القائمة الرئيسية

الصفحات

أخبار

رواية الوجه الآخر للقمر الفصل السابع عشر و الثامن عشر

حصرين ع موقع المجد للقصص والحكايات 

 فريده احمد  فريد

الوجه الآخر للقمر

الفصل السابع عشر و الثامن عشر 

حصرين ع موقع المجد للقصص والحكايات    فريده احمد  فريد  الوجه الآخر للقمر  الفصل السابع عشر و الثامن عشر


أمام الكازينو.... يقف  تاكسي  وتخرج  منه  نسرين  وهيه  ترتدي  فستان  اسود قصير لامع


يظهر نصف  ظهرها ومعظم  صدرها... ويكشف  جزء كبير  من  قدمها... كان  فستان  فاضح  تماما


و كانت  تضع  ميكب  مبالغ فيه... خطت  بقدمها  تقترب  من  الكازينو... لكنها  فجأة  وجدت  من  يسحبها  من  يدها


نظرت  له  بصدمه... سيف  صفعها  ع  وجهها  بكل  قوته... جرها  من  يدها  لسيارته..وهوه  يصرخ  بها


(زباله... حقيره... ورخيصه.... مش  عايزه  تنضفي  ابدا... تعالي... انا  مش  هسيبك  ترجعي  تاني ... مش  هسيبك  يا  نسرين... والمره  دي  انا  هخدك  لمكان  مستحيل  تخرجي منه  عايشه) 


نسرين  سحبت يدها  من  يده  بقوه... نظر  لها... قالت  له  كأنها  تترجاه


(سيف  سبني  والنبي  سبني... النهارده بس... ابوس ايدك  سبني  النهاردة  اعتبره  اخر يوم ليا  هنا... ابوس  رجلك يا  سيف... سبني  دلوقتي... وبكره  انا  هجيلك  برجلي... تحبسني.... تقطعني  هكون  ملك  إيدك... بس  دلوقتي  سبني)


سيف  نظر  لها  بغضب   ومقت  وأشمئزاز... قال  لها  بمنتهي القرف


(للدرجة دي مش قادره  تبعدي عن  القذارة... عايزاني  اسيبك  النهارده  واخدك  بكره.... اسيب  مراتي  لاحضان الرجاله... عشان  تقعد  ع  رجل  كل  واحد  فيهم  شويه.... نسرين  انتي  بجد  ارخص  إنسانه  شفتها  ف  حياتي.... ياريتني  كنت مت  ف  اليوم  ده.. ولا  اني  اعيش  بسببك... ياريتني كنت  مت... اول مره ف حياتي  اكره  اني  لسه  عايش... انا  بكرهك... بكره  كل  حاجه  فيكي... انتي  طالق... طالق  يا  نسرين... طالق  يا  أقذر مخلوقات الله)


بصق  ف  وجهها... ودفعها  بقوه... سقطت  ع  ظهرها  ع  الرصيف.... ركب  سيارته... وانطلق  بها  بقوه


نسرين  نظرت  للسياره  وهيه  تقطع  الطريق  بسرعه جنونيه... وقفت  ع  قدمها  وهيه  تمسح  دموعها  بقوه


لكنها  استدارت  ودخلت  الكازينو....


سيف  كاد  ان  ينفجر   غضبا.... هاتفه  يرن  بأستمرار... توقف  فجأه  بالسياره  ومسك  الهاتف  بغضب


وجده  والده... ألقي  بالهاتف  جانبا.... وظل  ينظر  للطريق  أمامه  بشرود... هاتفه  عاد  للرنين  المزعج... رد  بقسوة


(ف  إيه  يابا  عمال  زن  زن  زن... مش  عايز  اكلمك ... مش  عايز اكلم اي حد  دلوقتي)


ابوه  بغضب(انت  اتجننت... انت  بتزعق لي  يا  سيف... انت  خلاص  دماغك  ضربت)


سيف  تدارك  نفسه  أخيراً... اخذ نفس  عميق  وقال

(انا  آسف.. ما تزعلش مني  يا  حج... بس  انا  مخنوق  وقرفان  ومش  طايق نفسي ... ممكن  تأجل  اي  كلام معايا  لبعدين  ممكن  يا حج)


إسماعيل (هوه  ف  إيه... هوه  انا  اكلم  اخوك  يتعصب  عليا... أكلمك  برضو  تتعصب... طب  أخوك  ع طول  عصبي  من  ساعه  ما  جبرته  ع  بنت عمك... و كمان  رجله  متعوره  ومش  قادر  يروح  شركته... انت  بقا... حضرتك  داير تتسرمح  فين... انا  اضطريت اكذب ع جدك  واقوله  انك ف  بيروت  عشان  المعرض السنوي... بس  حضرتك  مأهمل  شغلك  وحياتك  و  داير  ورا  السنيورة بتاعتك)


سيف  بصدمه(انت عرفت منين  اني  بدور  ع  نسرين)


إسماعيل بحنق(عرفت  من  أمك... هيكون  من  مين  يا  بيه.. ارجع  لعقلك  يابني  انت  قلت لي  مش  عايز  تشتغل  ف  المساخيط... قلت لك  براحتك  إنما تسيب  اخوك  لوحده  غرقان  ف  الشغل... مش  هينفع  يا  سيف... انت  ليه  مش  عايز  تكبر  وتبقا  راجل... هتفضل  دلوعه  امك  لحد  أمته... سيبك  من  اللي  ف  دماغك  عن  البت  دي  لأنك  مستحيل تلاقيها  وتعالي  ع  البلد  عشان  هجوزك)


سيف  اشتغل  غضبا.... ابيه  لا  يترك  له  فرصه إلا  و يهينه.. منذ  أن  توفي  حسن .. وأبيه  يصب  جام غضبه  


عليه... ودائما  يراه  تافها... لأ  يعتمد عليه.... لم  يأبه  ابيه  لأحلامه  او  طموحاته  يوماً... سيف  لم  يتمالك نفسه  مجدداً... صرخ ف ابيه


(انا  مش  عيل  عشان  تقولي  كده.... ولا  تجبرني  ع  الجواز  زي  عمار... انا لقتها و  اتجوزتها  يا  إسماعيل بيه... اتجوزت  البت  اللي  نجدتني  من  الموت  زمان... بس  انا عارف  ان  ده  مش فارق  معاك  ابدا.. انت  دايما  بتعاملني  ع  اني  نكره ف  حياتكم  وده  عشان  انا  راجل  محترم... مش  زي  اخواتي  ولا  ولاد عمي.... انا  عارف  يابا  انك  بتتمني  من  كل  قلبك  لو  كنت  انا  اللي  رحت  لبنان  ومت  ف  الحادثه... وحسن  ابنك  هوه  اللي  عاش ... عارف  ان  عمرك  ما  حبتني  زيهم... انت  عندك  عمار  وحسن  وبس.... إنما  أنا  ولا  حاجه  بالنسبه لك  حتي  بعد  ما  رجعت  من  الموت ... محستش  انك  خايف  عليا  ولا  زعلان  ع  اللي  جرالي... بس  يا  حج انا  هسافر  لبنان... هسافر  ومش  هرجع  تاني... وان شاء الله  تسمع  خبري  زي  ما  جالك  خبر  حسن)


سيف  مسح  دموعه  بقوه... لدرجه  انه  جرح  وجهه  بأظافره.... مسك  هاتفه... و فتح  النافذه.... وألقاه  بقوه  عرض الحائط


تحطم الهاتف  تماماً.... قال  لنفسه  وهوه  غاضب .. حاقن  ع  نفسه  وع  الحياه  كلها


(انا  هسافر... هسافر  الليله دي... هسافر  ومش  هرجع  تاني ... بس... بس  امشي  إزاي  واسيبها... انا  مش  قادر   استحمل  وجودها  ف  المكان  ده... هوه  انا  صحيح  مش  راجل  زي  ما  ابويا  بيقول  عليا.... صح  هوه  عنده  حق... مفيش  راجل  حر  عنده  نخوه  يقبل  يتجوز  واحده  شمال... حتي  لو  كان  مديون لها  بحياته... مش عارف  المفروض  أعمل  إيه... بص  يا  سيف... حاول  لآخر مره... حاول  معاها... اطلب  منها  تسافر   معاك... ولو  رفضت... أديها  برشام  التنبيه  ده  ولا  كان  اسمه ايه.. المهم  ما  تسبهاش... خدها  معاك  يا  سيف)


سيف... حزم  أمره  بصعوبة... كان  قرار  صعب  للغاية  بالنسبة لرجل صعيدي  مثله... لكنه  يعشقها.. لم  يحتمل ان 


يغادر البلاد  ويتركها  هكذا  بين  براثن  الضياع  والفساد.. و  الحياه  الموبؤه  تلك.... نظر أمامه  بغضب


وانطلق  بالسيارة فجأه  وبسرعه... وقف  أمام  الكازينو  وانتظرها  لتخرج  إليه.. لم يرد  ان  يدخل  المكان


كي  لا  يراها  ع  قدم  أحدهم.. او  بين   اذرع  الرجال... أشعل  سيجارة  و  ظل  ينفث  دخانها  بغضب... الي ان ظهرت  أخيرا... لكنه  صدم  عندما رآها  خرجت وهيه  تركض

***************************

ف فيلا أكتوبر


محمود(يا بنتي  حرام ع  أهلك... هتموتيني  يا  نور.. اتكلمي  برقه.. بنعومه... سيبك  من  التجحيش  ده... حرام عليكي تعبت  منك)


نور  ببرود(اعمل ايه يعني... ذنب اهلي  انا  ان  الحريم  ماسخين  ف  كلامهم... هيه  الواحده  لو  ما  اتدلعتش  ف  الكلام  واتمايست  هتموت  يعني... يا  محمود باشا  فكك  بقا... ما  انا  بتكلم  عادي  اهوه... اعمل ايه تاني  بس)


محمود(يا  نور  كلامك  وأسلوبك  و  طريقتك  شوارعيه  اوي... يا  حبيبتي... اتكلمي  بهدوء... مش لازم  تجعري  ف  الكلام... جربي... جربي  ومش  هتخسري  حاجه.... خفي  الحده  ف  صوتك... ووطيه  و نعميه  شويه)


نور  لم  تسمع  شيئاً من  كلامه... بعد أن  قال  حبيبتي... شعرت  ان  الأرض  تدور  تحت  قدمها


شعرت  بدوار  غريب... سحر  تلك  الكلمه... آثار بداخلها  مشاعر  غريبه... قلبها  انقبض... جسدها  برد... زلزال  غريب  احتلها


زلزال  مشاعر  متداخلة... لم  تفهم  لما  يأثر  فيها  كلامه  ووجوده  و  أسلوبه  فيها  هكذا


محمود  لكزها  لتعود لأرض الواقع... نظرت  له  و هزت  رأسها  كأنها  تستمع  له... قال


(ها  بتعرفي... ولا  دا  كمان  مالكيش  فيه)


نور  بتوهان(ها... بتقول ايه  معلش... ايه  هوه  ده  اللي  اعرفه  ولا  لأ)


محمود  بزعيق(الرقص.... الزفت  الرقص... بتعرفي  ولا  لأ)


هزت  كتفها  كالاطفال... نظر  لها  بغضب... جذبها  من  يدها  بقوه... و  اقتربوا  من  مشغل الموسيقى


أدار محمود  الجهاز... واوقفها  أمامه... أصبحوا  مواجهين  لبعضهم... أمسك  يدها  ووضعها  ع  كتفه


ووضع  يده  ع  خاصرها... نظرت  له  بصدمه... ونظرت  ليداه  ع  جسدها  وف  يدها...


سرت  قشعريرة بارده  ف  أنحاء جسدها... كانت  ترتجف  بداخلها...  تريد أن  تتمسك به  للنهايه.


بدأت  الموسيقي... و الأغنيه  الرومانسية  الحالمه


(ما بدي  قلك شو بني  شو  اللي  جرالي  بهي  الدني  بدك معك ابد  العمر  اول  سطر بالولدني.... ولا بدي احكي شو حصل.. شو اللي كسر فيا الأمل.... شو اللي  قلب  ضحكي  زعل.. غربني  ياما  وردني... ما بدي  قلك  شو  بنييييييي)


محمود  كان  يحركها  يمينا ويسارا... كانت  تنظر  له  وكأنها  ليست  معانا  ف نفس العالم... كانت  تتحرك  بتلقائيه... جسدها  لم  يكن  ملك لها  ف  تلك  اللحظات 


محمود  كان ينظر  لعيناها  برغبه... لكن  نور  كانت  تنظر  له بعشق.... كلمات  الاغنيه  أثارت  فيها  نار  الغرام


كانت  تشعر  بكلمات  الاغنيه  ف  قلبها  و  شريانها... شعرت  انها  من  تقول  له  هذه  الكلمات  العذبه


خفقات  قلبها... تتسارع  مع  كل  وتر  يعزف... خشت  ان  يسمع  قلبها... او  يري  حبها  له  ف  عيناها


نور  اغمضت  عيناها  بألم... لأنها  صدمت... فوجئت  بحقيقه  مشاعرها... تلك  المشاعر  التي  لم  تعرف  عنها  شئ  يوماً


الأن  هيه  تعيشها... تشعر  بها  ف  خلايا  جسدها... يغني  بها  قلبها.... ابتسمت  بعذوبه  وهيه  تسبح  ف  أحلام


اليقظه  التي  تحياها  بمفردها... لكن  فجأه  شعرت  بشفتان  دافئتان تلتهم  شفتاها... لم  تفتح  عيناها.. خوفاً


من  أن  يتركها... تركته  يقبلها... لم  تبادله  لأنها لا  تعرف  كيف  تبادله  قبلاته  الساخنه


مرر  يده  ع  جسدها.... جذبها  إليه  أكثر.. فألتصقت  به... شعرت  بخوف  مع  الرغبة... لكن  محمود  تمادي


وادخل  يداه  ف  فتحه  فستانها ... انتفضت  بين  يداه.. وكانت  تهم  بالاعتراض.... لكن  انقذها  رنين الهاتف


محمود  ابتعد  عنها.. واخرج  يده... نظر  لها  طويلاً... لكن  عاد  رنين  الهاتف  مجدداً 


محمود  نظر للهاتف  بغضب..... و تركها  وذهب  للهاتف  الأرضي... رفع  السماعه.... و قذفها  ف  الأرض  بقوه


ف  تلك الاثناء... نور  خشت  ان  يعود  و يكمل  ما  بدأه... شعرت  بخوف  رهيب  يحتلها... خافت ع  شرفها  و  كرامتها


هيه  متأكده  انه  لا  يحبها... و هيه  لن  تستطيع أن  تفرط ف  نفسها  لأي كان... وان  كانت  تحبه  وتعشقه


أسرعت الي  مشغل الموسيقى... محمود  وصل  إليها.. نظر  لها  بتعجب  وقال


(بتعملي إيه... هتغيري  الأغنيه ليه)


نور  بأسلوبها  السوقي

(يا محمود بيه... هيه  دي  اغاني  تتسمع  برضو.... انا  بقا  هسمعك  الطرب الأصيل...)


فجأه  دوت   الأغنيه  الشعبيه

(مستهون بالستات ياخويا  دولا مجانين  دول كربونه  وحياه ابويا  دولا  مجانين   هانم  ولا  بمنديل بأويه دولا  مجانين  خد بالك من  صنف الحريم.... دول  دول  دول خبالانه... اللي  فاهمهم رأسه تعبانه  تفهم  ايه  هنموت  ف كنكه... كان  غيرك  أشطر.... دول.. دول.. دول... خبالانه تواضع منهم  قعدوا  معانا... شق البطيخه وع  البركه ) 


محمود  صدم... برق  لها  بفزع  وهيه  ترقص  كالرجال  ف  الإفراح  الشعبيه... ركض  الي  المشغل  واطفئه... نظرت  له


وهيه  لا تزال  ترقص... كانت  تغيظه  وترفع  حواجبها  بكيد.... محمود  ضرب  كف ع  كف... ودفعها 


سقطت  ع  الاريكه  خلفها... وانفجرت  ف  الضحك... نظر  لها  بغل... ومسك  كوب  المياه.... صبه  ع  رأسها... وضحك  هوه  وهيه  تصرخ  من  الماء  البارد

*****************************

ف احراش لبنان 


سما  تنظر  لمنقذها وهيه  غير  مصدقه... قالت  بصدمه

(حسن... حسن... انت  هنا... دا  انت  بجد.... الحمدالله يارب... الحمد لله) 


ارتمت  بين  ذراعيه  وهيه  تبكي..... وضع  يده  ع  فمها.. وقال  بصوت  منخفض


(ششششش.... وطي  صوتك... سما  انا  بقالي  يومين بلف عليكي  ف الغابات  زي  المجنون... كان  معايا  8  رجاله.. كلهم  ماتوا... الغابه  كلها  عصابات  غير  الحيوانات  المفترسة... يلا... يلا  يا  سما  قبل  ما  حد  منهم  يصحي... يلا) 


شدها... وركضوا  سويا  بين  الأشجار... حسن  كان  حذر... كلما  رأي  ضوء  النيران... كان  يختبئ  هوه  و سما


و يكملوا  ركضهم  بعيد  عن  مصدر النار...... سما  قالت  له  وهيه  تجلس  فجأة 


(انا  تعبت... مش  قادرة... مش قادره يا  مستر حسن... خلينا  نرتاح  شويه  والنبي) 


نظر  حسن  حوله... وأخرج  سكين  ضخم و  سلاح... ووضعهم  ع  الأرض... وجلس  أمامها... مسك  يدها  وقال  بصدق


(انتي عارفه  انا دخت  عليكي إزاي.. النهارده شفتك  بالصدفه .. كنتي  ف  الميه  بتعملي ايه... وإزاي  تقعلي  هدومك  وف  راجل  غريب  واقف... انا  كنت  هتجنن  بجد... حاولت  أشاور  لك  والفت نظرك... بس  انتي غبيه كعادتك.... 

عاماً الحمد لله اني  خدت  أخيراً..... انا  كنت  بدور  عليكي  زي  المجنون  اليومين اللي فاتو دول... سما  انا  قريت  كلامك  ف  الدفتر  بتاعك.... ليه  ما  قولتليش... ليه  يا  سما) 


نظرت  للأرض  وعادت  تنظر  له  بحزن... قالت

(كان  هيفرق  معاك.... كنت  هتساعدني  يعني.... كنت  هتحميني  منه) 


حسن  بغضب(آه... آه   يا  سما... آه  كنت  هحميكي... انا  بعد  ما  قريت  كلامك... اتجننت  رحت  القسم  الظابط  خاف  منه... اجرت  ناس   و جيت  بيهم  هنا... لكنهم  اتقتلوا... كلهم  ماتوا  يا  سما... انا  مش قادر  أصدق  ان  الغابه  فيها  وحوش  بالشكل ده  غير  الحيوانات) 


سما  نظرت  له... لم  تفهم شئ... سألت نفسها.... لما  اتي  خلفي... لما  عرض  حياته  للخطر  من  أجلي... لما  تكبد  


كل  هذا  العناء... أرادت بشده  ان  تسأله... لكن  بداخلها  صوت  منعها  صوت  أخبرها  انها  إذا  سألت 


يمكن  أن  تسمع  إجابه  تصدمها... هيه  متأكده انه  لا  يحبها  ابدا... إذا  لما  فعل كل  هذا  لأجلها 


حسن  نظر  لها  ليفهم  تلك  النظره  التي  ترمقه  بها... جفلت  منه... كانت  شارده  وانتبهت  ع  نظراته


سألها (مالك) 


سما(مفيش) 


حسن(لا في... اتكلمي) 


سما(عملت  كده  ليه.... جيت  ورايا  ليه... عذبت  نفسك  وعرضتها  للموت  عشاني  ليه) 


حسن  نظر  للارض... عاد  ينظر  حوله... وقف  و  ألتقط  الأسلحة... ووضعها  ف  حزام  بنطاله.... و  مسك  يدها


و جذبها  لتقف  ع  قدمها.... قال  لها... وهوه  يشير  ع  الطريق


(انا  فاكر  الطريق  ده  كويس..... هنمشي  هناك... هنلاقي  نهر... هنعديه... و  بعدها   انا  هتصرف) 


مسك  يدها... سارت  معه  لكن  دون  حماس... شعرت  بأحباط  رهيب.... لكنها  لم  تفهم  لماذا  لم  يجبها؟؟؟؟ 


تركت  الأفكار جانبا... كانت  منهكه... ترتجف  من  البرد... جائعه... تريد  دخول  الحمام بشده 


لكنها  تحاملت  ع  نفسها.... ظلت  تسير  خلفه  وهيه  تمسك يده... لم  يعد  لديها  اي  شعور  بالخوف... شعرت  انها  متلبده  المشاعر حالياً 


وصلوا  لضفه  نهر  جاري... نظرت  له  بقلق  وقالت

(إحنا  هنعدي  النهر  ده) 


نظر لها  وقال يطمئنها(متخافيش... انا عارف  انك  بتخافي  من  الميه... هشيلك  ع  ضهري  وهنعدي) 


نظرت  برعب  للمياه  السوداء  القاحله... خشت  ان  تكون عميقه.... نزل  حسن  الي  المياه


ونظر  لها  وأشار ان  تأتي إليه ... اقتربت  منه  و جلست  ع  الأرض  وقفزت  ع  ظهره


المياه  كانت  تصل  لصدره  تقريباً... كان  يحارب  المياه  الجاريه  ليصل  للطرف الآخر... سما لم  تعد  خائفه  بل


شعرت  بسعاده  غريبه  ف  غير  محلها.... المياه  كانت  بارده.... والجو  عاصف  قليلاً... والهواء  يعاكس  سير  حسن  مع  التيار


لكنه  وصل  أخيراً.... انزلها  ع  الضفه... وقفز  برشاقه... نظر  لها  واخذ  نفسه... مسك  يدها.... وساروا  بخطي  سريعه


وقف  حسن... ونظر  حوله... قال لها

(هناك  اهي... تعالي) 


نظرت  ووجدت  سياره جيب... حمدت الله.. وركضت  معه.. ركبوا  السياره... و  انطلق  حسن بها... بسرعه


سما  ألقت  رأسها  ع مسند   الكرسي.... وتنهدت  براحه  أخيرا.... سار  حسن  مسافه طويله... ثم  خرج  لطريق  معبد


تنهد  حسن... ونظر  لها... وجدها  تغط ف  النوم... لكن  جسدها  كان  ينتفض  من  البرد... حسن  أسرع 


بالسياره أكثر  ليصل  الي  البيت... وصل  بعد  نصف ساعة  تقريباً... دخل  الفيلا.... وحملها  بين  ذراعيه  لغرفتها 


اضطر  حسن  ام  ينزع  عنها  الثياب  المبلله... لكنه  كان  خجل  من  رؤيه  جسدها... رفض  هذا  الموقف


وجد  فكره جيده... اطفئ  الاضاءة.... و عاد  إليها  نزع  ثيابها.... و  ألبسها  ثياب  نظيفه.... قبل  رأسها 


وخرج  من  الغرفه  بعد  أن  دثرها  بالغطاء  جيدآ 

*********************

تعدي  الوقت  منتصف الليل.... نورهان  كانت  منهمكه  ف  مراجعه  الملفات  التي  طلبها  عمار  منها.. لكنها كانت  سعيده  لأنها  تشغل  وقتها  بعمل  مفيد


وهوه  أيضا  كان  منهمك  ع  اللاب توب... يبحث  ف  مشروعه  الجديد..... عمار  أخيراً 


شعر بآلام ف  ظهره... رفع  وجهه  من  ع  اللاب توب... لكنه  فؤجي بنورهان  تغط  ف  النوم  وهيه  تمسك الملفات 


نهض  سريعاً  وهوه  يعرج  وتوجه  إليها... كان  يهم  بحملها  لكنه  تذكر  قدمه... نظر  لقدمه  بغضب


لن  يستطع  حملها.... ولا  يريد  أن  يوقظها.... نظر  حوله.. وخرج  من  غرفه  المكتب.... ذهب  لغرفته... واحضر  غطاء  سميك


عاد  إليها.. ومدد  جسدها  بشكل  مستقيم ع  الاريكه... و فرد   الغطاء  عليها.... نظر  لوجهها  وهيه  نائمه


شعر  بالاستغراب... قال  ف  نفسه

(يعني  مش  وحشه اوي... هيه  عنيده  ودمها  واقف... بس  جدعه) 


تعجب  من  نفسه  لأنه  قال  هذا .... رفع  حاجبه  دهشه... ثم  غضب... تركها  وعاد  لغرفته... تمدد  ع  فراشه 


وأشعل  سيجارة.. لكنه  شعر  انه  غير  مرتاح... شعر  بالاختناق.... ألقي  السيجاره.... ونهض  من  فراشه 


اخذ  غطاء  لنفسه... واخذ  سجائره  وهاتفه.... وعاد  لغرفه  مكتبه... تمدد  ع  الأرض  بجوار  اريكه  نورهان


(لأن  غرفه  المكتب  تحتوي  ع  اريكه  واحده  وأربع كراسي  جلديه... غير  مكتبه  ضخمه... ومكتب  عمار ) 


شعر براحه  غريبه.... رغم  انه  لم  ينم  ع الأرض  أبدا  من قبل.. لكنه  الآن  يشعر  براحه .... تمدد  وفرد  جسده  بسعاده 


لم  يعرف  لما  هوه  مرتاح الأن..... اخرج  سجائره... وأشعل واحده.... و مسك  هاتفه  باليد  الأخري.... تذكر 


فجأه  انه  لم  يتصل  بنورهان ... لم  يسألها  ماذا  فعلت بالملف.!؟؟؟؟ .. هل  اوصلته  ام  لأ.. مسك هاتفه  ليتصل  بها


لكنه  اخذ  موضوع الملف  هذا... حجه... فقط  ليسمع  صوتها  ويتحدث  معها  ف  العمل


أتصل  ع  رقمها.... لكن... عمار  يسمع  رنين  هاتف  بقربه... نظر  حوله... وجده  هاتف  نورهان  زوجته


... 

        يتبع ف الفصل 18


الوجه الآخر ***للقمر 

الفصل الثامن عشر....... 


... كان  بجوارها 


مسك  الهاتف  بتعجب.... وجده  رقمه... صدم  لكنه  قال  لنفسه

(انا  اتلخبطت  بين  الاسمين  ولا  إيه) 


مسك  هاتفه  يرن مجدداً  ع  نورهان... لكن  قبل  أن  يرن  هاتف  نورهان.... تذكر  انه  لا  يملك  رقم  زوجته


دخل  الشك قلبه.... نظر  لها  وهيه نائمه.. وعاد  ينظر  للهاتف  ف  يده... رن  ع  رقم  نورهان  السكرتيرة 


عاد هاتف  زوجته  للرنين  ورقمه  يظهر  عليه... نهض واقفا  وهوه  يشتعل  غضبا.... فتح  رسائل الواتس 


ع  هاتف نورهان... و صدم  اكثر.... وجد  رسائله  للسكرتيره الجميله... لم  يفهم  شيئاً.. لم  يستوعب  بعد


خرج  يركض  وهوه  يعرج... الي  غرفتها... فتح  حقيبه  يدها  التي  كانت  ملقاه  ع  الفراش


وصدم  عندما  رأي  الملف.. ورأي  أيضا  ملابس  نورهان  السكرتيره..... هنا  ثأر   عمار... و


جن جنونه ... صرخ  فيها  وهوه  يركض  لمكتبه

(نورهاااااااااااااااااااااااااااااااان) 


فزعت  نورهان  وانقلبت من  ع  الاريكه... وقفت  ونظرت  بصدمه  للفراغ.... دخل  عمار  كالصاعقه... اقترب  منها


والملابس  والملف  ف  يده.... صرخ  فيها 

(اييييه  ده... ردي  عليا... هدوم  نورهان  بتعمل  ايه  ف  شنطتك... و الملف  ده  اللي  خدته  مني  بأيدها.. و... و  الرسايل  اللي  بيني  وبينها  و خطها  اللي  ف  تلفونك.... كل  ده  معناه  اييييييييييييه... انتي  وهيه  شخص  واحد  صح) 


كان  يصرخ  بها  صرخا... تلعثمت.... تجمد  الدم  ف  عروقها... لم  تعرف  ماذا  ستقول  له؟؟؟؟ 


صرخ  مجدداً 

(انطقييييي.... انتي  هيه... وهيه  انتي  صح.... ط  ليه... عملتي  كده  ليه... لبستي  ماسك  ع  وشك  المعفن  ده  عشان  إيه... كان  غرضك  ايه  من  عملتك  دي  يا  نورهان  هانم... انطقي  قبل  ما  اقتلك  وارميكي  من  هنا... انطقيييييييي) 


نورهان  نظرت  له  واحتلها  الغضب  بعد  التوتر... اقتربت  منه  وقالت  بغضب


(انا  معملتش  حاجة... انت  اللي  عملت  كل  حاجه... انت  اللي  اخترعت  شخصيه  نورهان  الجميله  مش  انا... انت  اللي  وقفت  ف  طريقي  يا  عمار.... انا  كنت  مع  صحباتي  ف  المطعم.... وحضرتك اللي  معرفتنيش... معرفتش  مراتك... بنت عمك.... افتكرتني واحده  تانيه... انا  بسبب  كلامك  القاسي  وعملتك  انت وابوك  وجدك  فيا... خلتني  اكمل  تمثيل  عليك... خلتني  عايزه  انتقم  منك  وارد  لك  ذلك  فيا  واهانتك ليا... انت  السبب... ايوا  انا  مثلت عليك... بس  عشان  اعلقك  بيا... بعدها  اسيبك  واكسر  قلبك... عشان  تحس   بالذل... عشان  تعرف  الإحساس ده.. وتعرف بيوجع اوي  إزاي) 


نورهان  نزعت  التنكر  وهيه  تحدثه.... كان  ينظر  لها  بصدمه وعدم  تصديق... أكملت  بوجع 


(دا  انا... دي  حقيقتي... انا مش  قبيحه  ولا  وحشه  يا  عمار... انا  شبهها... انا  شبه  الملعونه  اللي  دمرت  حياتي... كنت  كل  ما  ابص  لنفسي  ف  المرايا  كنت  اشوفها... انا  فعلاً  كنت  صغيره  بس  عمري  ما  نسيتها... عمري  ما  نسيت  شكلها  وهيه  بتتزين  لعشيقها  ف  غياب  ابويا..عمري  ما نسيت  شكله  وهوه  بيبص  لها  ويتغزل  فيها ... بس  كنت  بخاف... كنت  بترعب  اقول  لبابا  او  لابوك  او  جدي  ع  اي  حاجه

.... ايوا  يا  عمار  كنت  مرعوبه  منها  ومن  عشيقها.... عشان  كده  لما  كبرت  خبيت  الوش  القذر  ده ... بس  صاحبتي  الله يسامحها  هيه  اللي  اترجتني  اخلع  التنكر عشان  هبقا  محاميه  كبيره  وعندي  شركتي  الخاصه... مكنش  ينفع  اواجه الدنيا  بالوش  اللي  انت  دايما  بتعايرني  بيه  ده..... انا  كذبت.. غشيت... اتدعيت.... بس  كل  ده  انت  السبب  فيه  مش  انا... امي  ظلمتني... اتيتمت  من  صغري... خسرت  أخواتي... و بدل  ما  جدي  ياخدني  ف  حضنه  ويعوضني  الأهل  اللي  خسرتهم... رماني  ف  مدرسه داخلي... عشان  يخلص  من  خلقه  امي اللي  ف  وشي... انت  وأهلي  كلهم  ظلمتوني يا  عمار.. وانا... انا  ماليش  ذنب ف  حاجه) 


صرخ  عمار  بجنون

(ظلمناكي... احنا  اللي  ظلمناكي.... جدي اللي  خسر  ابنه  بابشع  طريقه  والناس  اللي  اتكلمت  علينا.. وقالت  عليكم  بنات حرام  كلكم... كنتي  عايزاه  يعمل  ايه يا  أبله... كنتي  عايزاه يربيكي  وسطهم  عشان العار  يفضل  راكبنا... تفتكري  لو  كنتي  كبرتي  وسطهم  كانوا  هيرحموكي... العار  والذل  كان  هيطاردك  طول  عمرك... جدي  بعدك  عن  عيونهم  وكلامهم  عشان  يحميكي.... وانتي... انتي  بعد  العمر  ده... رجعتي  غشاشه... لابسه لنا  وش  فوق وشك... لييييه... كنا  هنأكلك... ولا  فاكره  ان  خلقه  امك  دي  حد فاكرها ولا  حد  عايز  يفتكرها..... انا  الوحيد اللي اتظلم ف  حوارك.... اتجوزتك عشان ما  تفرطيش  ف  أرضنا  وتنتقمي  من  جدي.... اتجبرت  اتجوز  واحده  تقرف  عشان  ارضي  جدي  وابويا... وف  الآخر  تضحكي  عليا  و تكلميني  ع  انك  واحده  تانيه... و  تدخلي  بيتي  وشركتي  وحياتي... و كمان  عايزه  تذليني وتكسري  قلبي... لييييييه... كنت  أذيتك  ف إيه.... اي  راجل  مكاني  كان  هيكرهك  انتي  نفسك  كاره  نفسك... يبقا  انا  اتحملك  إزاي... اسمعي  يا  نورهان... انا  هعمل لك   اللي  انتي  عايزاه... انا  هطلقك... انا  مستحيل اكمل مع  واحده  زيك... بس  الكلام ده  بعد  ما  جدي  يكسب  العموديه... انا  مش  هقدر  ازعله  و اكسر  خاطره  وهوه  ف  السن  ده... بس  انا  مش عايز  اشوف  وشك  هنا  تاني... مش  جبتي  لنفسك بيت... اطلعي  من  بيتي  ومن  حياتي... وانا  اول ما  جدي  يبقا  عمده.... هطلقك... و  ده  اخر  كلام عندي... اطلعي بره يا  نورهان) 


نظرت  له  بخيبه آمل كبيره... لم  تتوقع  انه بهذه  القسوه... تلك  بكل  بساطه  يبرر  لجده  ما  فعله  بها


منذ  سنوات مضت.... لم يأبه  غير  لنفسه.. لم  يفكر  ف  مشاعرها  كأنسانه... فتاه  صغيره  بريئه  تري  امها تخون  ابيها.. و تخشي  ان تتفوه  بما تراه


فتاه  فقدت  أهلها  و  طفولتها.... فقدت  أخواتها  وبيتها  وحياتها.... وتم  وضعها  بين  اغراب  قساه القلوب


لم  يأبه  بما  مرت  به  وعانته  وهيه  وحيده... نورهان رفضت  ان  تخضع  للضعف  والبكاء


اخفضت  عيناها.. كانت  تحاول  الكلام... لكن  الدموع  تخنقها... شعرت  انها  اذا  قالت  كلمه واحده.. ستنهار  أمامه 


وهذا  آخر  ما  تريد... ان  تصبح  هشه  ضعيفه   حزينه.. مكسوره... خرجت من  المكتب... مرت  بجواره


رفعت  عيناها  المتلئلئه  بالدموع... ك قطع الزجاج.... تنظر له.... و خرجت ... دخلت  لغرفتها.... بدلت  ثيابها... وأخذت  حقيبه  


ثيابها... و خرجت... ظنت  للحظه  بأنه  سيوقفها... سيشعر  بأنه أخطأ  ف  حقها.... لكنه  لم  يكن  موجود


خرجت  نورهان  واغلقت  الباب  خلفها

عمار  كان  لايزال  واقفا  كالتمثال.... لم  يصدق  ما  حدث

ف  تلك  الدقائق الماضية...


انتفض  مكانه  عندما  اغلقت  الباب... استدار  ونظر  خلفه


عمار  لم  يأبه  بقدمه  المصابة... ركض  لمكتبه   وصرخ  بجنون  وهوه  يدمر  مكتبه  وكل ما  عليه... يدمر كل  ما  تراه  عيناه


وقف  أخيراً... ونظر  ليده  التي  جرحت  من  الفازات  الصينية... نظر  لقطرات  الدماء  وهيه  تسيل  ع  الأرض 


لكنه  لم  يكن  ينظر  بحق... عمار  شارد.. عقله  يؤنبه  بقسوة... لكنه  لا يريد  تقبل  العتاب... لا يريد  أن  يعترف


بأنه أخطأ  ف  حكمه  ع  زوجته... وانه  السبب  الأكبر  فيما  وصلت  له  حالها... جلس  ع  الأرض  بتعب 


وهوه  يلعن  ف  نفسه  وف  كبريائه  الذي  يمنعه  عن اللحاق بزوجته... و إعادتها  لبيته  وحياته 

***************************

أمام الكازينو 


سيف  خرج  من  سيارته  عندما  رأي نسرين  تركض  بسرعه... ركض خلفها... وصل  إليها... مسكها  من  ذراعها  بقوه


فزعت  منه  نظرت  له  بصدمه... قال  لها

(راحه  فين... بتجري  كده  ليه) 


نسرين  بسرعه (سبني... سبني  دلوقتي  يا  سيف... لازم ألحقه  قبل  ما  يهرب  مني) 


سيف  بسخريه(ينهار اسود... هيه  وصلت بيكي  للدرجة دي.. بتجري  ورا  الزبون... انتي  ايه  يا  شيخه) 


نسرين نظرت  له  بعتاب..فهمت  انه  لن  يتركها  تذهب. نظرت  للجهه  الأخري  من  الشارع... و  أشارت  لسيارة  ما زرقاء اللون.... إن  تلحق  بهذا  الرجل  ف  سيارته الحمراء... 


انطلقت  السيارة بسرعه ... سيف  نظر  لها  بأستغراب  ولم  يفهم  شيئاً مما  تفعله... قالت  له  وهيه  تشده  لسيارته


(تعالي... تعالي  ف  عربيتك بسرعه  وانا  أفهمك) 


نظر  لها  بعدم فهم... وسار  معها... ركبوا  السياره  قالت  له

(يلا  يا  سيف... بسرعه  ورا  العربيه  دي  وانا  هفهمك  ع كل حاجه ف الطريق) 


سيف  لم يتحرك... ضربت  مقود  السياره  بغضب  وصرخت  فيه

(يلاااااااااااااااااااا) 


انطلق  سيف  بالسيارة.... خلف  السيارات الأخري... سألها  بغضب


(ممكن  تتكلمي بقا..... اتفضلي  اشرحي لي  انتي  بتهببي  ايه  ومين  دول  و عايزاني  ألحقهم  لييييه) 


نسرين بصراخ 

(حااااسب... أقف هناك) 


#رؤيه_عامه_للأحداث


(ف  ساحه  خاليه  بداخل   شارع  جانبي... توقفت  السياره  الزرقاء.... أمام  السياره  الحمراء... تعيق  تقدمها...... ظهرت  سيارات  عديده  من  العدم... وقفت  أيضا  حول  السياره الحمراء........ خرج  من  السيارات ... رجال  يرتدون  سترات  واقيه... وقفوا  يشهرون  السلاح  تجاه  السياره  الحمراء... وينظرون  تجاه  نسرين  منتظرين  تحركها) 


توقف  سيف  فجأة... نسرين  لم  تشرح  له شيئاً ... فتحت باب السيارة  ونزلت  بسرعه... توجهت  للسياره الحمراء


وفتحت  بابها  بعنف... جذبت  رجل  من  ملابسه من  داخل السيارة.... وانزلته  ع  الأرض... 


تحرك  الرجال  من  السياره الزرقاء.... و اقتربوا  من  الحمراء 


ساعدوا  نسرين  ف  إنزال  الرجال  منها.. لكن  نسرين  أنزلت  طفل  لا  يتعدي ال13  عاماً  من  عمره


قربته  منها  وربتت  ع  شعره  بحنان... ذهبت  للرجل  الذي يبدو  عليه  انه  كبيرهم


مسكته  من  ياقه  قميصه... و هزته  بعنف.. وهيه تقول  بصراخ  وتهديد


(هوه  فين... هتأخد  العيل  ده  ع  فين... انطق  يا  ربيع... فين  خالد رحيم... انطق) 


ربيع  بتوتر(انتي  بتقولي ايه... انا  معرفش  حد بالإسم ده.. الواد  ده  انا  واخده  لشغل  وربنا) 


نسرين  ضربته  بالرأس  ع  أنفه... قالت  له  بغضب

(مش  عايز تتكلم.... انا  هخليك  تنطق  يا  حقير) 


أخرجت  من  فخذيها  مسدس صغير... وضعته  ع  جبهه  ربيع... صرخ  كالجبناء... وقال


(هقولك .. واللهي  هتكلم) 


مسكه  رجل  اخر  وقال  بتهديد  وهوه  يجره  لسيارته 

(لأ  انت  هتودينا  لحد عنده) 


قال  أخر  لنسرين 

(هتيجي  معانا ... شنطتك  ف  عربيه  ياسين) 


نسرين (لأ  انا  هأجي  وراكم  بالعربيه  دي... هات  شنطتي  يا  ياسين) 


أشارت ع سياره  سيف... قذف  لها  ياسين  شنطه  سفر  سودا  صغيره... ألتقطتها  و نظرت  لسيف... الذي  كان  يشاهد


كل  هذا  ولم  يفهم  منه  شئ.... جذبته  من  يده... سار  معها  وهوه ينظر  لها  بصدمه... ركبت  السياره.. كان


لايزال  يقف  ف  الشارع... أشارت له  ان  يصعد  للسياره... نظر  لها  بغضب... و  صعد


أستدار  إليها... قالت له

(يلا  اطلع  وراهم) 


سيف  بغضب(مش  هتحرك  من  هنا.. ولا  انتي  هتروحي  لأي مكان  تاني  غير  اما  اعرف  الحقيقه  واللي  حصل دلوقتي ده  معناه ايه) 


نظرت  له  وقالت  بعصبيه

(هقولك  ع كل حاجه  بجد.... بس  اطلع  يا  سيف  ما  تضيعش  تعب  الشهور  عشان  انت  مش  فاهم  حاجه) 


قفزت  للخلف  وأخذت  حقيبتها... سيف  نظر لها... صرخت  به

(يلا  أتحرك  بقا) 


سيف  زفر  بأختناق... و انطلق  بالسياره  خلف  السيارات  الأخري..... لكنه  كان  ينظر  ف المرآه 


نسرين  نزعت  الفستان  الفاضح....كانت  شبه عاريه... رأت  سيف  ينظر  لها  ف المرآه... ضربته  ع  ظهره


اخفض  عيناه  مجبر.. عاد  ينظر  لها... ارتدت  ملابس  جلديه... ورفعت  شعرها  ف  كعكه ... و أخرجت  مسدس  ميري


برق  لها  سيف... عادت  تجلس  بجواره... نظر  لها  وهوه  يقود... منتظر  منها  ان  تبدأ... نظرت  له  وفهمت  انه  مل  الإنتظار... قالت


(سيف... انا  هقولك  ع الحقيقه... انا  الرائد  نسرين  ..... انا  ظابط  متخفي..... انا  مش  ركلام  يا  سيف... انا  بعمل  كده  عشان  اقبض  ع  اكبر  رؤوس العصابات..... والراجل  اللي  احنا  رايحين نقبض  عليه  ده  أقذر  راجل ممكن  تسمع  عنه.... دا  راجل  غني.. لكنه  حقير  بكل  معني  الكلمه... بيخلي  ربيع  الكلب  ده  يجيب له  شباب  صغير  عشان  يغتصبهم... راجل  سادي  شاذ..... طول  الشهر  بيبقا  مسافر.... و كل  ما  ينزل  مصر  بيبعت  ربيع   لكازينو  من  دول ... و يخليه  يجيب  له  الصبيان  ... ربيع  بيأخدهم  بحجه  الشغل... و الأطفال  البريئه  بيصدقوه  ويروحوا  معاه... بيأخدهم   من  الكازينو... لان اللي  بيجيب  له  الصبيان  دول... القواد  الحقير  مدحت  البلطجي  اللي  ف  الكازينو... وده  خلاص  اتقبض  عليه.... فاضل  خالد رحيم  بس... محدش  عارف يمسكه  ولا  حتي  حد  عارف  شكله... الصبيان  اللي  لقيناهم  عايشين  بعد  ما  اغتصبهم  ورماهم.... وصفوا  شكله  وبيته... لكنهم  ما  يعرفوش عنوانه... انا  اتحريت  عنه  ف  كذا  كازينو... وعرفت  انه  هيكون  هنا النهارده... لكن  للأسف  بعت  ربيع  مكانه..... ف  إحنا  هنروح  نقبض عليه دلوقتي أن شاء الله  وتخلص  المهمه  دي  و  نلحق  أطفال  تانيه  من  الخطف  والاغتصاب  والقتل   يا  سيف... فهمت  بقا) 


سيف  شعر  انه  طعن  بخنجر  بارد.... نظر لها  ولم  يعرف  ما  يقول.... او  كيف  يرد  ع  كلامها  هذا


لكنه  تكلم  أخيراً 

(يعني  انتي  لما  خدتي  عربيتي  وهربتي  مني... كان  عشان  تلحقي  الراجل  ده) 


نسرين (مش  بس  كده  كان  لازم  اروح  للواء  بتاعي  اشرح  له  انا  كنت  مختفيه  فين) 


سيف  (يعني  بلغتي  عني... قلتي  لهم  اني خطفتك   واتجوزتك  غصب عنك) 


اخفضت  عيناها  وقالت  بهدوء(لأ) 


سيف  بأستغراب(ليه... ما  بلغتيش  عني  ليه... ما  قبضتيش  عليا  ليه  يا  نسرين) 


نسرين(انت  عايز ايه يا سيف) 


سيف(عايز  اعرف  انتي  بتكرهيني  ليه... كنتي  بتبعديني  عنك  بالقسوه دي ليه  يا  نسرين) 


نسرين(عشان  شغلي  يا  سيف... ما  ينفعش  اتورط  ف  علاقه  واسيب  شغلي... انا  عايشه  لهدف واحد  بس  ف  حياتي... وهوه  الشغل... الشغل  اللي  هيوصلني  لواحد  ف  إيده  كل  حياتي) 


سيف  بعدم فهم(مش  فاهم  قصدك  ايه.. مين  ده  بالظبط) 


نسرين بحزن(مش هتفهم  حاجه دلوقتي.... لما  يجي  وقتها   هبقا  أعرفك) 


نظرت  أمامها... سيف  أراد  أن  يصارحها  بالحقيقه  هوه  وايضا... يريد  أن  يخبرها  لما  كان  يلاحقها... لكنه


ايضا  يريدها  ان  ترحل معه... قال  لها  بعد  أن  مل  من  التردد


(نسرين  انا عايزك  تيجي  معايا.... انا  مسافر  لبنان  ف  شغل... عايزك  معايا  يا  نسرين.... تعالي  واعتبريها  اجازه  من  الشغل.... إيه رأيك) 


نظرت  له  طويلا... ظن  انها  سترفض... لكنها  صرخت  فجأه 


(ااقف... أقف  عندك  هنا) 


نظر  سيف  وجد  السيارات  توقفت  أمام  فيلا  فخمه.... لكنه  صدم  من  الحرس  اللذين  اشهروا  السلاح


وبدأوا  بإطلاق  النيران  ع  سيارات  الشرطه.... نسرين  اخفضت  رأس  سيف... وقالت  له


(امشي من  هنا  حالا  قبل  ما  تتأذي... انا هنزل  وانت  بسرعه  لف  وارجع) 


سيف  بجديه (انتي  مجنونه  عايزاني  اهرب  واسيب  مراتي) 


نظرت  له  غير  مصدقه... لكنها  قالت  له بحزم

(خليك  مستخبي... اوعي  ترفع  دماغك) 


لم  تنتظر  رده... فتحت  باب  السياره  وهيه  منخفضه... ونزلت  منها... سارت  وهيه  تتفادي  الرصاص


وقفت  بجوار  زميل  لها.. و تبادلت  إطلاق  النار  معهم  ضد  الحرس... اللذين  يطلقون  عليهم  من  أسلحة  آليه 


سيف  كان  يختلس  النظر  ليطمئن  عليها... لكنه  فوجئ  بالحرس  يخرجون  من  مواقعهم  لينقضوا  ع  الضباط


المختبئين.... سيف  اطلق  زامور  سيارته.. لينبههم... لكنهم  لم  يفهموا... سيف  دون  تردد  او  تفكير  ف  حياته


أدار  سيارته... ع  أقصي  سرعه... وانطلق  بها  كالمجنون  تجاه  بوابه الفيلا  الحديد.... سياره  سيف  من  نوعيه  الهامر  الغاليه  القويه


صدمت  السياره  البوابه  الحديد... قطعت  السلاسل  الحديديه... وفتحت  البوابه.... دهس  أيضا ع  بعض  الحرس  ف  طريقه 


الحرس  تركوا  الشرطه  واطلقوا  عليه  هوه  وهوه  يدخل  الفيلا  بسيارته... هنا  نهضت  عناصر  الشرطه


وأولهم  نسرين.. التي  ركضت  دون  الخوف  ع  نفسها  من  الحرس.... ركضت  خلف سياره  سيف


وكانت تطلق  النيران  ع  الحرس... تبعها  زملائها.... وقتلوا  الحرس... و دخلوا  الفيلا.. انقضوا ع  كل  الرجال  الآخرين 


نسرين  ركضت  لسياره   زوجها.... كان  غارقا  ف  الدماء..... صرخت  فيه


(سييييييييييييييييييييف) 


نظرت  لزملائها  اللذين  يقتحمون  الفيلا... عادت   تنظر  لزوجها.... كان  اختيار  صعب  بالنسبه  لها


ان  تنقذ  سيف  وتخرجه  من  هنا.. ام  تتركه  وتذهب  لتكمل  مهمتها... لكن  سيف  وفر  عليها  عناء  التفكير 


رأته يتحرك.... هزها  لتفيق   من  صدمتها.... قال  لها  بتعب

(انا  كويس... روحي  ورا  صحابك.... انزلي  يا  نسرين  هما  محتاجينك... ما  تخافيش  عليا  يا  حبيبتي) 


ابتسم   لها  بضعف... نسرين  نظرت  له  و دموعها  سالت  ع  خدها... فتحت  باب  السيارة... و همت  بالخروج 


لكنها  لم  تستطع... اغلقت  الباب  بقوه..... ونظرت له.. وقالت

(تولع  المهمه... مش  هسيبك  تموت) 


اقتربت منه  و  حركته  ببطء.. تحرك  معها... لكنه  صرخ  من  الألم... اعتذرت  له... و حركته  من  ع  كرسي  السائق


جلست  مكانه... و انطلقت  بسرعه   بالسيارة... خرجت  من  الفيلا... وطارت  ع  الطريق...... لكن  فجأه 


سيف  مسك  يدها... نظرت  له  والدموع  تعيق  الرؤيه  لعيناها... قال  لها  وهوه  يلتقط  أنفاسه  بصعوبة 


(اقفي... اقفي  يا  نسرين) 


توقفت  بسرعه  ونظرت  ع  مكان  الجرح.... كان  بالقرب  من  القلب... واخر  ف  طرف  الرقبه... و آخر  ف  الذراع 


قال  لها  وهوه  يبتسم  بضعف  ووهن

(انتي جميله اوي  يا  نسرين...... انا... انا  آسف  اني  شكيت  فيكي  وظلمتك... انتي  إنسانه... إنسانه  عظيمه... مش  زيي... انتي  كتير  عليا  اوي.... انا... انا  ما  استحقش واحده  زيك... آآآآآآه) 


نسرين  ببكاء(اسكت  يا سيف  ما  تتكلمش تاني  والنبي  انا  هأخدك  ع  المستشفى... ما تخافش  يا  سيف... أجمد  والنبي) 


سيف  بصوت  ضعيف  متقاطع

(لأ... انا  هموت  دلوقتي... عايز  اموت  بين  ايديكي... عايز  عينك  تبقا  اخر  عيون  اشوفها... نسرين  لازم  تعرفي  الحقيقه... لازم  اقولك  كنت  بطاردك  ليه) 


نسرين(مش مهم) 


قاطعها  بتعب.. وصوت  متقطع 

(لأ  مهم... نسرين  انا  سيف الأنصاري... سيف  اللي  انقذتيه زمان  ف  روسيا... انا.. انا  بحبك  يا  نسرين... عايز  منك  خدمه واحده  بس... عايزك  تدعيلي  ربنا يسامحني... انا هموت  وابويا غضبان  عليا  يا  نسرين... زعقت  له... اخر  كلامي  مع  ابويا  كان  زعيقي  ليه... انا  خايف  اقابل  ربنا  بسبب  غضب ابويا  عليا... قوليلوا يسامحني يا  نسرين... كان غصب عني... بس  هوه  عمره  ما  حبني... طول  عمره  شايفني  ضعيف... فاشل.....نسرين قوليلوا  ما  يزعلش  مني.... محدش  بيحبني  يا  نسرين... كان  نفسي  انتي  تحبيني... دورت  عليكي  سنين  طويله  عشان  ألقي  الحب  معاكي... انا  تعبان... والموت   هديه  ربنا  ليا... اللي  زيي  ما  يستحقش يعيش  يا  نسرين... انا... انا  نكره  وسط  أهلي... و بالنسبة لك انتي  كمان... انا... انا ... كان  نفسي أفرح يا  نسرين... كان  نفسي اخدك  ف حضني... واحس  بالحب  و الحنيه... كان  نفسي  اتحب  يا  نسرين... بس  خلاص... كل حاجه  أنتهت.... زي  عمري اللي  أنتهي... نس...........) 


سيف  لم  يكمل  إسمها  ع  لسانه.... عيناه  تجمدت  فجأه... صوت  شهيق  خرج  من  حنجرته... و  هدأ  تماما


نسرين كانت  تكتم  الدماء  التي  تخرج  من  رقبته بغزاره... نظرت  له... هزته.. لم  يتحرك... هزته  بقوه... قالت  بغضب


(كمل... كمل  عايز  تقولي  إيه... كمل  يا  سيف.... سيف  والنبي  اتكلم... سيف  انا  عارفه  انت  مين... سيف  انا  عمري  ما  نسيتك... عشان  كده كنت  بكرهك  فيا... سيف  قوم  وانا  هقولك ع الحقيقه.... سيف  والنبي  انا  آسفه  بس  ما تعملش  فيا  كده... قوم  يا  سيف... قوووووووم.... اتكلم  بقاااااا ااا.... سييييييييييييييييييييييبببف) 


ضربت  رأسها  بمقود  السياره  وهيه  تصرخ  بأسمه  بجنون..... لم  تحتمل  ان  تخسره


نظرت  له... وضعت  رأسه  ع  قدمها... و انطلقت  بالسياره... لاقرب مشفي... لكن  مر وقت  طويل... سيف


كان ينزف  بغزاره  من  كل  جروحه... وصلت  لمشفي  ع الطريق  العام... اقتحمت المشفي  بالسياره 


توقفت  أمام  البوابه الزجاجيه... نزلت  وهيه  تصرخ 

(حد  يساعدنييييييي... جوزي  بيمووووت) 


نسرين  شدته  من  قدمه... حملته ع  ظهرها... لكن  الترولي  وصل  مع  الأطباء  والممرضين


ركضت  بجوارهم.... لكن  نسرين... لاحظت  وجود  صحافه.. ورأت  بطرف  عيناها


بعض  من  اصدقاؤها   ملقون  ع  ترولات  أخري... ومعظم  اجسادهم  مشوهه.... نظرت  لهم  بفزع... لكنها  عادت  تركض  خلف  زوجها 


وقفت  أمام  غرفه  العمليات  وهيه  ترتجف... ظهر  زملائها من  العمل... حتي  اللواء  اسامه  المسؤول  عنها وعن  وحدتها


الصحافه  حاصرتهم  من  كل مكان... لكن  أصدقاء نسرين  حاولوا  اخفائها عن  عيون  الكاميرات  الفضوليه 


فجأه خرج  الطبيب.... نسرين  تجاهلت  الصحافه  وكل  من  حولها.. وركضت  إلي  الطبيب... لكنه  كان  عابس  الوجه


نظرت  له  بخوف... قالت  بلعثمه 

(سيف... سيف  عامل  إيه... جوزي  كويس  صح.. انا  عارفه  هتقولي  إيه... نزف  كتير  ومحتاج  راحه... كده ولا كده  إحنا  مسافرين  لبنان... آه  يا  دكتور... هنسافر  ف  شغل.. و  هنقضي  شهر العسل بالمره... ايوا  سيف  وعدني... وعدني  بالرحله  دي.. و.. و  سيف  مستحيل يرجع  ف  كلمته  ابدا... هوه  وعدنيييييييي... انطق  يا  دكتور... سيف  فيبييييييين) 


الطبيب بأختصار

(انا آسف... البقيه ف حياتك) 


نسرين  تنظر  للطبيب  بفزع... اصدقاؤها  يحاولون  تهدئتها... زميلتها  تهزها  بعنف  لتتحدث 


تضربها  ع وجهها... ونسرين  لا  تتحرك  تنظر  للفراغ  بعينان  شاردتان


الصحافه  تحاصر   الطبيب  لتعرف  من هوه  الضحيه  الأخيره  ف  حادثه  فيلا  رحيم


اللواء  يصرخ  ف  الصحافين... و ينادي  الأطباء  بعنف  ليتابعوا عملهم  بأنقاذ  رجاله


نسرين  أخيراً  انفجرت.... و صرخت  بهستريا... دفعت  كل  من يقف  ف طريقها.... و اقتحمت  غرفه  العمليات  وهيه  تناديه  بحرقه... بشوق... بأمل


لكن  فات الأوان... وسيف  أصبح ف  خبر  كان... تم  نقل  جثمانه  للتشريح 


الأطباء  تجمعوا  حولها  مع  اصدقائها... و اعطوها  حقنه  مهدئه... لم  تؤثر  فيها  فورا... كانت  تصرخ  بأسمه بجنون


وتبحث  بعيناها  عنه.... لكنه  غير  موجود ... الأطباء  اعطوها  مخدر  أقوي... انهارت  نسرين  بين


أيديهم... لم  تعرف  أين هيه؟؟؟ او  ماذا  يحدث  معها؟؟؟ لم  تذكر  إلا  تلك  اللحظات  الأخيره  معه... لم  تري  سوي  وجهه  أمامها.. لم  تسمع  إلا  صوته


وهوه  يقول  لها

(كان نفسي  اخدك  في حضني..... كان  نفسي  اتحب) 


لم  تشعر  بالعالم  حولها  بعد  الان... استسلمت  لفقدان الوعي... عله  يرحم  قلبها  الذي  يود  الانفجار  لتنتهي معاناته


         يتبع ف الفصل 19و20

تعليقات