انا  بني  آدم  يا  بطه...انا  لقيت  منصور  فرصه...قلت  لنفسي ماهي كده  كده  خربانه...كنت  هخليه  يهربني  بره  مصر  واعيش  حياتي...بدل  ما  انا  عامل  زي  الفار  كده  ع طول  مستخبي...واجري  لو  شفت  حته  عسكري  مالوش لازمه....منصور  هوه  فرصتي  يا  بطه...كنتي  عايزاني  افضل  عايش  معاكي  شغال  زي  الحريم  ف الطبيخ...لاء  يا  بطه  انا  مش  كده...مش  كده  ابدا)


(حلوه  واللهي  حجتك  دي...ما  انت  كنت  مكلم  كريم  صاحبك  وهوه  قالك  هيساعدك  وحضرك  الورق  خلاص...وانت  أديته له  رقمي  عشان  يكلمك  اما  يجهز  لك  كل  حاجه.....لزمته  ايه  تشتغل  مع  ناس  زباله  زي  دي  ليه  يا  محمود  ليه)


(كريم...انا  كنت  مكلم  حد  يسفرني...طب  ليه  ما قولتليش  قبل  كده)


(انت  بتقول ايه...ما  انت  كاتب  كل حاجه...يعني  قريت  ماضيك  كله  و ما شفتش  اتفاقك  مع  كريم)


(لاء  ما  اتزفتش  شفته...وبعدين خلاص  اللي حصل حصل...خلينا  ف دلوقتى..انتي  مش  هتخرجي  من  هنا..هتعيشي  معايا  هنا  ولما  اخلص  ورقي  المضروب  هتسافري  معايا...انتي  سامعه...ومفيش  شغل  ليكي  تاني..انتي  سامعه..ودا  اخر كلامي)


تركها  ودخل  غرفته...بدل  ثيابه  وخرج  لها  بثياب  تخصه.....ألقاها  لها  ف وجهها  وقال  بغضب


(قومي  غيري  وألبسي  الهدوم  دي  بدل  ما تبردي...يلا  قومي)


ألقت  ثيابه  ع الأرض....وقالت  بعصبيه

(وانا  مش  هلبس  ولا  هأكل  ولا  هشرب  من  فلوس حرام...ريح نفسك  يا  محمود...عايز  تحبسني  هنا  ف البيت  اللي  شاريه  بالحرام  ماشي...بس  انا  مش  هحط  لقمه  ف  بقي  من  فلوسك...وده  اخر  كلامي)


جلست  وهيه  تشتعل  غضبا  هيه  الآخري....محمود  نظر  لها  وكاد  ان  ينفجر  فيها...ركل  الثياب  بقوه...و  ذهب


لباب  الشقه  وخرج....و أغلق  الباب  بعنف...كاد ان يحطمه....نظرت  للفراغ  خلفه  بعد  خروجه  وقالت  بحزن


(خساره  يا محمود...يا ميت  خساره  عليك)

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رحمه  كتمت  صرختها  وهيه  تري زوجها  و ريحانه... سعد  يحتضنها  وهيه  عاريه  بين  يداه... يقبلها  ويلامس  جسدها  بتملك  كأنه  معتاد  ع  هذا


رحمه   عادت  للخلف  وهيه  تكتم  فمها  كي لا  تصرخ... لم  تحتمل  ركضت  للسلم  بشعور  غثيان  وأحتقار


لم  تصدق  ما  رآته  عيناها... دخلت  الشقه.. ركضت  لغرفته... و جمعت  اشياءها  ف  حقيبتها... وهيه  تبكي  


لم  تتخيل  ان  ينحط  زوجها  لهذا  القدر... كيف  يفعل  هذا  بأخيه  وبها؟؟؟ لعنته  بكل  وجع  وحرقه


جمعت  كل  اغراضها... و مسكت  قلم  وورقه  وكتبت له

(مكنتش  اعرف  انك  رخيص  اوي  كده... انا  مصدقتش  ريحانه   ال**** لما  قالت لي  انك  بتحبها... انا  بحتقرك  يا  سعد... وهمشي  من  هنا  من  غير  ما  أفضحك... همشي  عشان  ما  أكنش  سبب  ف  دمار  البيت  ده... بس  ياريت  تراجع  نفسك  لما  تقرأ  كلامي  ده  وتبعد  عن مرات  أخوك... انت  وهيه   منكم  لله... احمد  عمل لكم ايه.....ليه    يتخان  من  اقرب  الناس  ليه.... بس  هقولك  ع حاجه   لسه  عرفاها  النهاردة   بس... انا  حامل  يا  سعد... شكلي  انا  كمان  خنتك  وانا  مش فاكره... وعشان  كده  انا  هنهي  حياتي  النهاردة... لاني  بكره  الخيانه... عمري  ما  أنسي  لما  ابويا  خان  امي  ورماها  عشان  واحده  رخيصه  زيك  وزي  عشيقتك  يا  حقير  يا  زباله.... انا  غلطت  ومش فاكره  غلطت  ازاي  ومع  مين... بس  انا  هدفع  تمن  غلطاتي  بحياتي... وانت  يا  سعد  يا حب عمري... لو  كنت  انا  ست  قويه.. كنت  قتلتك  وضميري  مرتاح... لكن  انا  ضعيفه  جبانه... وانا  وانت  والحقيره  ريحانه... ما نستحقش  نعيش  مع  الناس  النضيفه... منك  لله  منكم  لله... وانا  قبلكم  مني  لله... الوداع  يا  غلطه  عمري... اشوفك  ف جهنم  وبئس المصير) 


كتبت  رحمه   نفس الرساله  ف  مذكراتها  كي  لا  تنسي  ما  فعلت  وماذا  يجب  ان تفعل  بنفسها؟؟؟؟؟ 


أخذت  اغراضها  وخرجت  من الباب  وهيه  تنظر  للمنزل   لأخر  مره... كم  عانت  ف هذا  المنزل... وايضا  كم  سعدت


مع  خائنها  الوضيع.... خرجت  باكيه... محطمه.. منهاره... سارت  ف  الشوارع    حزينه... مهمومه.. لا تعرف  وجهتها


سارت  حتي  وصلت  للبحر... صعدت  لجرف  عالي.. وقفت  ع  حافته... واغمضت  عيناها... استغفرت  ربها


ودعت ان  يسامحها... يسامحها   ع كل ما فعلت  وهيه لا تذكر... حاولت  رمي  نفسها... لكنها  لم  تستطع... جلست  ارضا


وضربت  الصخور القاسيه  بيدها  عده مرات  بغل  وعنف.. حتي  جرحت  يداها... نهضت  بعد  ساعه  او أكثر من البكاء  والعويل


وجدت  نفسها  تسير  ف  الشوارع... وحيده  ضائعه... هائمه  وسط البشر... جلست  ع  رصيف  بارد


نظرت  للناس  بضياع... لكنها  رآت  بالصدفه  اعلان  لمشفي  السرطان... تذكرت  كلام  الطبيب  عن  المشفيات  


المختصه  بحالتها... وجدت  نفسها  تشد  عزيمتها... و توجهت  صوب  محطه  القطار

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ف  غرفه  سعد... 

دخل  غرفته  وهوه  يدخن  سيجارته  بعنف... جلس  ع فراشه  ... وأستعد  لينزع  ثيابه  لينام


لكنه  رآي  ورقه  ع  الفراش... مسك  الورقه  وقرأها.. اتسعت  عيناه  ع  وسعها... كاد  ان  يصرخ


طبق  الورقه  ف يداه... وخرج  يركض  كالمجنون.... وجد  احمد  ف الصاله... سأله  احمد  بذعر


(مالك  يا  سعد  بتجري  كده  ليه) 


سعد  ألقي  له  خطاب  رحمه.. وخرج  يركض  ف  الشارع  كالمجنون.... أحمد  ركض  خلفه... لكن  فجأة 


ف  ظلمه الليل... والشارع  فارغ  ... والناس  نيام... هجم  رجال  ملثمين  ع  سعد  من الخلف... كتفوه  ليشلوا  حركته


أحمد  صرخ  فيهم  وهوه  قادم

(اخويا... ف اييييه...ابعدوا  عنه  يا  ولاد *****) 


لكن  الرجال  خدروا  سعد  بمنديل  فيه  ماده  مخدره... ركضوا  الي  أحمد   وكمموه  مثل  أخيه

//////////////////////

محمود  ترك  فاطمه   كي  لا يقتلها  ف لحظه غضب... وصل  لمقر  عصابه  منصور... لكنه  سمع  حركه  وكلام  وصوت عالي


دخل  ورآي  الآتي.... رجال  مكبلين  بسلاسل  حديديه  من  أقدامهم... و أربع  رجال  منهم  يمسكون  عصي  ضخمه (شوم) 


أخذوها  عنوه  من  رجال  منصور... ويحاولون  ضرب  كل من  يقترب  منهم... محمود  تقدم  من  الجميع


سعد رآه  نظر  له  بذهول  وصدمه... قال  محمود  لمنصور

(ف إيه... ايه  الدوشه  دي  يا  منص... مالهم  دول) 


قال  منصور  وهوه  غاضب

(عايزين  يهربوا  ولاد ****... المخدر  مفعوله  خلص  وفاقوا  غفلوه  القراطيس  اللي  بيحرصوهم  وعايزين  يهربوا... فاكرينها  سايبه.. ولا  دخول  الحمام  زي  خروجه) 


محمود  نظر  لرجال  منصور  اللذين  يحاولون  اخذ  العصي  من  الاربع  رجال  لكنهم  خائفين  منهم


محمود  اقترب  من  الرجال  المخطوفين  بشجاعه.. دون  ان  يهاب  من  العصي  الضخمه  ف أيديهم 


اقترب  من أولهم... رفع  الرجل  العصي  وضرب  محمود... محمود  صدر  ذراعه  ... سقطت  الضربه  ع  ذراعه  لكنه  لم  يتأثر


مسك  العصا  من  يد  هذا  الرجل  وضربه  بالرأس  ف  وجهه  كسر  له  أنفه.... أستدار  ولكم  سعد  ف وجهه  بقوه  ارتد  سعد  للخلف


ركل  محمود  الرجل  الثالث   اصطدم  المسكين  ف  القفص  الحديدي  خلفه... مسك  محمود  عنق  الرجل  الرابع  و أخذ  من  يده  العصا


وضربه  بها  ع  قدمه.... نظر  منصور  لرجاله  بفخر  ... كان  سعيداً   جدا  بشجاعه  محمود  وقوته  الماهوله... قوه  مكبوته.. دفينه.. قوه  يملؤها  الحقد  والغل


أحمد  وهوه  الرجل الثالث... نظر  لمحمود  وقال  بغضب

(شايف  نفسك  دكر  أوي... فكني  وواجهني  راجل  لراجل  وانا  اعرفك  مقامك  يا *****) 


سعد  نظر  لأخيه  .. محمود  تقدم  من  أحمد  ومسك  عنقه  بغل  وقال  بغضب  أعمي


(انت  بتقولي  انا  يا*****... انا  هعرفك  ازاي  تكلمني  كدااااااا) 


صرخ  فيه  محمود... لقد سئم  من  سب  الناس  له  والاستخفاف  به... رفع  أحمد  من  عنقه  ... كاد  ان يخنقه

سعد  صرخ  فيه


(كفايااااااا.... كفايه  يا  محمود   سيبه... سيبه  وأقتلني  انا... سيبه) 


محمود  ترك  أحمد  ونظر  لسعد  بصدمه  اقترب  منه  وقال

(انت  تعرفني... انت  تعرف  اسمي  منين) 


سعد  بغضب(أعرفك  منين... انت  عايش لحد  دلوقتى  بسببي... انا  واخويا  امير  اللي  نجدناك  انت  وبطه  ... وانا  واخويا  اللي  شلناك  ع  ايدينا  ووديناك  المستشفى.. وإلا  كان  زمانك  ميت) 


نظر  له  محمود  غير  مصدق... قال  له

(انت  سعد.. انت  جار  بطه  القديم) 


(ايوا  انا... وده  اخويا  الكبير  اللي  عايز  تقتله... متشكر  يا  محمود.. هوه  ده  رد  الدين... مره  نتشد  انا  وابويا  واخواتي  ع القسم  ويطلع *******  بسببكم... ودلوقتي   جاي  تخطفنا  وتقتلنا... متشكر  يابن الأصول) 


محمود   نظر  لمنصور... منصور  لم  يفهم  نظرته... صرخ  فيه

(فكهم... انت  هتنح  لي  فكهم  ) 


منصور   بهلع

(انت  اتجننت... افك  مين... انت  فاهم  انت  بتقول ايه) 


محمود  ألتقط  سكين  من  الاغراض  الملقاه... ووضعه  ع  رقبه  منصور.. تأهب  رجال  منصور  لضرب  محمود


لكنه  نظر  لهم  نظره  حارقه... ابتعدوا  جميعاً.... قال  منصور  لمحمود


(محمود  أعقل... لو  ما ودناهمش  للباشا  بكره  او  بعده  بالكتير... هيأخدنا  إحنا   بدلهم) 


(طظ... ميت  طظ  ف الباشا  بتاعك... ايه  يعني  خليه  يأخدنا... ما احنا  صايعين  وما ورناش  حاجه... إنما   دول  كل واحد  فيهم   عنده  اللي يخاف  عليه... إنما   احنا... احنا  اييييه  يا  منصور... فكهم... ما تخلنيش  ازعلك  وانت  فاهم   اني  اعرف   ازعل  بلد  بحالها) 


(طب خلاص  خلاص) 


أشار  لرجاله  ان  يفك قيد  سعد  وأحمد... سعد  قال   

(محمود  فك  محمد  بهي... ده  لسه  مراته  مخلفه  من شهر... حرام عليكوا  تيتموا  ابنه) 


محمود   نظر له  واؤم  له... منصور  قال  لرجاله

(فكوهم  كلهم  عشان  عم  محمود  يرتاح... وبلغوا  الرجاله  يجيبوا  لي  ناس  غيرهم... خلاص  ارتحت   يا  عم  محمود... وبعد اذنك  بقا... انت  برا  الحوار  ده  خالص...) 


تركهم  منصور   وخرج... لكنه  استدار مجددا   وقال  لمحمود

(صحيح   يا معلم... هتضمن  ازاي  انهم  ما يبلغوش  عننا  بعد  ما نحلهم) 


محمود  نظر  للرجال  المخطوفين  ولسعد تحديداً... قال  رجل  من  رجال منصور


(خلاص  يا معلم  ... نخدرهم  ونرميهم  ف الشارع  بعيد  عن هنا) 


محمود  قال  بثقه  وهوه  ينظر  لهم  بحده

(لاء... هيخرجوا  ع  رجلهم... ولو... لو  حد  فيهم  فكر  مجرد  تفكير   انه  يبلغ... هيلاقي  نفسه  هوه  و حريمه  واهله  كلهم   هنا  تحت  رجلي... واللي  هيحصل  فيهم... هيتصور  ويروح  للباقي... وما  أدراكوا  من اللي  هتشوفوه  مني... كلامي  واضح  للكل  ... هتخرجوا  دلوقتي   من  هنا... واللي  حصل  هنا  يفضل  هنا آمين   ولا  حد  فيكم  ليه  رآي  تاني.... امين  ولا  لاء) 


صرخ  فيهم.. هز  الرجال  رأسهم  بخوف... نظر  محمود  لسعد  واحمد... هز  سعد  رأسه  موافق


اشار  له  محمود  ان  يتبعه... خرج  احمد  وسعد  خلف  محمود  وسارا  معا... محمود  قال  لسعد


(كده  انا  سديت لك  ديني.. حياتك  انت  وأخوك  وجيرانك... قصاد  حياتي  انا  ومراتي) 


سعد  نظر  له  وقال

(سديته  يا  محمود... بس  انا  عايز  أسالك.. ايه  اللي  مخليك  تعمل  كده... ليه  شغال  مع  ناس  زي  دي... شكلك  ابن ناس  مش  زيهم) 


(ده  موضوع  يطول  شرحه... هبقا  احكي  لك  عليه بعدين) 


سعد  فكر  قليلاً   وقال  له

(ماشي  يا  محمود... طب  انا  لو  طلبت  منك  خدمه... اعتبرها دين  هتعملها  لي) 


محمود  دون  تردد

(رقبتي  يا  سعد... خدمه  إيه) 


(مش  وقتها  دلوقتى... لما  يجي لها  وقتها  هطلبها  منك.... ومن  هنا  ليومها... هكون  رتبت  لها  كويس... انا  بس  دلوقتي   لازم  ادور  ع  مراتي) 


(مراتك... ليه  مالها  راحت  فين) 


سعد قص  لمحمود  حكايته  مع  رحمه  ... محمود  حزن  لأجله... وأخذ  منه  رقم  هاتفه  ليتواصل  معه


اوصلهم  محمود  الي  منطقتهم...و قرر ان  يساعد  سعد  ف البحث  عن  زوجته


       يتبع  ف الفصل 19

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