القائمة الرئيسية

الصفحات

رواية الوجه الآخر للقمر الفصل الخامس عشر والسادس عشر

حصرين ع موقع المجد للقصص والحكايات 

حصرين ع موقع المجد للقصص والحكايات    فريده احمد فريد  الوجه الآخر للقمر  الفصل الخامس عشر و السادس عشر


 فريده احمد فريد

الوجه الآخر للقمر

الفصل الخامس عشر و السادس عشر


#لقطات_سريعه

ف  فيلا أكتوبر


ماهيتاب  تسير  ع  حبل  وضعته  أرضا... و تحمل  بعض  الكتب  ع  رأسها  وتسير  بخفه  ورشاقه  ع  الحبل


سارت  عليه  ذهابا وايابا...نور  نظرت  لمحمود  وهيه  تبتسم... محمود هز  رأسه  معتابا


وقفت  ماهي  أمام  نور... و أشارت  إليها  تقلدها... نور  وقفت  ووضعت  الكتب  ع  رأسها 


وسارت  ع  الحبل.... تمايلت  يمينا ويسارا... و  سقطت  أخيراً... انفجر  محمود  ف  الضحك

ركضت  ماهي  إليها... وقفت  ونظرت  له  بغضب..... 


ع  مائده  الطعام.... ماهي  تضع  الطعام  ف  فمها  وتمضغه  ببطء  و نعومه.. وهيه تغلق  فمها


نظرت  لها  نور  بمقت... لم  يعجبها  الأمر... محمود  أشار  لها  أن  تقلد  ماهي.... نظرت  له  ببرود


ووضعت  الطعام  ف  فمها  وأكلت  بشراهه... محمود  وماهي  نظروا  لبعضهم  بآسف


ف  غرفه الجلوس.... ماهي  سارت  من  آخر  الردهه  الي  الكرسي  برشاقه  وجلست  عليه  وضمت  قدمها


وقفت  واشارت  لنور  ان  تقلدها... نور  نظرت  لها  ببرود... وسارت  بخطي  واسعه  كالعساكر... و جلست  بأهمال  ع  الكرسي


ماهي زفرت  بضيق  وهيه  تنظر  لمحمود.... 


ماهي  تتحدث  لمحمود  بدون  أن  ترفع صوتها... و  تتحدث  بلباقه  عن  حاله  الطقس 


ابتعدت  عن  محمود  واشارت  لنور  ان  تقلدها.... لكن  نور  اقتربت  منه ... حاولت  تتحدث  بصوت  منخفض.. وفيه  انوثه.... لكنها  فشلت


ماهي  صرخت  ف  محمود

(كفايه  يا  مستر  محمود... بجد  كفايه... دي  مفيش  منها  امل... انا  آسفه  لحضرتك  بس... بس  انا  همشي... شوف  لك  واحده  غيري... انا  آسفه) 


نور  نظرت  لها  ببرود  وهيه  تغادر ... قالت  لمحمود


(مالها  دي... راحه  فين  يا  أبله... تعالي  بس  أقولك) 


محمود  مسك  يد  نور  بعنف  وهزها  بقوه  وهوه  يقول


(انتي  إيه... واخده  كل  حاجه  هزار... فاكره  ان  الموضوع  ده  لعبه.... دي  حياتي... دا  مستقبلي  يا  نور... انا  خلاص  اتدبست  فيكي  واتجوزتك... لو  مكنش  ليكي  مزاج  من  الأول  كنتي  قلتي  لي... وانا  كنت  اشتريت  واحده   تمثل  الدور  وخلاص... إنما  تضيعي  وقتي  وتحرقي  دمي  لييييه.... انا  قرفت  منك) 


ترك  يدها  بعنف... وخرج  من  الفيلا.... نور  اقتربت  من  المرآه المعلقه  وهيه  حزينه 


نظرت  لنفسها  ف  المرآه... لم  تري  سوي  رجل... رجل  فقط... لا وجود  لامرأه  داخلها


كانت  ع  نفس  حالها  لم  تبدل  ثيابها  او  تنزع  الشعر  والعدسات  و الحواجب  الرجاليه 


هربت  دمعه  شارده  من  عيناها.... شعرت  بأنقباض  ف  قلبها..... آلمتها  معدتها... لم  تعرف  لم  هذا  الشعور  الرهيب  بالحزن 


نظرت  ع  مخرج  الفيلا... وقالت  بصوت عالي 

(انا  آسف أوي  يا محمود.... مكنتش  عايز  أزعلك... انا  بس... انا  مش  عارف  اتصرف  زي  البنات... انا  مش  عارف  وربنا... انا  مش  بستعبط  عليك... انا  عايز  أساعدك... لو  طلبت  نور  عيني  مش  هتأخر  عليك... بس  انا  كاره  نفسي... كارهه  أوي ... و  خايف... خايف  ابقي  ست... مش  عارف  ممكن  اعمل  إيه... انا  آسف  أوي) 


سقطت  ع  ركبتها... و  انهمرت  دموعها  بحرقه... لكنها  فوجئت  بيد  ع  كتفها... نظرت  لأعلي


وجدته  محمود.... مسك  يدها  اوقفها  ع  قدمها... مسح  دموعها  وقال  بصدق


(انا  اللي  اسف  اني  انفعلت  عليكي... انا  عارف  انكي  بتحاولي.... وعارف  انه  صعب... بس  خلاص... انا  اللي  هعلمك  من  هنا  ورايح...) 


نور بصدمه(انت... حضرتك اقصد) 


محمود  بضحك (آه  حضرتي... بس  عايز  أحذرك... انا  معلم  ممتاز... ولما  احب  اعلم  حد... لازم  ينجح  بأمتياز... فاهم  يا  نور... ولا  اقول  فاهمه  يا  نور  الهدي) 


ابتسمت له  بخجل... ضحك  كثيرآ... وقال  بسعادة 

(دي  اول  نقطه  ليا... اهوه  دا  الكلام... دا  خجل  البنات... و دا  اللي هنعمله ... هنشتغل  ع  الحاجات  البسيطه  الأول  ايه  رأيك) 


عادت  تبتسم  بخجل  وسعاده  اؤمت  له  موافقه... ربت  ع  كتفها... و دفعها  أمامه  للداخل

*******************

#لقطات_سريعه

ف الجزيرة....... 


سيف  يتجاهل  نسرين  متعمدا... يجلس  وحده  طوال الوقت  تقريباً.... كلما اقتربت  منه ... كان  يتركها  ويذهب بعيدا 


نسرين  تسير  بغير  هدي  بين  الأشجار... رأت  سيف  وهوه  يحاول  ان  يصطاد  السمك  لكنه  لم  يفلح 


ف  غرفه  سيف .. كان  يهيم  بالغرفه  ذهابا وايابا.... 

نسرين   تجلس  أمام  النار  وهيه  شارده


فجأه  سمعت صوت  ... وقفت  نسرين  بسرعه  ونظرت  ع  اليخت  الذي  يقترب


وقف  بعيد  عن  الجزيرة.... و ظهر  قارب  مطاطي ... و عليه  خمس  رجال... لكنهم  لم  يكونوا  اي  رجال


كانت  البنادق  والاسلحه الثقيله  ع  اكتافهم... نسرين  فهمت  فورا  ما  هيه  هؤلاء الرجال


ركضت  بكل  قوتها  للبيت... صدمت  بسيف  ف  وجهها... قالت  له  بهلع


(سيف  سمعت  ده... ف... ف) 


هدأها  سيف  وقال  وهوه  يخرج من  الببت

(أهدي بس  ف  إيه... هخرج  اشوف مين اللي جه) 


مسكت  يده  بقوه.... قبل  أن  يخرج  استدار  ونظر  لها... قالت  له  بجديه


(دول  تجار  سلاح.. او  ممنوعات... معاهم  رشاشات  آليه... انا  شفتها  كويس... سيف... الناس  دي  لو  شفونا  دلوقتي... هيقتلونا) 


سيف  برق  بعينه  غير  مستوعب... قال  لها

(تجار سلاح  ولا  ممنوعات.... وانتي  خمنتي  ده  ازاي  يعني... ما  يمكن  صيادين  وخلاص  ومعاهم  سلاحهم... وبعدين  ما  هما  هيشوفوا  النار... و هيعرفوا  ان  ف  حد  هنا.... فكك  شويه  بقا  و سبيني  اطلع  اشوف  الناس) 


شد  يده  من  يدها  بقوه... و خرج  يقابل  الناس.... نسرين  ضربت  الأرض  تحت  قدمها  بقوه  وغضب 


خرجت  خلفه.... رأت  رجال  ضخام القامه  و معهم أسلحة  ناريه  متعددة  الاحجام.... كانوا  ينظرون  لسيف  بصدمه


سيف  قال  لهم

(نعم.... انتوا  مين  وجاين  هنا  ليه) 


تقدم  احد  الرجال  ورفع  السلاح  ف  وجه  سيف... هنا  سيف  تأكد  من  كلام  نسرين


نظر  الرجل  خلف  سيف  ورأي  نسرين  وهيه  تقف  شبه  عاريه... ترتدي  قميص   سيف... و  لا  ترتدي  غيره


نظر  لها  الرجل   بأفتراس...... سيف  رأي  نظره  الرجل  لنسرين... اقترب  منها  ووضعها  خلف  ظهره  وقال  بغضب  للرجل


(خد  رجالتك  وامشي  من  هنا.... انا  ومراتي  ف  شهر العسل... اتفضل  بالذوق  من  غير  مشاكل كده) 


سيف  نظر  لنسرين  و دفعها  للبيت... نسرين  فهمت  قصده... و  كانت  تدخل  البيت  لكن الرجل  ضحك


بصوت عالي  وسخريه... قال  لسيف

(شهر العسل... يا  قلب أمك  يا  نوغه... اسمع  ياض... كده ولا  كده  انتوا الاتنين  مش  طالع  عليكوا  نهار تاني... بس  انت  ف  داهيه... إنما  الفرس  ده... خساره  يموت  بسهولة كده) 


دفع  الرجل  سيف  بقوه  ف  صدره... و  اقترب  من  نسرين  وف  عيناه  شر  لا  يوصف


سيف  صرخ  فيه  وركض  خلفه... لكنه  تلقي  ضربات  متتالية  من  الاربع رجال... نسرين  رأت الموقف  وصرخت


(سيييييييييييييييف) 

****************************

ف شقه عمار


صدمت  بعمار  يقف  ع  باب  المكتب.. نظر  لها  بشك... وقال 

(انتي بتعملي  ايه  عندك)


نورهان  وقفت  مصدومة  لكنها  وجدت  الحل .. قالت بأبسامه  مزيفه


(هكون بعمل ايه  يا  عمار... بكمل  الملف  عشان  ارجع الشغل) 


عمار  نظر ف غرفه  مكتبه  بشك... وقال لها  بحيره

(اومال نورهان  فين) 


اقتربت  منه  وهيه  تسعل  بحرج... قالت

(نزلت  الصيدلية... اضطرت  تنزل  بسرعه  الصراحه) 


عمار(يعني إيه... نزلت الصيدليه  ليه  وبسرعه  ليه  مش فاهم منك حاجه) 


نورهان  بحرج  مزيف

(ايه يا  عمار  بقولك  اضطرت  تنزل  لما  جيت اشوفها  كانت  محتاسه  ف  قلت  لها  تنزل  هيه  وانا  هكمل  طباعه  الملف) 


نظر  لها و  ضاقت  عيناه  بنظره  غضب... صرخت فيه


(ايه يا  عمار... جاتلها  العاده  الشهريه  فهمت  بقا... اضطرت  تنزل  الصيدلية  تجيب  لها  حاجه... ف  إيه  ما  تفهم  بقا) 


عمار  شعر  بحرج  رهيب... سعل  هوه  الآخر... و  قال  يغير الموضوع 


(احم.. ماشي  خلاص  فهمت... طيب  انت  خلصتي  ولا  عايزه  مساعده) 


نورهان  بضحك  وتوتر

(مساعده ... ع  أساس  انك  انت  السكرتير... ولا  فاكرني  فاشله  يا  أستاذ) 


عمار  فجأة  شد  يدها ... جعلها  ترتطم  بصدره... نظرت  له  بصدمه... تلاقت  أعينهم... عمار  وضع  يده  ع  خدها


الناعم... وقال  بهمس

(انتي  جميله اوي  يا  نورهان) 


اقترب  من  شفتاها... و  طبع  قبله  خفيفه  عليها... عاد  بوجه  للخلف  ليري  رده فعلها... لكنها  كانت كالتمثال


كانت  تنظر  له  بصدمه... عمار  سند  ع  مكتبه  و  جلس  عليه... ضحك  ببراءه  لا  تليق  عليه... قال  لها


(اول مره) 


هزت  رأسها  ببلاهه... ضحك  وقال

(انا  آسف... مكنتش  فاكر  انك  بريئه  اوي  كده... معلش  ما  تزعليش  مني  كان  غصب  عني... ضعفت  أدام جمالك) 


نورهان  تمالكت  اعصابها  بصعوبة... سعلت  و جلست  ع  المكتب  دون  أن  تنظر  اليه ثانيه


عمار  ظل  يراقبها  بصمت.... انهت  الطباعه... ووضعت  الأوراق  ف  ملف  ووقفت  أمام  عمار  وقالت  كأن شيئاً لم  يحدث 


(انا  خلصت  عايزني  اوديه  لمين  واقوله  إيه) 


فهم  عمار  انها  تريد  الرحيل .... او  الهرب  منه  بمعني أصح... هز رأسه  وقال


(هكتب لك  التفاصيل  ف  رساله...) 


نورهان(طب  ما  تقولي .. ما  انا  واقفه  ادامك) 


عمار(لأ  انتي  عايزه  تمشي... روحي  يا  نورهان... وانا  هبعت  لك  عنوان   الموقع  اللي  عايزك  تروحي  فيه ... يلا  أنزلي) 


نورهان(انا  ممكن  استني  لما  مراتك  تيجي) 


عمار(لأ  ما  تقلقيش  عليا.... بس.. انتي  عرفتي  منين  انها  مراتي) 


نورهان (هيه  قالت  لي) 


عمار  بضيق(انا  آسف طبعا  اني  ما قولتلكيش  عليها  قبل كده) 


نورهان(عادي ولا يهمك... انا  همشي  و انتي  اكتب لي  العنوان  ع  الواتس ... سلام....) 


خرجت  نورهان.... بعد ان   اخذت  حقيبه  يدها  من  ع  المكتب.... خرجت  من  غرفه  المكتب  لكنها  توجهت


ع  غرفتها.... اخذت   مساحيق  التجميل  خاصتها...والملابس الأولي   ووضعهم  ف  الحقيبه وخرجت  بسرعه... فوجئت  به  مره  اخري  ف  الصاله


قالت  بسرعه  

(معلش  دخلت  اظبط  هدومي  بس... آسفه) 


أبتسم  لها... ردت  له  البسمه... و توجهت  للباب  و خرجت  منه... ركضت  الي  الاسانسير 


فتحته  ودخلت  إليه... وضعت  وجهها  الصناعي... و  ارتدت  الملابس  الأولي... و خرجت  من  الاسانسير


وجدت  الباب  مفتوح... دخلت.. وراته  يجلس  ف  الصاله... سألته  بقلق  مزيف


(انت  كويس.... انا  قابلت  السكرتيرة  بتاعتك  ع  السلم... انتوا  خلصتوا  شغلكم) 


عمار  بتهكم (مالكيش فيه... خلصنا  ولا  اتقندلنا... روحي اعملي  لي  قهوه  تاني) 


انفجرت  فيه(عمار  انا  مش  خدامه  عندك... انا  عارفه  انك  قليل الذوق... بس  راعي  اني  سايبه  كل  اللي  ورايا  و ادامي  عشان  اكون  جمبك.... ف  بلاش  لسانك الطويل  ده  عليا... مش  عايز  تشكرني .. ما  تهزقنيش... ممكن  ولا  تحب  انزل  وارجع لك  السكرتيرة  الغندوره  بتاعتك... ما  كلكم  كده.... صنف الرجاله  كلهم كده  بتوع  مظاهر  وبس... المهم  الشكل  اللي  ادامهم... إنما  الواحده  كويسه  ولا  لأ  مش  فارقه  معاكم  صح.... انا  هعملك  قهوتك  وماشيه... ايه  اللي  جابرني  اقعد  اتحمل  اسلوبك  الزفت  ده  معايا... انا  قرفت) 


بكت  رغما  عنها... لكنها  ركضت  للمطبخ... خافت  ان  تسقط  العدسات اللاصقة  من  عيناها  أمامه 

******************

#لقطات_سريعه

ف  فيلا أكتوبر


نور  تسير  بخطي  واسعه  ع  الحبل.... محمود  ينهض  ويضرب  قدمها بيده... تنظر  له  بضيق... و  تقرب  قدمها  من  بعضهم... ف  تسير  بخطي  بطيئه


ع  طاوله الطعام... تأكل  بنهم  كعادتها  طوال  السنوات الماضية.... لكن  محمود  يخطف  الملعقه من  يدها  ويمسكها


بشكل  صحيح.. ويضع  الطعام  القليل  ف  فمه  و يمضغه  بأسلوب  راقي.... تنظر  له  نور  بغضب 

لكنها  تحاول  تقليده...


يشير  محمود  بيده  وهوه  يتحدث.. و يطلب  منها  ان  تقلده  ف  الحديث  بطريقته

ضحكت  ع  اسلوبه... ضربها  ع  كف يدها


غضبت  منه  لكنها  حاولت أن   تتحدث  مثله


كان  يحاول  بأستماته  ان  يعلمها  أداب الطعام  والحديث... و السير  بطريقه النساء.... لكن  نور  كانت  تتعلم  بصعوبة


محمود  شعر  بالتعب  من  محاولاته  تغيرها.... يآس  منها  تقريباً  وفكر  جديا  ف  تغيرها.... اقترب  منها  وقال


(انا  خارج  شويه  يا  نور.. انا  أعصابي  تعبت.... بس  خلاص  انسي  الدروس   والكلام الفارغ ده... انا  هكلم  جدي  واقوله  اني  كذبت عليه... لأنك  بجد  صعب  ترجعي  ست  ف  يوم... انا  عارف  انك  بتحاولي... لكنك  خلاص  خدتي  ع  دور  الراجل  وشكلك  مستحيل   تبقي  ست ف  يوم من الايام... ع  الأقل  انتي  ما  فكرتيش تشيلي  الشعر  ده  ولا  تلبسي  فستان... عشان  تحاولي  تتأقلمي... خلاص  كبري  دماغك... انا  خارج   و  هرجع  ع  بليل  كده... عندي  شويه  شغل  ف  الشركه  هخلصهم  وارجع لك)


نور  مسكت  يده  وقالت  بآسف

(طب  ممكن  تديني  أخر فرصه... هحاول  وانت  غايب  اني  اتدرب... ولو  معرفتش  اعمل  حاجه  ف  نفسي... ابقي  اعمل  اللي  انت عايزه... بس  انت  هتخرج  لوحدك  إزاي)


محمود  بضيق(زي الناس... انا  عايز  ابقي لوحدي  شويه.... محتاج  اعيد  شويه  حسابات  مع  نفسي يا  نور... خدي  راحتك  واعملي اللي  انتي  عايزاه  بس  اعملي  حسابك... إحنا  هنرجع  القصر  النهارده بليل... كفايه  تضيع وقت لحد كده!) 


تركها  وخرج  وهوه  منهك  حقا.... شعرت أنه  يخبئ  شئ  عنها  متعمد... لكنها  بعد  أن  فكرت  قليلا


فهمت  انها  سبب  حزنه  ليس  لأنها فشلت  ف  العوده  لطبيعتها  الانثويه... لأ  بل  لأنه  تزوج  منها


و لا  يدري  كيف  سيتصرف  معها... او  مع  جده  وأبيه

*******************

ف  لبنان.... وسط الاحراش


تقف  سما  وهيه  تحك  جلدها  بعنف.... جفلت  من  منذر  وهوه  يقول  لها


(شو  بكي.... ليش عم  تحكي  جسمك  هي)


نظرت  له  مذعوره... قالت  بضيق

(بقالي  فتره  ما  استحمتش... و  المكان  هنا  كله  حشرات... والجو  بارد شويه  يعني... انا  قرفانه  من  نفسي... و بعدين يا  منذر  انت  قلت  كلام  غريب.. ممكن  افهم  قصدك)


مسك يدها  وقال

(قبل  ما  اجوابك  ع  سؤالك... جوابي  انتي  بالأول... ليش  انقذتي حياتي  وانتي  عارفه  اني  راح  اقتلك)


سما ببراءه(وانت  يعني  عايزني  اشوف  واحد  هيتقتل  قصادي  واقف  اتفرج  عليه)


منذر  بأستغراب(شو  بتقولي.. سما  انتي  أول مره شفتيني ... كنت  بقتل  واحد  من  رجالي  الخونه... ليش  ما  حاولتي  تنقذيه  إذا  كان  كلامك  صح)


سما(منذر  انا  كنت  خايفه... ايوا  كنت  جبانه... كنت  بخاف  من خيالي... كنت  بشوف  الظلم  واسكت... كتير  حصل  مني  كده... حتي  مديري  حسن... كان  بيبهدلني  بكلام  قاسي... ورغم  كده  كنت  بسكت... منذر  انا  فعلاً  كنت  جبانه  اوي)


منذر(كنتي... و شو  صار لك  هلأ)


سما(مش عارفه... بجد مش  عارفه... بس  معاك  حسيت  بالشجاعه  فجأه... لما  شفت  السلاح  متوجه  عليك... لقيت  نفسي  بطير  عليك   وابعدك من  أدام  الرصاص... هوه  انا  كده  غلطت... يعني  مكنش المفروض اعمل كده  انا  مش  فاهمه... انت  زعلان  مني يعني)


اقترب  منها  فجأه.... مسك  شعرها بقوه... برقت  بعيناها  خائفه.... قال  لها  بهمس


(لأ.. انتي  لساكي جبانه.... انتي  خايفه  مني  يا  سما.... بس  انا  ما  راح  أاذيكي  بحياتي ... انا  افديكي  بحياتي  يا  سما... مو  لأني  مديون إليك... لأ.. لإني... لإني  حبيتك)


برقت  بصدمه  اكبر.... ترك  شعرها  ومسك  يدها  و  سار  بها  بين الأشجار.... سألته  وهيه  مصدومة


(واخدني  ع  فين)


ضحك  ونظر  لها  وهوه  يسير

(شو... خفتي  تاني... ما  تخافي  سما.... راح  نروح  مكان  ظريف... بركه  ميه  سحريه... المي  فيها  تشفي  العليل... انا  راح  احرس المكان  إليك  ل  بين  ما  تتحممي... ماشي)


لم  ترد  عليه... ضربات قلبها  كانت  عنيفه... لا  تعرف  من  الخوف  و الرهبه... ام  من  المجهول... ام  من  حب  منذر  لها


وصلوا  بعد  سير  طويل.... الي  بقعه  مياه  زرقاء  صافيه... سما  نظرت  لها  و  شعرت  بدهشه  وشوق  للقفز  فيها


لكنها  لا تعرف  السباحه... نظرت  لمنذر  وقالت  بحرج

(ع  اد ما  انا  نفسي  استحمي... ع  اد  اني  مستحيل  انزل  فيها... منذر  انا  بخاف  من  الميه..)


نظر  لها  بحيره.... و نظر  حوله.. و قال  لها  وهوه  يشير  بيده


(انزلي  هونيك.... المكان  هاد  مانو  غريق... وانا  راح ضل  هون... لو  خفتي  او  حسيتي  بخطر... بس  نادي علي... ماشي)


هزت  رأسها... لا تعرف  لما  تثق  به.... اقتربت  من  الماء بخوف  كبير ...وضعت  قدمها  للتأكد  انها  أمان


و ليست  عميقه.... لكنها  رأت  الأرض  بسبب  نقاء المياه... نزعت  ملابسها  وهيه  تنظر  له... نزلت المياه  وهيه  سعيده


لكنها  خائفه... حاولت  الاستمتاع بوقتها.. لكنها  تشعر  بالقلق... كانت  تنظر  الي  منذر  كل  ثانيه... رغم  يقينها التام  بأنه  لن  يختلس النظر  إليها


لكنها  لم  تستطع ان  تشعر  بالراحة... عيناها  لمحت  شيئآ  بين  الأشجار... يتحرك... ركزت  قليلا.. وفجأه  صرخت مفزوعه


        يتبع ف الحلقه16


الوجه الآخر ***للقمر

الفصل السادس عشر.....


ف فيلا أكتوبر

ف  غرفه  نور  ف  الفيلا


كانت  تجلس  ع  طرف  الفراش  وهيه  شارده... تفكر  ف  كلام محمود... وقفت  أمام المرآه  ونظرت لانعكاسها


نظرت  لعيناها  ف  المرآه... لم  تكترث  لدموعها  التي  تتساقط  دون  وعي منها


فقط  تفكر  ف  محمود... تفكر  لما تشعر  بالضيق  لأنها سبب  حزنه... لما  تكترث  لحزنه... بداخلها  شعور  غريب


لا تستطيع أن   تفهمه... تريد  بكل  جوارحها  ان  تسعده... إن  تحميه... إن  تفعل  المستحيل  لأجله


عادت  بقدمها  للخلف... و اقتربت  من  المرآه بنفس  خطاها  الواسعة... لكنها  تذكرت  تعليم  محمود


عادت  ثانيه  للخلف  و تقدمت  بخطي  قريبه... وهيه  تتمايل  كالنساء  بخفه... حاولت  مره  واخري  حتي  نجحت


ابتسمت  بسعاده... لكنها  تذكرت  كلامه  بشأن  تنكرها  الرجولي... ركضت إلي  دولاب  ملابسها... و أخرجت


الملابس  التي  احضرتها  ماهيتاب  لها... بحثت  بينهم    عن  شئ  ترتديه  لكنها  صدمت  بملابس  نسائيه


فاضحه... معظمها  فساتين  عاريه.... نور  تجمدت  مكانها... لكنها  حسمت  أمرها.. اختارت  فستان  بسيط


و توجهت  للمرآه  مره  أخري... وقفت  أمامها.. ومسكت  الشعر  المستعار... كانت  تهم  بنزعه... لكنها لم تستطع ان


تشاهد  هذا.... ابتعدت  عن  المرآه.... و نزعت  التنكر  بالكامل.... و دخلت  الحمام... وأخذت  دوش  طويل


و  هيئت  نفسها  كامرأه.... و خرجت  من  الحمام

'' '' '' '' '' '' '' ''

ف الطابق السفلي.... دخل  محمود  الفيلا... وبحث  بنظره  عن  نور... لم  يجدها... نادي  عليها... ردت  من الطابق الثاني


(ايوا يا  محمود  بيه... انا  نازل لك  أهوه)


نظر  محمود  للسلم... منتظر  نزولها  ليأخذها  ويعودوا للقصر... لكنه  برق  بعيناه  مصدوم


ظهرت  نور  ع   أعلي السلم... وهيه  ترتدي  فستان  أبيض  قصير  اعلي الركبه ... ذات  أكمام  قصيره... يبرز  جزء من  صدرها...... له  حزام دهبي  ع  الخاصر 


لم  تضع اي  ميكب  ف وجهها... لأنها لم  تكن  ف  حاجه إليه.... عيناها  الخضراء  كانت  تلمع  بسعاده.. اهدابها الطويلة  كانت  ساحره 


شعرها  البني  الطويل  يصل  لخاصرها.... 


نزلت  ببطء  من  ع  السلم  حتي  تريه  انها  تعلمت  منه... وصلت  للأرض  واقتربت منه  بخطوات  نسائيه  مضطربه قليلاً 


وقفت  أمامه  وقالت  بصوتها  الرجولي  وهيه  تحاول  أن  تخفضه  و تنعمه  قليلاً 


(ها... إيه رأيك) 


قال  محمود  وهوه  لايزال تحت تأثير الصدمه

(انتي مين) 


نور  بضحك(مين اللي مين... هوه  في  غيرنا  هنا  يا باشا) 


محمود  بصدمه (انتي... انتي  نور.... نور... انتي  بتهزري  صح) 


نور  تعجبت... قالت  له  بأستغراب

(بهزر... ليه يا  باشا ... هوه  في  حاجه  غلط  فيا... وربنا.. وربنا  المعبود من  ساعه  ما  خرجت  وانا  بتدرب  ف  الاوضه  فوق... إيه يا  كبير.. مش  شايف  اي  تغير  ولا  ايه) 


محمود  شبه  عاد  لوعيه... مسك  ذراعها  بقوه  وقال

(دا  بجد  انتي نور... انتي... انتي  إزاي  عامله  ف  نفسك كده... إزاي  تخبي  الجمال ده كله ... إزاي  بنت جميلة  زيك  تعيش  راجل  وتكره  انها  اتخلقت  بنت... انتي  اكيد  مجنونه) 


شعرت  بحزن  عميق  يمزق  قلبها... قالت  له  و الدموع  تخونها مجدداً 


(ايوا  بكره  نفسي... بكره  نفسي  اوي  عشان  انا  شبهها... انا  شبه  اكتر  إنسانه  بكرهها  ف  حياتي... وقبل  ما  تسأل  مين.. الإنسانه دي أمي... اكتر  مخلوقه  بكرهها ... دي.. دي...) 


لم  تستطع ان تكمل  كلامها.... بكت  بوجع  لدرجة انها  سقطت  ع  ركبتيها... لكن  محمود  سندها  بقوه


و احتضنها... حاول  أن  يهدئها.. لكنها  لم  تحتمل... محمود  ضمها  بقوه  لصدره  كأنه  يريد  أن  يخبئها  بداخله


نور  هدأت  أخيرا... مسح  محمود  دموعها... وقال  بضحك 


(كل  دي  دموع  محوشها  يا  عم.. ايه  ما بتعيطش  من  يوم ما اتولدت  ولا  إيه... وربنا  خسارة  العيون  الحلوه  دي  تعيط  ع  ناس  ما  تستاهلش... كبري  دماغك  يا  نور... وخليني  بقا  اتفرج  ع  الجمال  ده  كله) 


ابتسمت له... مسك  كف  يدها.... و أدارها  حول نفسها  عده  مرات  ليشاهدها  وهيه  كالملائكه  ف  فستانها الأبيض 


اوقفها  أخيراً... و مسك  وجهها  بيده  وقال  بضحك 

(قمر  وربنا... إيه يا  بطل  نكمل  بقا... انا  رجعت ف كلامي... و  هأخدك  العزبه  عند  جدي... انا  مش  عايز حاجه منك  تاني... انتي  كده  بطل) 


ابتسمت  بخجل... محمود  أعادها  لحضنه.... وهوه  يضحك  ع  خجلها... قال  


(اللي  يشوفك  كده  ما  يشوفكيش  من  ساعه  واحده... انتي  رهيبه  يا  نور... ف  ساعه واحده  اتحولتي 180  درجه... عاماً  دا  تقدم  ممتاز... تعالي  بقا  لما  نأكل لقمه... وبعدين  نكمل  تدريبات  لو  عايزه  طبعآ  انتي ع  كده  عجباني  أوي... بس  مايضرش  لو  نكمل... كده ولا كده  مضطرين  نصبر  لما  قسيمه  الجواز  تطلع.... و بعدين  نروح  البلد  عشان  أخلص من  حوارات  ابويا  وجدي  دي... ماشي) 


ابتسمت  له  وربتت  ع  كتفه  بقوه  و تقدمته  ف  السير... نظر  لها  وقال   بصوت منخفض


(مش هتتغيري  ابدا... ايد  أمك  التقيله  دي  وهزار  البوابين  بتاعك  ده  مش  هيتغير... ماشي  اصبري  عليا  بس.. وانا  هخليكي  انثي  ع  حق ربنا) 


نور  من  الداخل(محمود  بيه  يلا  عشان  انا  جعان) 


محمود  بصوت عالي (تعالي كليني) 


************************

ف  الجزيرة 


نسرين صرخت (سييييييييف) 


نظرت  للرجل الذي  يقترب منها... و ركلته  بقوه  مفأجاه ف  وجهه.. ركضت إلي  سيف


و مسكت  إحد الرجال  من قميصه... دفعته  بقوه  للخلف... و ركلت  آخر  ف  وجهه... نهض  سيف


و ضرب  رجل أخر... لكنه  تلقي  لكمه  قويه  من  أحدهم.. نسرين  ضربت  آخر  بالبوكس  ف  وجهه


لكن  مسكها  رجل من  شعرها... استدارت إليه... ومسكت  ذراعه  و لوته  بقوه... و ضربته  ف  معدته  بقدمها 


سيف  كان  يضرب  رجلان... لكن  الكثره تغلب الشجاعة... تكاثروا  عليه  وانهالوا  عليه ضربا  مبرحا.... نسرين 


ركضت  لرشاش آلي... و أطلقت  الرصاص  ف  الهواء... وقف  الجميع  ونظروا  إليها... قالت  بغضب  وصراخ


(ابعدوا  عنه... ابعدوا  وإلا  هقتلكم) 


صرخ  سيف(حاسبييييي) 


ركلها  الرجل  الأول  الذي  ضربته.... ركلها  ف  ظهرها... سقطت ع  وجهها  ف الأرض... اخذ  منها  السلاح


لكن  سيف  جن  جنونه... ركض  إليه... و  خطف  منه  السلاح.... و  ضربه  ف  وجهه  اسقطه  أرضا 


مسك  السلاح... و أطلق الرصاص... ع  أحد  الرجال... ابتعد  الآخرين  بخوف .... نهضت  نسرين... ووقفت  بجواره 


قال  لها(روحي  ع  المركب.... يلا  بسرعة) 


قالت له  بخوف(مش  هسيبك... سييييييييف) 


غفله  أحد الرجال... و ضربه  ع  رأسه.... نسرين جن جنونها.... ركضت للرجل  و اخذت  السلاح  الذي  سقط من سيف


و أطلقت  الاعيره الناريه  ع  الخمس رجال... لحظه صمت قاتله  مرت عليهم... سيف  كان  مصعوق  مما  يري 


  ينظر  للرجال  بصدمه.... نسرين  هزته  بعنف  ليفيق  من  صدمته... قال  لها  وهوه  مصدوم


(انتي... انتي  عملتي ايييييييه... انتي  قتلتيهم) 


نسرين(يعني  اسيبهم  يقتلونا ... يلا  مفيش وقت  خلينا  نرجع  ف  المركب  بتاعهم... يلا  يا  سيف) 


سيف  لاحظ  شيئآ ع السلاح  ف  يدها.... خطف  منها  السلاح  ونظر  فيه.... قال  كأنه  يحدث نفسه


(معقوله... النقش ده  بتاع  محمود.... يعني انا  كنت  هموت  ع  ايد  رجالتك  يا  محمود... و بسلاحك) 


نسرين (انت  عارف صاحب  السلاح  ده... دا  تاجر  كبير  صح) 


سيف  بشرود(عارفه.. عارفه  كويس اوي... تعالي... خلينا  نمشي  من  هنا  بسررعه... يلااااا) 


جذبها  من  ذراعها... و  ركض  بها  الي  قارب  الرجال... ساروا  به  ووصلوا  لليخت... صعدوا  إليه... و انطلقوا  ف  عرض البحر 


لم  يتحدثوا  لبعض  بكلمه واحده..... كلا منهما  شارد  ف  أموره 


وصلوا  بعد ساعات.... خرجوا. وتوجهوا  لسياره  كانت  مركونه  بعيد... سيف  اخرج  مفتاحه... ركب  السيارة 


لكن  نسرين  لم  تركب  معه... نزل  وقال  لها  آمرا

(اركبي العربيه) 


نسرين(لأ  مش  هركب) 


سيف(مش  وقت  عنادك  دلوقتي.... تعالي  معايا  عشان  اخلصك  من  المصيبه دي) 


نسرين بجديه(مش  هينفع  اجي  معاك.... ف  عندي  مشوار ضروري  لازم  اروحه) 


صرخ  بها(مشوار  ايه... هتمشي  ازاي  وانتي  عريانه  كده... اركبييييي) 


نظرت  لجسدها... و لعنت  نفسها  ع  غباءها... ركبت  مضطره ... انطلق  سيف  بالسيارة... توقف  عن  احد المحلات 


و قال لها(خليكي  هنا... هنزل  اشتري لك  هدوم) 


لم ينتظر  ردها... تركها  و  دخل   المحل... اشتري  لها  ملابس  محترمه... خرج  إليها... لكنه  صدم


لم  يجدها... لأ  هيه  ولا  سيارته.... ألقي  بالحقيبه  البلاستيك  ف  الأرض  بعنف... و ظل  يسب ويلعن  فيها

************************

ف  شقه  عمار


نورهان   توضب  امتعتها  ف  حقيبتها... لتترك  هذا  المغرور  قليل الذوق... وترحل  لبيتها  الجديد 


كانت  تبحث  بغضب  عن  اشياءها  الناقصه.... عندما  سمعت  ارتطام  قوي.... صرخت  بفزع


(عمار) 


ركضت لغرفته... لم  تجده... أسرعت  لغرفه  المكتب... وجدته  يقف  ع  قدم  واحده  وع  وجهه  نظره ألم  واضحه... قالت له  بصدق


(انت  وقعت  تاني) 


عمار  ببرود(وانتي  مالك... مش قلتي  هتمشي... ما  مشتيش  ليه) 


نورهان(عمار  الموضوع ده  جد ومش هزار... انت  تعبان  ولازم  ترتاح  وإلا  رجلك  هتورم  اكتر... تعالي... تعالي  معايا  لو سمحت  اما  ارجعك  اوضتك) 


عمار  بألم (مش عايز ارجع  اوضتي.. زهقت من الرقده... انا  عندي  شغل  ولازم  أخلصه) 


اقتربت  منه  وقالت  بجديه

(طب  ممكن  تخليني  أساعدك... انا  عارفه  انك  مش طايق وجودي  معاك... وصدقني  انا  زيك.. يعني الشعور  متبادل بينا... بس  دا  ما  يمنعش  اني  ااقف  جمبك  ف  شدتك.. انت  ابن عمي ف  الآخر برضو) 


نظر  لها  طويلاً... و ابتعد  عن المكتب  بصعوبة  وقال  لها  آمرا

(ماشي... تعالي  هنا... افتحي  النت... و ادخلي  ع  موقعنا.. عايزك  تشوفي لي  كام  حاجه... تعالي  اقعدي  هنا  وانا  هقولك تعملي ايه) 


اؤمت  له  موافقه... وجلست  ع  مكتبه... أملي  عليها  ما  يريد... وكانت  تجيبه  بسرعه  بطريقه  عمليه


طلب  منها  بيانات  و ملفات  تخص العمل... كانت  تنفذ  كلامه  و تقوم  بالعمل  ع  اكمل وجه


مر  وقت طويل  و الاثنان  يعملان  بكد... نورهان  نظرت  ف  الساعه  وقالت له


(عمار.. بيتهيألي  ناخد  بريك  شويه... انا  هقوم  احضر لك  العشا... و عقبال  ما  يجهز... هغير لك  ع  رجلك  اوووكي) 


اؤم  لها  برأسه... تركته  و دخلت  المطبخ  تحضر له  طعام  سريع  وشهي..... تركت الطعام  ع  النار.. و ذهبت


لتحضر  له  المرهم  و الشاش  النظيف..... دخلت  إليه... و  غيرت  له  ع  قدمه


نظر لها  وهيه  تمسك  قدمه  وتحاول  ان  لا  تؤلمه... شعر  بخجل  رهيب  يحتل  قلبه.... فجأه تذكر  كلامه  القاسي  معها


منذ أن  تزوجها... لكنه  حاول  أن  يبعد  هذا  الشعور  عن  قلبه... لكنه  لم  يستطع.... ظل  يحدق  فيها  حتي  بعد  أن  أنتهت 


تركته  وذهبت  لتحضر  له  دواء المسكن .... عادت  له  بالدواء  و  كوب  عصير برتقال.... تناول  الحبوب  من  يدها


وشرب  العصير  جرعه  واحده... ابتسمت  له  رغما عنها.. وقالت


(بالشفا ان شاء الله) 


تركته  وخرجت... عمار  ظل  ينظر  ع  الباب  منتظر  عودتها.... لم  تتأخر  كثيرا... عادت  بالطعام 


ووضعته  أمامه... فأجاها  عندما قال

(اقعدي  اتعشي  معايا) 


نظرت له  غير  مصدقه... لكنه  مسك  يدها  وأجلسها  بقوه.. و اكمل بقسوة 


(خلصي  كلي  معايا... احنا  لسه  عندنا  شغل  كتير  مش  عايزك  تسيبي  الشغل  تاني  عشان  جعانه... ولا  تقعي  من  طولك  و تقرفيني... وربنا  هسيبك  مرميه  ولا  هعبرك) 


رفعت حاجبها ف  دهشه... لم  تغضب  منه.. ولا  تعرف  لماذا؟؟؟؟ جلست  قبالته... و  بدأت  تتناول  الطعام  دون أن  تنظر له

*******************

قبل  ساعات  ف احراش  لبنان... 


صرخت  سما  عندما  رأت  رجل  بين  الأشجار  ينظر إليها.. ظنت  للحظه  انه  حسن... 


فوجئت  بمنذر  بجوارها  ف  المياه... برقت  بعيناها  و غطست  للمياه  تغطي  جسدها... لكنه  أسرع  إليها 


وامسكها  بقوه .. أخرج  رأسها  خارج المياه... و مسك  وجهها  وقال  لها  بقلق


(انتي  منيحه... سما  ردي علي) 


لم  تجبه  من  خجلها... نظر  ليده  التي  تحاوط  جسدها... أبعد يده  فوراً... نزلت بجسدها  للمياه ... عدا  وجهها


قالت  له 

(شفت  واحد  هناك... ف  راجل  واقف  عند الشجر... منذر  انا عايزه اخرج من هنا) 


نظر بقلق  ع الأشجار... وقال لها

(انا  راح  شوف  مين  هنيك... وانتي  أخرجي  وألبسي  بسرعه) 


انتظرت  حتي  خرج  وركض  للاشجار.... خرجت  تهرول  الي  ملابسها... و ارتدتها  بسرعه... عاد  منذر  ومسك  يدها... جرها  وهوه  يقول  بغضب


(ما  لقيت  حدا... بس  أكيد  هادول  رجال  مناحي... يلا  قبل  ما  يكمشونا) 


سارت  معه  بخطوات  سريعه.... وصلوا  للبقعه التي  يجلس  بها  رجاله... اجلسها  ف  مكان  قريب  لكنه


بعيد  عن  رجاله... و نظراتهم  الفضوليه.... عم  المساء  سريعاً.... سما  خائفه  من  رجال  منذر.. والرجال  اللذين


يطاردوهم.... ومن  المكان  كله... تسمع بوضوح  صوت  حيوانات  مفترسه  قريبه.... كانت  تنظر  لمنذر  كل  بضع


دقائق... للتأكد  من  وجوده.... ترك  رجاله  و  ذهب  إليها  أعطاها  طعام ... وجلس  بجوارها... شعرت  بأمان  وهيه  قربه


حان وقت النوم.... رجال  منذر  تمددوا  أرضا... دون  غطاء  او  اي  واقي  من  البرد


منذر  فعل  مثلهم... مدد  جسده  ع  الأرض  وأشار  لسما 

(تعاي  نامي  هون ... تعاي  سما  مو  تخافي) 


كانت  ترتجف من البرد... لاحظ  منذر  ارتجاف  يدها  وشفتاها... نهض  جالسا.. وقال  لها  بأسف  وهوه  يمسك يدها


(انا  بعتذر  منك... انا  السبب  انك  بردانه  هلأ... بس  اوعدك  حبيبتي... راح  اخدك  من  هون... و نروح  المدينه... راح  اشتري  إليك  بيت  كبير... بيت  يليق  بأميره  متلك) 


قبل يدها ... و جذبها  برقه... اضطرت  تنام  بجواره... بسبب  بعدهم  عن  النيران... خشت  من  هجوم  الحيوانات  المتوحشة عليهم  وهم  نيام


راحت  ف نوم عميق   رغم  شعورها  بالبرد  والخوف... لكن  عندما  ضمها  منذر  لصدره... ألصقها  بجسده  ليدفئها


نامت  فوراً.... لكنها  فتحت عيناها  ع  شئ  يضربها  ف  قدمها... رأت  رجل  ملثم   يرفع  يد  منذر  من  عليها


كانت  ستصرخ... لكن  الرجل... كتم  فمها  و شدها  بقوه... قبل  أن  توقظ  منذر  ورجاله.... حملها  الرجل  ع  كتفه


كانت  تركله  وتحاول  الصراخ.... لكنه  ركض  بها... انزلها  لشجره  قريبه  منهم... و نزع الوشاح  من  ع  وجهه


سما  نظرت  بصدمه  لمنقذها... غير  مصدقه  انه  يقف أمامها  حقا

      يتبع ف  الفصل     17و 18     

تعليقات